सेवा में, प्रिय यशवंत जी। मैं संतोष अग्रवाल झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के जादूगोड़ा दयाल मार्केट मे रहता हूँ एवं मैं एक स्थानीय दैनिक समाचार चमकता आईना का पत्रकार हूँ। इसके अलावा मेरे बड़े भाई सुशील अग्रवाल दैनिक जागरण (जमशेदपुर) के पत्रकार हैं (इसके अलावा हम दोनों भाई का राशन एवं मोबाइल का दुकान भी है)। यहां मैं आपको बताना चाहता हूँ कि ईमानदारी पूर्वक पत्रकारिता करना एवं थाना प्रभारी के गलत कारनामों को उजागर करना कितना मंहगा हो सकता है।
यशवंत जी ईमानदारी पूर्वक पत्रकारिता के कारण एक साल में थानेदार द्वारा हम दोनों भाइयों के खिलाफ सबसे पहले 06-02-2012 को रंगदारी का झूठा मुकदमा दायर करवाया गया, जिसे वरीय अधिकारियों ने जांच कर झूठा साबित कर दिया। इसके बाद 12-10-2012 को फिर से थाना प्रभारी द्वारा एक झूठा मुकदमा (रंगदारी एवं एसटी) मुखिया से करवाया गया, जिसे वरीय अधिकारी ने जांच के बाद झूठा साबित कर दिया। इसके बाद 18-03-2013 को एक झूठा मुकदमा जमीन एवं एसटी से संबन्धित किया गया, जिसकी जांच वरीय अधिकारियों द्वारा की जा रही थी, कि इसी बीच थाना प्रभारी ने अपनी दबंगाई दिखाते हुए जो किया उससे हमारी रूह तक काँप गयी है। और ये पूरी कहानी इस प्रकार है….
12/04/2013 को सुबह करीब 9.40 के आस-पास थाना प्रभारी नयन सुख दाड़ेल ने बिना वर्दी एवं वारंट के हम दोनों भाइयों को हमारे दुकान से गिरफ्तार किया। हमारे मांगे जाने पर हमे वारंट नहीं दिखाया गया और थाना प्रभारी द्वारा कहा गया कि बहुत न्यूज़ लिखता है, बहुत आरटीआई मांगता है और हमलोगों को माँ की गाली भी दी गयी। थाना प्रभारी के साथ बड़ी संख्या में थाना के कर्मचारी भी थे, जो बिना वर्दी में थे। हम दोनों भाइयों के हाथ में हथकड़ी लगाकर गाली–ग्लौज एवं मारपीट करते हुए करीब आधा किलोमीटर दूर पुलिस स्टेशन तक मुख्य सड़क पर पैदल चलाते हुए ले जाया गया। इस दौरान हमारा मोबाइल जब्त कर लिया गया। हमारे साथ अपराधियों की तरह सलूक किया गया एवं हमारे घर के सदस्यों को जानकारी तक नहीं दी गई।
थाना ले जाने के बाद हमें तुरंत पुलिस जीप में बैठाया गया और हमें कोर्ट के बदले मौभंडार ओपी भेज दिया गया। इस दौरान हमारे साथ जो भी अधिकारी थे उनके पास गिरफ्तारी का कोई कमान या वारंट भी नहीं था। मौभंडार ओपी ले जाने के बाद भी बाहर किसी को जानकारी नहीं थी कि हमे कहाँ ले जाया गया है। मौभंडार ओपी में करीब एक घंटे बाद जादूगोड़ा थाना के एएसआई सुशील डांगा एवं सिपाही संजय राम पहुंचे। उनके हाथ में चार पेपर थे। दो खाली थे एवं दो कमान थे। इन चारों पेपर पर हमें हस्ताक्षर करने को कहा गया। हमारे मना करने पर हमे बुरी तरह मारा-पीटा गया। इसपर भी जब हमने हस्ताक्षर नहीं किया तो बंदूक की नोंक पर हमसे जबर्दस्ती हस्ताक्षर करवाया गया। हस्ताक्षर करवाने के बाद हमारे साथ जो व्यवहार किया गया उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।
जैसे ही हमने हस्ताक्षर किया वैसे ही हमारे ऊपर सुशील डांगा, संजय राम, मौभंडार ओपी के एएसआई सीताराम एवं अन्य सिपाहियों ने हम पर चाकू से हमला कर दिया, जिसके कारण मेरे बाएं हाथ की कलाई कट गयी एवं एक नस भी कट गया एवं मेरे बड़े भाई सुशील अग्रवाल को हाथ पैर कई जगह से कट गया। हमें जान से मारने की कोशिश की जा रही थी कि इसी बीच हम दोनों भाई बचाओ – बचाओ चिल्लाते हुए ओपी से बाहर भागे, जिसके कारण वहाँ पब्लिक की भीड़ लग गयी और हमारी जान बच गई। इसके बाद हमे घाटशिला अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां हमारी स्थिति को देखते हुए हमे टाटा एमजीएम अस्पताल भेज दिया गया। वहाँ से भी हमारी स्थिति को देखते हुए हमें डाक्टरों द्वारा टीएमएच भेजा गया, जहां पाँच दिनों बाद हमें छुट्टी मिली। इसके बाद हमे घाटशिला जेल भेज दिया गया जहां से 15 मई को हमें जमानत मिली।
यशवंत जी दुख की बात यह है कि जिस दिन 12-04-2013 को हमे गिरफ्तार किया गया उसी दिन थाना प्रभारी द्वारा हम दोनों भाइयों पर एक और झूठा मुकदमा दर्ज़ किया गया, जिसको करने में थाना प्रभारी ने इतनी जल्दबाज़ी दिखाई की सभी हैरानी में पड़ गए। हमारी गिरफ्तारी के खिलाफ दो दिन जादूगोड़ा बंद रहा। एसएसपी अखिलेश झा ने जांच करवाया और जांच में थाना प्रभारी नयन सुख दाड़ेल एवं जादूगोड़ा पुलिस को क्लीन चिट दे दी गई। इसके बाद मामला में डीआईजी ने जांच की एवं पाया कि पूरे मामले में थाना प्रभारी की बहुत बड़ी गलती है। इसके बाद थाना प्रभारी की बदली टेल्को थाना में कर दिया गया। थाना प्रभारी के बदली होने के बाद भी एसएसपी अखिलेश झा की मिली भगत के कारण वे जादूगोड़ा में ही जमे रहे, पर नए एसएसपी रिचर्ड लकड़ा के आने के बाद उसी दिन थाना प्रभारी जादूगोड़ा से चले गए। इसमें मैं कहना चाहता हूँ कि थाना प्रभारी को पूरी तरह से एसएसपी का संरक्षण था एवं जादूगोड़ा थाना से उन्हें मोटी कमाई हो रही थी।
(यशवंत जी आपको याद होगा कि 03-07-2012 को मैंने आपको मेल किया था, जिसमें थाना प्रभारी दाड़ेल द्वारा जुआ के समाचार से बौखलाकर हमे जेल भजने की धमकी दी गयी थी। इख खबर को भड़ास पर 04/या 05 जुलाई 2012 को प्रकाशित भी किया गया था। दैनिक जागरण में हमारे द्वारा 02-07-2012 को जुआड़ियों के लिए सेफजोन बना जादूगोड़ा थाना क्षेत्र शीर्षक से समाचार छापा गया था।)

घटना के समय और एफआईआर दर्ज करने के समय में गड़बड़ी
यशवंत जी जादूगोड़ा थाना क्षेत्र में जादूगोड़ा के ही कमल सिंह, दीपक सिंह (दोनों सगे भाई) द्वारा अवैध रूप से चिटफंड का धंधा किया जाता है और इनके द्वारा लोगों को एक लाख के बदले पाँच हज़ार मासिक दिया जाता है। एजेंट को एक हज़ार अलग से दिया जाता है। इसी प्रकार से करीब 300 करोड़ से भी अधिक का धंधा ये लोग करते हैं, जिसको समय-समय पर हमने प्रकाशित किया था। कमल सिंह द्वारा लोकल थाना को सेटिंग कर यह काम किया जा रहा है, जिसके कारण थाना प्रभारी को समाचार से बहुत तकलीफ होती थी एवं इसके अलावा कमल के साथ बहुत से अपराधी भी शामिल हैं, जो उसके धंधा का विरोध करने वालों को सबक सिखाते हैं।
जादूगोड़ा थाना क्षेत्र में 26-01-2012 को सरकारी जमीन के बिक्री भूमि माफिया राजकुमार यादव द्वारा की जा रही थी। वार्ड सदस्या बसंती हांसदा द्वारा पूछे जाने पर राजकुमार एवं उसके भाइयों द्वारा उसे गाली-ग्लौज की गयी। थाना में लिखित शिकायत दर्ज करवाने के बाद भी थाना प्रभारी नयन सुख दाड़ेल द्वारा मामला दर्ज़ नहीं किया गया। राजकुमार से पैसे खाकर सरकारी जमीन पर उसे कब्जा दिलवाकर घर बनवा दिया गया। जादूगोड़ा थाना क्षेत्र में अपराधियों द्वारा महादेव कर पर झूठा मामला दर्ज़ किया गया एवं झूठे मामले में थाना प्रभारी के सहयोग से फंसाया गया।
इसके अलावा जादूगोड़ा थाना मे 14/03/2012 को 14 वर्षीय छात्र पीरू मांझी की हत्या कर शव पेड़ से टांग दिया गया था, जिसमें अपराधियों के बारे में थाना प्रभारी नयन सुख दाड़ेल को पूरी जानकारी है एवं पैसे खाकर उन्होंने अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं की। मृतक छात्र के परिजनों से थाना प्रभारी ने बहुत ही गलत तरीके से बात की एवं मृतक छात्र के बड़ी बहन को गंदी – गंदी गालियां देकर थाना से भगा दिया। इस पूरे मामले मे जादूगोड़ा के एक नेता टिकी मुखी का पूरा हाथ है एवं उसी के इशारे पर साजिश कर थाना सेटिंग कर छात्र की हत्या की गयी, जो जांच का विषय है। पर आज तक कोई जांच नहीं किया गया और न ही कोई फोरेंसिक टीम को शामिल किया गया।
जादूगोड़ा थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध शराब की भट्टियां, अवैध जुआ संचालन, हब्बा डब्बा का खेल, जिसके कारण 14/01/2013 को इंस्पेक्टर अवधेश सिंह एएसपी के आदेश पर छापेमारी की, पर थानेदार के इशारे पर जुआ संचालकों ने इंस्पेक्टर पर जानलेवा हमला कर दिया, जिसके बाद जान बचाने के लिए इंस्पेक्टर को हवाई फाइरिंग करनी पड़ी थी। जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के आसनबनी पंचायत के मुखिया ने दो ग्रामीण तिकाराम एवं गोविंद हेंबरम को घर से ले जाकर बांधकर मुखिया धीरेंद्र नाथ टूडू ने जबर्दस्ती 8000 रुपये लेकर उन्हें छोड़ा था। गाँव में पंचायत के बाद दोनों ने थाना में मामला दर्ज़ करवाया इसके बावजूद भी थाना प्रभारी ने मुखिया से पैसे खाकर मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद कोर्ट में शिकायत दर्ज करने के बाद भी थाना प्रभारी ने मामला दर्ज नहीं की फिर करीब 45 दिन बाद एसडीपीओ के आदेश के बाद मामला दर्ज़ किया गया। जिसके बाद 14 अप्रैल 2013 को मुखिया और उनके सहयोगियों का वारंट निकला फिर भी अभी तक पुलिस ने मुखिया को गिरफ्तार नहीं किया है।
इसके अलावा भी बहुत से मामलों को हमने निर्भीकता के साथ उजागर किया, जिससे बौखलाकर थाना प्रभारी ने कानून को हाथ में लेकर हमारे ऊपर इतनी बड़ी कारवाई की, वो भी कानून को हाथ में लेकर जबकि अपराधियों को वारंट होने के बावजूद भी गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। यशवंत जी जादूगोड़ा थाना में एक झूठा मामला 12/04/2013 को दर्ज़ किया गया है, जिसका एफ़आईआर का स्कैन भी भेज रहा हूँ, जिसमे आप देखेंगेकि थाना प्रभारी ने हड़बड़ी मे मामला दर्ज़ किया है, जिसमें घटना 11/04/2013 शाम 5.30 बजे की दिखाई गयी है, जबकि एफ़आईआर 11/04/2013 को सुबह 10 बजे ही कर लिया गया है। यानि की कांड होने से पहले ही थाना प्रभारी को जानकारी मिल गयी थी।
यशवंत जी जिस मामले में हमें गिरफ्तार किया गया है, उस मामले में जितने भी गवाह हैं, सभी अपराधी प्रवृत्ति के हैं। उसमे से एक अशोक सिंह को जादूगोड़ा पुलिस ने मेरे घर के सामने मुख्य सड़क पर पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया था और वो 6 महीने जेल मे भी रहा था। दूसरा गवाह धनंजय प्रजापति जो अशोक का आपराधिक पार्टनर है और दोनों ने मिलकर कई आपराधिक मामलों को अंजाम दिया है, जिसके कारण धनंजय को उसके घर वालों द्वारा घर से भी निकाल दिया गया। था तीसरा गवाह अरुण मण्डल है, जो अवैध हब्बा डब्बा संचालक है, जबकि चौथा एवं पांचवां गवाह स्वयं आरोपी है, जिन्होंने आरोप लगाया है। सभी गवाह दिखाये गए घटना स्थल से दूर के हैं जबकि आस-पास के घर वालों ने कहा था कि यहाँ पर कोई घटना हुई ही नहीं है। फिर भी हमारे ऊपर कार्रवाई की गयी, जिसको मैं चैलेंज करता हूँ एवं हर प्रकार की जांच को तैयार हूँ। हमें फँसाने के लिए मनगढ़ंत कहानी एवं झूठे गवाह तैयार कर मामला दर्ज़ करवाया गया है।
यशवंत जी एक बहुत बड़ी बात यह है कि पढ़ा लिखा आदमी और कानून की जानकारी रखने वाला आदमी किसी को जातिसूचक गाली क्यों देगा, किसी को फँसाने का यह सबसे आसान तरीका है।
संतोष अग्रवाल
जादूगोड़ा
पूर्वी सिंहभूम
झारखंड
9234258581, 9507629266
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