पंकज कुमार झा : अभी 'जी न्यूज़' का स्टिंग देख रहा हूँ. सवाल किस दल का फ़ायदा या नुकसान करने वाला कौन सा स्टिंग है, इसका नहीं है. सवाल कुकुरमुत्ते की तरह उग आये स्टिंगबाजों का है. टीआरपी की लड़ाई में सारी राजनीति को गंदा किया जा रहा है. इस स्टिंग में भी कह कर ये बात बताया जा रहा है की छाप मत दीजिएगा. फिर भी इस तरह से दिखाने की प्रवृत्ति निंदनीय है.
नेताओं और पत्रकारों में एक भरोसे का रिश्ता रहा है. प्रधानमंत्री तक के भरोसेमंद कई पत्रकारों ने उनके दिवंगत होने के बाद कई ऐसी चीज़ों को सामने लाने का काम किया, किताबें लिखी जिससे इतिहास का पता चला. यह ठीक भी था. लेकिन इस तरह चीज़ों को सामने लाना बेहद खतरनाक है. फ़ायदा-नुकसान की परवाह किये बिना राजनीति को चाहिए की इस जहरीले विधा पर लगाम लगाने की जुगत भिडाये.
तेजपाल पर लडकी के साथ बलात्कार का अपराध तो अब कायम हुआ है लेकिन उसने समूची पत्रकारिता का बलात्कार करते रहने की कुप्रथा को कायम किया. इसका प्रतिरोध कीजिये भाई. कम से कम स्टिंग करने के लिए कोई अपराध/बयान प्रायोजित न हो उसके लिए कोशिश कीजिये सब मिलकर.
पत्रकार और भाजपा नेता पंकज झा के फेसबुक वॉल से.






