दैनिक जागरण, बनारस के ज्यादातर कर्मचारी अपने इंक्रीमेंट की राशि देखने के बाद नाराज हैं. हालांकि अभी इस यूनिट में प्रमोशन की लिस्ट नहीं पहुंची है, लेकिन जी जान लगाकर काम करने वाले लोगों को जिस तरह से इंक्रीमेंट दिया गया है, उससे वो खुश होने की बजाय दुखी ज्यादा हैं. खबर है कि इंक्रीमेंट में ठीक ठाक रकम उन्हीं लोगों को मिली है जो प्रबंधन के खास हैं. यानी जिन लोगों की संपादक और इस स्तर के लोगों से तालमेल बढि़या हैं उन्हें इंक्रीमेंट से खुशी मिली है.
इसमें शक नहीं है कि जागरण में अच्छे काम करने वालों की कभी कमी रही हो, लेकिन जागरण प्रबंधन काम की बजाय चाटुकारिता को महत्व देकर अच्छे लोगों को अपने साथ लंबे समय तक नहीं रख पाया है. तमाम ऐसे उदाहरण हैं जो जागरण में रहकर अच्छा काम करते हुए भी अपनी पहचान नहीं बना पाए, लेकिन जैसे ही वे दूसरे मीडिया हाउसों से जुड़े खुद तो सफल हुए ही अपने संस्थान को भी लाभ पहुंचाया. जागरण, बनारस में ही अनेकों उदाहरण मौजूद हैं, जहां पढ़े लिखों की बजाय अपनढ़ों और फोटोग्राफरों तक को जिलों में ब्यूरोचीफ बनाया जा चुका है.
खैर, मामला इंक्रीमेंट का है. जागरण, बनारस में इक्रीमेंट की रकम देखने के बाद ज्यादातर कर्मचारी असंतुष्ट हैं. इन लोगों को चार सौ रुपये लेकर ढाई हजार रुपये तक की इंक्रीमेंट मिली है, लेकिन अस्सी फीसदी से ज्यादा पांच सौ रुपये के आसपास इंक्रीमेंट पाने वाले ही बताए जा रहे हैं. एडिटोरियल के कर्मचारी तो प्रबंधन से पूरी तरह नाराज हैं. माना जा रहा है कि इस नाराजगी का असर काम पर भी पड़ेगा. हालांकि इंक्रीमेंट राशि देखने के बाद कुछ कर्मचारी अब नए संस्थानों में जाने की तैयारी भी कर रहे हैं.






