प्रिय यशवंत जी, झारखंड पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा कमल सिंह चिटफंड घोटाले में संचालक कमल सिंह उसका भाई दीपक सिंह एवं लगभग बीसियों एजेंट डेढ़ माह से अधिक समय से फरार हैं. उनके ऊपर वारंट भी निकाला जा चुका है. इसके बावजूद भी अभी तक पुलिस प्रशासन द्वारा किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है. यह बहुत ही आश्चर्यजनक लगता है कि पन्द्रह सौ करोड़ रुपयों के घोटालेबाजों को पकड़ने में पुलिस इतनी ढिलाई बरत रही है.
पुलिस प्रशासन का रुख शुरू से ही कमल ग्रुप के ऊपर बहुत ही सहयोगात्मक रहा है. कमल और उसका भाई दीपक सिंह तथा बीसियों एजेंट 23 सितम्बर 2013 को जादूगोड़ा से भागे हुए हैं. प्रशासन के पास इतना इंटेलिजेंस विभाग रहते हुए यह कैसे संभव है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग इतने दिनों तक फरार रह सकते हैं. प्रशासन के इस लापरवाहीपूर्ण रवैये के कारण निवेशकों में भारी आक्रोश है और बड़ी संख्या में लोगों का कहना है कि कमल और उसका ग्रुप पुलिस प्रशाशन के संरक्षण में है और वे न्यायालय से अग्रिम जमानत कराने की फिराक में हैं.
कमल ग्रुप की कंपनियां जिसमें वो निवेश कराता था-
1-राजकॉम कंपनी, 2-राजगन्या होटेल्स प्राइवेट लिमिटेड, 3-राजकॉम मोबाइल, 4-राज रेस्टोरेंट, 5-राजकोष मनी, 6-राजकोष केपिटल मार्केटिंग लिमिटेड, 7-राज बाज़ार
इन कंपनियों के अलावा भी उसने कई फर्जी कंपनी खोलकर झारखंड एवं अन्य राज्यों से मोटा पैसा अपनी कंपनी में निवेश करवाता था. कमल सिंह की एक कंपनी राजगन्या होटेल्स प्राइवेट लिमिटेड जिसके नाम पर उसने करोड़ों का इन्वेस्टमेंट कराया था उसका पता भी फर्जी था. उसने जो पता लिखा था, वो ये था- M/S RAJAGANYA HOTELS PRIVATE LIMITED reg office at d-502, 5th floor, new jay palace, C.H.S. LIMITED, YARI ROAD, VERSOVA, ANDHERI (WEST) , MUMBAI 400061, BRANCH OFFICE AT DHARAMDIH . ITTAABHATTA 64 , POST JADUGODA , DIST. EAST SINGHBHUM JHARKHAND 832102,
इस फर्जी कंपनी के नाम से शेयरहोल्डर लोन एग्रीमेंट के नाम पर लोगों से पैसा इन्वेस्ट करवाता था, नीचे इसकी स्कैन कॉपी दी जा रही है, इसी से समझ में आ जाएगा की कितना बड़ा फर्जीवाडा किया गया है.
कमल के पिताजी मुनमुन सिंह के बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफर हुआ है इसके बावजूद भी अभी तक मुनमुन सिंह के ऊपर पुलिस द्वारा कोई करवाई नहीं किया गया है, और ना ही इतने बड़े मामले में कोई विशेष जांच टीम काम कर रही है, राजगन्या होटेल्स के अन्य पार्टनर अनीस रंजन एवं अभिषेक पांडे पर तो प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की गयी है, कार्रवाई और गिरफ्तारी तो बहुत दूर की बात है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.