दैनिक जागरण समूह पैसा के लिए भूखा भेडि़या बन चुका है. तमाम लोगों के पैसे हड़प रहा है. बनारस में जागरण ने अध्यापकों को मानदेय देने का वादा करके पैसे नहीं दिए तो देहरादून में वीरेंद्र दत्त गैरोला के विज्ञापन का कमीशन संस्थान ने मार लिया है. इतना ही नहीं उसने प्रत्याशियों द्वारा दिए गए धनराशि की बजाय कम राशि का रसीद पकड़ा दिया, जिससे प्रत्याशियों में भी नाराजगी है.
वीरेंद्र दत्त गैरोला, जिनसे प्रबंधन ने जबरिया इस्तीफा मांग लिया था, ने जागरण संस्थान को बीते विधानसभा चुनाव के दौरान लगभग दो लाख रुपये के विज्ञापन उपलब्ध कराए थे. प्रबंधन ने वादा किया था कि विज्ञापन लाने वाले लोगों को पंद्रह प्रतिशत कमिशन दिया जाएगा. परन्तु संस्थान ने ना तो वीरेंद्र दत्त को उनके कमीशन के लगभग 29 हजार रुपये उपलब्ध कराए और ना ही प्रत्याशियों को उनके द्वारा दिए गए धनराशि की रसीद ही दिए. प्रत्याशी भी जागरण के इस धोखाधड़ी से नाराज हैं.
इसके साथ ही जागरण द्वारा चुनावों के दौरान पेड न्यूज के रूप में की जा रही धांधली तथा ब्लैकमनी जुटाने के खेल का भी खुलासा हो रहा है. यानी जागरण प्रत्याशियों से ज्यादा पैसे लेकर उन्हें कम पैसे की रसीद देकर देश के साथ भी धोखा कर रहा है. साथ ही प्रत्याशियों को भी धोखेबाजी के मजबूर करता रहा है, उकसाता रहा है. फिलहाल वीरेंद्र दत्त ने प्रबंधन को पत्र लिखकर अपने कमीशन के बकायए पैसे की मांग की है. इतना ही नहीं जागरण ने उनके एक महीने के ईएल का पैसा भी हड़प लिया है.







