न्यूज़ चैनल वालों ने अपनी न्यूज़ के लिए एक बार नहीं वरन सैकड़ो बार मार दिया उस लड़की को जो अभी जीवन और मौत से जूझ रही है और जिन्दा है। उसे मरा हुआ सिर्फ सहारा समय, लाइव इंडिया, एनडीटीवी जैसे न्यूज़ चैनलों ने ही नहीं दिखाया वरन देश भर के हर न्यूज़ चैनलों ने लड़की को अपनी न्यूज़ में एक बार नहीं सैकड़ों बार मारा। इटावा में जलजला आ गया था, शुक्रवार के दिन। पूरे देश की मीडिया का ध्यान उस वक्त इटावा पर आकर टिक गया जब यह पता चला कि इटावा में एक लड़की के साथ गैंगरेप करके उसको जिंदा जला दिया गया है। बताया गया कि गैंगरेप की शिकार लड़की की जलने से मौत भी हो गई है।
मामला प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जनपद से जुड़ा हुआ था इसलिए यह स्यापा भी काटा गया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जनपद में जब ऐसा जघन्य अपराध हो सकता है तो बाकी सूबे की क्या दशा होगी? लेकिन हकीकत यह है कि इटावा में गैंगरेप की यह खबर सिर्फ मीडिया की कारस्तानी थी। न गैंगरेप हुआ था। न लड़की को गैंगरेप करनेवालों ने जलाया था। फिलहाल लड़की जीवित है और उसका सैफई के ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज चल रहा है। हां, इतना जरूर है कि बुरी तरह जली हुई अवस्था में अस्पताल लाई गई लड़की की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
दस जुलाई की सुबह हुई एक वारदात की खबर मीडिया को ग्यारह जुलाई को मिल पाई जब सैफई स्थित ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान में इस लड़की के इलाज के बाद पुलिस की तहकीकात शुरू हुई। पुलिस के पास पीड़ित लड़की पक्ष से जो एफआईआर दर्ज कराई गई थी उसमें कहा गया था कि उसके साथ गैंगरेप हुआ था। पुलिस ने भी अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में गैंगरेप का ही उल्लेख किया और जांच पड़ताल शुरू की तो दूसरी ही कहानी उभरकर सामने आई। हालांकि ऐसे मामलों में सीधे गैंगरेप के आरोप पर एफआईआर लिखने से पुलिस हमेशा बचती रही है लेकिन वर्तमान माहौल में पुलिस वाले अगर लापरवाही करते तो यह लापरवाही उन्हें भारी पड़ जाती।
एफआईआर लिखने के साथ ही पीड़ित लड़की का सैफई के मेडिकल कालेज में इलाज भी शुरू हो गया था, लेकिन 12 जुलाई को मीडिया ने न सिर्फ जीते जी उस पी़ड़ित लड़की को मृत घोषित कर दिया बल्कि इस मामले को पुलिस की तहकीकात से पहले ही गैंगरेप की घटना बताकर सारी दुनिया में प्रचारित कर दिया। भले ही एफआईआर में छह लोगों का नाम दर्ज कराया गया हो लेकिन 12 जुलाई तक पुलिस इस नतीजे पर पहुंच चुकी थी कि मामला गैंगरेप से जुड़ा हुआ नहीं है। 12 जुलाई की देर रात पुलिस अधिकारियों ने सैफई मेडिकल कालेज जाकर लड़की के स्वास्थ्य का भी जायजा लिया और जांच पड़ताल के दौरान पूरे मामले में फर्जी तत्वों की पहचान भी शुरू कर दी।
12 जुलाई की पूरी कवायद के बाद पुलिस ने पाया कि यह मामला न तो गैंगरेप से जुड़ा है और न ही लड़की को जलाकर मारने की कोशिश की गई है। मामला यह है कि एक ही कुनबे के दो बच्चे आपस में प्यार करते थे। ये दोनों मुस्लिम परिवार से आते थे, और दोनों ही पक्षों को इस प्यार पर कोई ऐतराज भी नहीं था। बात इस पर अटकी हुई थी कि शादी का खर्च कौन उठायेगा। लड़का और लड़की की उम्र भी कानूनी लिहाज से अभी नाबालिग ही कही जा सकती है। लड़की के बारे में तो पता नहीं लेकिन पुलिस की गिरफ्त में आ चुका लड़का फरमान अपनी उम्र 17 साल बता रहा है। जो जानकारी मिली है उसके मुताबित शादी के खर्च को लेकर दोनों पक्षों में तकरार इतना बढ़ गया था कि लड़की ने लड़के के घर के सामने पहुंचकर खुद को आग के हवाले कर दिया। उसकी इस नादान खता ने उसको मौत के दरवाजे पर तो धकेल ही दिया, लड़के के परिवार के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी।
बहरहाल, लड़की अभी तक जीवित है और उसके स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है। ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ जेवी सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि लड़की की हालत में सुधार हो रहा है और उसने बात भी की है। लेकिन 80 फीसदी तक जल चुकी लड़की की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। लेकिन लड़की की स्थिति से ज्यादा चिंताजनक स्थिति उस मीडिया की है जो पहले ही लड़की को मार चुका है और पूरे मामले को गैंगरेप की घटना साबित कर चुका है। अगर मीडिया के कारिंदो ने एफआईआर पर भी ध्यान दिया होता तो उन्हें पता चलता कि जिन छह लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है उसमें तीन महिलाओं के भी नाम हैं। और कम से कम महिलाएं महिला का गैंगरेप नहीं कर सकती हैं। बहरहाल ताजा घटनाक्रम यह है कि आरोपी लड़के अरमान को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले में पुलिस आगे की तफ्तीश कर रही है।
प्रेमी और उसके दोस्तों के द्वारा छली गयी पीड़िता पिछले चार दिनों से मौत से संघर्ष कर रही है। 98 फीसदी तक बुरी तरह से जल चुकी पीड़िता के शरीर में क्या बचा होगा, इसका अंदाजा कोई भी लगा सकता है। भारी डोज वाली दवाओं का असर कम होने के बाद जब भी उसके शरीर मे हलचल होती है परिजन सिहर उठते हैं, उन्हें लगता है कि बेटी शायद बच जाए। पीड़िता का पिता मुन्ने खां सैफई पीजीआई के बाहर तीन दिनों से भूखा प्यासा पड़ा हुआ है। पीड़िता की साठ वर्षीय बूढ़ी दादी रमीना बेगम कम पढ़ी लिखी हैं उन्हें यह नहीं पता है कि पोती कितनी पढ़ी हैं। कहती हैं कि पोती उन्हें बहुत प्यार करती थी। टीवी वालों पर बहुत गुस्सा हैं, आंख में आंसू भरकर कहती हैं, दुआ न करो तो मत करो, मेरी बेटी को जिंदा ही क्यों मार रहे हो। युवती की चचेरी दादी, बहन व ताई हसीना, चचेरी बहन बानो, उसका पति व गांव की अन्य औरतें पिछले तीन दिनों से बर्न बार्ड के आगे लॉन में डेरा डाले हैं। वे कभी रोती हैं तो कभी अल्लाह से बेटी की सही सलामती की दुआ मांग रही हैं, उसकी मां तो बार बार बेहोश हो जाती हैं।
लेखक दिनेश शाक्य सहारा समय चैनल के इटावा जिले के रिपोर्टर हैं.






