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जिंदल पर रहम, जी वालों पर जुल्म… इस अंधेरगर्दी पर बाकी मीडिया वाले चुप क्यों?

नवीन जिंदल की शिकायत के बाद पुलिस और सिस्टम इतना सक्रिय हुआ कि सुधीर चौधरी पर देखते ही देखते तीन मुकदमें लाद दिए गए. पहला एक्सटार्शन वाला. दूसरा गैंगरेप विक्टिम के दोस्ता इंटरव्यू जी न्यूज पर चलाने पर और तीसरा कोलगैट स्कैंडल प्रकरण में जिदंल को लेकर चलाई जा रही खबर में फर्जी दस्तावेज दिखाने के आरोप पर. मजेदार यह है कि दिल्ली पुलिस ने जिन दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए सुधीर चौधरी के खिलाफ शिकायत दर्ज की है, उन दस्तावेजों को सही मानते हुए सीबीआई ने नवीन जिंदल के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

नवीन जिंदल की शिकायत के बाद पुलिस और सिस्टम इतना सक्रिय हुआ कि सुधीर चौधरी पर देखते ही देखते तीन मुकदमें लाद दिए गए. पहला एक्सटार्शन वाला. दूसरा गैंगरेप विक्टिम के दोस्ता इंटरव्यू जी न्यूज पर चलाने पर और तीसरा कोलगैट स्कैंडल प्रकरण में जिदंल को लेकर चलाई जा रही खबर में फर्जी दस्तावेज दिखाने के आरोप पर. मजेदार यह है कि दिल्ली पुलिस ने जिन दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए सुधीर चौधरी के खिलाफ शिकायत दर्ज की है, उन दस्तावेजों को सही मानते हुए सीबीआई ने नवीन जिंदल के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पिछले साल 2 सितंबर को टाइम्स आफ इंडिया ने खबर का प्रकाशन किया था और इन्हीं दस्तावेजों को तीन सितंबर को एनडीटीवी ने अपनी वेबसाइट पर लोड किया. यानि जिस आधार पर सुधीर चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, अगर वो आधार सही है तो फिर टाइम्स आफ इंडिया और एनडीटीवी के खिलाफ प्रकरण क्यों दर्ज नहीं किया गया? पर दिल्ली पुलिस को अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर सुधीर चौधरी और जी ग्रुप को डैमेज करना था, इसलिए कोई तर्क नहीं माना और सिर्फ सुधीर चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. सुधीर चौधरी के खिलाफ सिस्टम व दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए अन्याय पर किसी ने बोलना उचित नहीं समझा. ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन उर्फ बीईए के लोगों ने भी कोई बयान जारी कर दिल्ली पुलिस के रवैये की निंदा नहीं की.

ट्विटर पर रात दिन ट्वीट करते रहने वाले देश के स्वनाम धन्य संपादकों ने भी सुधीर चौधरी के खिलाफ हो रहे अन्याय पर कुछ बोलना उचित नहीं समझा. अपनी निजी राय भी ट्विटर फेसबुक पर नहीं दी. इन संपादकों के आग्रह दुराग्रह को इसलिए समझा जा सकता है कि ये लोग नवीन जिंदल के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने पर कोई ट्वीट नहीं करते, कोई स्पेशल प्रोग्राम अपने यहां नहीं चलाते.

तो समझ में आता है कि कैसे एक प्रभावशाली व्यक्ति, जो सांसद है, उद्यमी भी है, केंद्र में शासन करने वाली पार्टी का नेता है, के प्रभाव में आकर सिस्टम, मीडिया सब के सब अंधे हो जाते हैं. ज्यादा बड़ी मछली के खिलाफ कुछ नहीं बोलते, छोटे मोटे प्रकरणों पर ज्यादा हो-हल्ला मचाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते हैं. देश के नेचुरल रिसोर्सेज को लूटने वाले, टैक्स पेयर्स के पैसे को चुराने वाले नेताओं के खिलाफ मीडिया कोई अभियान नहीं चलाता. टिकर और टाप हंड्रेड जैसे स्लाट में केवल एक लाइन लिख-बोलकर खबर दिखाने-बताने के अपने कर्तव्य को निपटा लेता है. पर यह देश जानना चाहेगा कि आखिर नवीन जिदंल के साथ मीडिया का इतना प्यार क्यों?


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