मीरजापुर : जी न्यूज़ के पत्रकार राजेश मिश्र को इलाहाबाद में यूपी आरटीयू के दीक्षांत समारोह में प्रदेश के राज्यपाल ने डाक्टरेट की उपाधि प्रदान की। युवा पत्रकार राजेश ने 'विंध्य आँचल में धर्म एवं पर्यटन' पर अध्ययन कर शोध पत्र लिखा। विंध्याचल निवासी डॉ० राजेश मिश्र ने शोध पत्र में लिखा है कि उत्तराखण्ड के नाम से नया प्रदेश बनने के बाद आयी प्राकृतिक सौंदर्य की कमी को विंध्य क्षेत्र पूरा कर सकता है। अरबों रुपये खर्च करके कल कारखाने लगाने के बजाय केवल पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देकर लाखों बेरोजगारों को रोजगार दिया जा सकता है। पृथ्वी के केंद्र बिंदु पर बसा विंध्य क्षेत्र देश एवं विदेश को एक दिशा दे सकता है।
विंध्याचल आदिकाल से धार्मिक, ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक सम्पदा के मामले में धनी रहा है। प्रकृति ने इस इलाके पर दिल खोलकर अपनी सम्पदा लुटाया है। हजारों मील का सफ़र करने वाली पतित पावनी गंगा विंध्य धाम में पहली बार विंध्य पर्वत का स्पर्श करती है। पर्वत पर विराजमान आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी का पांव धर्म नगरी प्रयाग के संगम से जल लाकर पखारती है। इसके बाद वह त्रिलोक में न्यारी काशी के वासी बाबा विश्वनाथ के धाम में पहुँचती हैं। जनपद का दक्षिण भाग पहाड़ो से घिरा है तो उत्तर का मैदानी भाग नदी एवं उपजाऊ मैदान में तब्दील है। दर्जनों पहाड़ी नदियों से गिरता झरने के जल से निकलने वाली संगीत लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करती है। महाराजा विक्रमादित्य ने गंगा नदी के किनारे विशाल किला बनवाया जो इस वक्त चुनार किले के नाम से विख्यात है। इसमें ईस्ट इण्डिया कम्पनी के प्रथम गवर्नर ने अपना आशियाना बनाया था। उस पर लगे शिलापट इतिहास की गवाही दे रहे हैं। इसी किले के इर्दगिर्द तिलस्मी किलों की गाथा कहने वाले उपन्यास चंद्रकांता संतति लिखा गया। इस वक्त किला पीएसी का परीक्षण केंद्र बना है। किले के अधिकांश हिस्से में आम नागरिकों का प्रवेश वर्जित है।






