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जागरण-भास्‍कर के पंगा में पाठकों को मिल रहे मुफ्त अखबार

रोहतक जिले के महम कस्बे व उसके अधीन आने वाले गांवों में पाठकों को एक की बजाय दो-दो समाचार पत्र एक साथ पढऩे को मिल रहे हैं। यह कारनामा दैनिक जागरण व दैनिक भास्कर के आपसी कम्पीटिशन के चलते हो रहा है। जिसके यहां पहले से दैनिक जागरण जा रहा था अब उसके यहां बगैर पाठक की इजाजत लिए दैनिक भास्कर भी जाने लगा है। जगजाहिर है कि दैनिक जागरण व दैनिक भास्कर का आपस में जबरदस्त कम्पीटिशन है। एक दूसरे की खाट खड़ी करने में कोई भी मौका नहीं चुकता।

रोहतक जिले के महम कस्बे व उसके अधीन आने वाले गांवों में पाठकों को एक की बजाय दो-दो समाचार पत्र एक साथ पढऩे को मिल रहे हैं। यह कारनामा दैनिक जागरण व दैनिक भास्कर के आपसी कम्पीटिशन के चलते हो रहा है। जिसके यहां पहले से दैनिक जागरण जा रहा था अब उसके यहां बगैर पाठक की इजाजत लिए दैनिक भास्कर भी जाने लगा है। जगजाहिर है कि दैनिक जागरण व दैनिक भास्कर का आपस में जबरदस्त कम्पीटिशन है। एक दूसरे की खाट खड़ी करने में कोई भी मौका नहीं चुकता।

दरअसल, पिछले 7 साल से दैनिक जागरण की एजेंसी महम में अजीत नामक युवक के पास थी। किसी कारणवश उसने मई के शुरुआत में ही दैनिक जागरण की एजेंसी को छोड़ दिया। इसी बात का दैनिक भास्कर ने तुरंत फायदा उठाया और युवक अजीत को दैनिक भास्कर की 600 प्रतियों की अलग से एजेंसी थमा दी। अब जहां पहले दैनिक जागरण डा़ला जा रहा था वहां दैनिक भास्कर की प्रति जाने लगी। इसका दैनिक जागरण को सीधा-सीधा नुकसान हो रहा था। दैनिक जागरण ने अपने महम के पत्रकार प्रीतसिंह को तुरंत नई एजेंसी थमा दी। अब जहां पहले दैनिक जागरण जाता था उन्हीं पाठकों के यहां दोबारा से दैनिक जागरण समाचार पत्र डलना शुरू हो गया।

पाठकों को अब एक की बजाय दो-दो समाचार पत्र पढऩे को मिल रहे हैं। जब पाठक किसी एक समाचार पत्र को बंद करने की बात हाकर से कहता है तो उनका जवाब होता है कि आप समाचार पत्र पढि़ए पैसे की चिंता क्यों करते हो। हाकर द्वारा ऐसा कहे जाने के बाद यह तो तय है कि महीने के आखिरी दिन एक एजेंसी संचालक के पाठक की तरफ से रुपए मरने तय हैं क्योंकि पाठक के लाख कहने के बावजूद भी दोनों में से कोई एक समाचार पत्र डालना बंद नहीं कर रहा है। वहीं आपसी कम्पीटिशन के चलते दोनों एजेंसी संचालकों ने एक दूसरे के हाकर को भी लालच देकर तोडऩे शुरू कर दिए हैं। फिलहाल दैनिक भास्कर ने मौके का फायदा उठाकर एकदम से अपनी 600 प्रतियां बढ़ाकर दैनिक जागरण को कड़ी चोट पहुंचाने का कार्य कर दिया। अब आने वाला समय ही बताएगा कि दैनिक जागरण, इस तरह से बढ़ रहे दैनिक भास्कर के कदम को किस तरह से रोक पाता है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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