नयी दिल्ली। सीबीआई ने कोयला घोटाले में यहां एक अदालत में दाखिल प्राथमिकी में कहा है कि नवीन जिंदल समूह ने कथित तौर पर तथ्यों को गलत रूप में पेश किया और झारखंड सरकार ने उसके प्रति पक्षपात बरतते हुए 2007 में कोयला ब्लॉकों के आवंटन की अपनी सिफारिशों में अन्य कंपनियों को हटा दिया।
प्राथमिकी में इस बात का खास तौर पर जिक्र किया गया है कि ऊर्जा मंत्रालय अमरकोंडा मुरगादंगल कोयला ब्लॉक जिंदल समूह की कंपनियों जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड और गगन स्पंज आयरन प्राइवेट लिमिटेड (जीएसआईपीएल) को आवंटित करने के प्रस्ताव के खिलाफ था। कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल के साथ इन कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है।
पूर्व कोयला राज्यमंत्री दसारी नारायण राव भी प्राथमिकी में एक आरोपी हैं। उन्होंने तत्कालीन कोयला सचिव को एक पत्र लिखा था और जिंदल की कंपनी के प्रति अनावश्क पक्षपात जाहिर किया था जिसने प्रस्तावित ‘एंड यूज्ड प्लांट’ की स्थापना की तैयारियों के सिलसिले में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया था। जांच में आगे इस बात का खुलासा हुआ कि झारखंड सरकार ने 20 जून 2007 के अपने पत्र के जरिए अमरकोंडा मुरगादंगल कोयला ब्लॉक तीन कंपनियों को आवंटित करने की सिफारिश की थी। इन कंपनियों के नाम हैं सेसर्स लैंको इंफ्राटेक लिमिटेड (40 प्रतिशत), मेसर्स जेएसपीएल: (30 प्रतिशत) और मेसर्स जीएसआईपीएल (30) प्रतिशत। (भाषा)






