: वरिष्ठों पर अपने लोगों को सेट करने के लिए यह कार्रवाई करने का आरोप : इधर जागरण ने तीन सौ करोड़ खर्च करके नियम कानून से नईदुनिया को खरीदा तो वहीं बेतिया में इस अखबार के कर्ताधर्ता बिना नियम कानून के पूरी टीम को ही सस्पेंड कर दिया. किसी को कोई कारण नहीं बताया गया. ब्यूरोचीफ से लेकर चपरासी तक को काम करने से रोक दिया गया है. इन लोगों को हटाए जाने का कोई कारण नहीं बताया गया है. मोतिहारी से रविभूषण सिन्हा की टीम बेतिया पहुंचकर अखबार का संचालन कर रही है. इसको लेकर जो खबरें आ रही हैं अगर वो सही हैं तो यह काफी शर्मनाक मामला है. पर जागरण प्रबंधन हटाए जाने का कारणों पर मुंह खोलने को तैयार नहीं है.
बेतिया में काफी समय से सेवा दे रहे ब्यूरोचीफ संजय उपाध्याय, अमित कुमार, केके मिश्रा, प्रेमचंद पाण्डेय, शिवचंद्र पाण्डेय, संजीव कुमार, आलोक कुमार, मनोज कुमार, करुणेश तथा मधुसूदन को सस्पेंड कर दिया गया है. सूत्र बता रहे हैं कि इन सभी लोगों को प्रबंधन ने बिना कोई जानकारी दिए मोतिहारी से रविभूषण को बेतिया भेज दिया. जब कुछ रिपोर्टर अपने टाइम से ऑफिस पहुंचे तो वहां इन लोगों को बैठे देखकर सन्न रह गए. रिपोर्टरों से कहा गया कि आप लोग जाइए, आपको काम नहीं करना है. जब इन लोगों ने पूछा क्यों तो जवाब मिला कि हमें कुछ नहीं मालूम जब आपलोगों की जरूरत होगी फोन कर दिया जाएगा.
हालांकि प्रबंधन की तरफ से इन लोगों को हटाने का कोई कारण नहीं बताया गया है परन्तु बताया जा रहा है कि बेतिया के पूर्व ब्यूरोचीफ रह चुके मृत्युंजय भारद्वाज को सेट करने के लिए ये रणनीति बनाई गई है. मृत्युंजय पर कई संगीन आरोप लगने के बाद दैनिक जागरण, मुजफ्फरपुर के तत्कालीन संपादक धीरेंद्र श्रीवास्तव ने इन्हें हटा दिया था. उमेश शुक्ला भी इनको जागरण में घुसने नहीं दिया, परन्तु उमेश के जाते ही मृत्युंजय के आने की चर्चाएं होने लगी. कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि मृत्युंजय ने प्रभारी मधुकर मिश्र तथा संपादकीय प्रभारी देवेंद्र राय को अच्छा खासा दान दक्षिणा उपलब्ध कराया है.
इस संदर्भ में संपादकीय प्रभारी देवेंद्र राय तथा मधुकर मिश्र से बात करने की कोशिश की गई, मधुकर मिश्र का फोन जहां नॉट रिचेबल बताता रहा वहीं संपादकीय प्रभारी देवेंद्र राय ने बेतिया के लोगों के हटाए जाने के सवाल पर ही कहा ऐसा कुछ नहीं है, बाद में बताते हैं और फोन काट दिया. अब किसी मुद्दे पर एक पत्रकार होकर उन्होंने जिस तरह रियेक्ट किया तथा बात को स्पष्ट करने की बजाय टालू रवैया अपनाया उससे तो यही लग रहा है कि दाल में कुछ काला जरूर है. बहरहाल, अब यह देखना होगा कि सस्पेंड किए गए लोगों के साथ क्या किया जाता है तथा वे लोग प्रबंधन के खिलाफ कौन सा कदम उठाते हैं.






