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जी न्‍यूज (पांच) : ”किसी मीडिया मठाधीश को रत्‍ती भर फर्क नहीं पड़ेगा कितने अमरीश मर रहे हैं”

मीडिया में काम कर रहे खुशनसीब/बदनसीब दोस्तों, जो कदम मजबूरी, हताशा या किसी भी कारणवश जी न्‍यूज के कैमरामैन अमरीश ने उठाया, उस तरह का कदम उठाने के बारे में कभी सोचना भी मत, चाहे हालात कितने भी बदतर ही क्यों ना हो जाए. किसी मीडिया मठाधीश या विभिन्न मीडिया कल्याण संस्थाओं के पदाधिकारियों को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ेगा कि कितने अमरीश मर रहे हैं, जी रहे हैं. उनके परिवार किस हालत में हैं? फर्क पड़ेगा तो हमारे परिवारों को जिन्हें हमारी नौकरी से कहीं ज्यादा हमारी, हमारी सांसों की जरूरत है.

मीडिया में काम कर रहे खुशनसीब/बदनसीब दोस्तों, जो कदम मजबूरी, हताशा या किसी भी कारणवश जी न्‍यूज के कैमरामैन अमरीश ने उठाया, उस तरह का कदम उठाने के बारे में कभी सोचना भी मत, चाहे हालात कितने भी बदतर ही क्यों ना हो जाए. किसी मीडिया मठाधीश या विभिन्न मीडिया कल्याण संस्थाओं के पदाधिकारियों को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ेगा कि कितने अमरीश मर रहे हैं, जी रहे हैं. उनके परिवार किस हालत में हैं? फर्क पड़ेगा तो हमारे परिवारों को जिन्हें हमारी नौकरी से कहीं ज्यादा हमारी, हमारी सांसों की जरूरत है.

बड़े-बड़े संपादकों या मालिकों के हाथों के इन प्यादों को कोसने, ऐसे हालात पैदा ना होने देने के अभियान चलाने के साथ-साथ जरूरत है. व्यक्तिगत स्तर पर मानसिक तौर पर मजबूत होने की ताकि हमारे हताशा भरे कदम या हमारी मजबूरियां अथवा अपना हक पाने के लिए दबाव बनाने के लिए उठाए गए कोई भी कदम उठाएं, लेकिन आत्महत्या कतई नहीं. क्योंकि जब हम ही नहीं होंगे तो आवाज उठाने के लिए, लडऩे के लिए अमरीशों की कमी पड़ जाएगी.

हमें किसी प्रदर्शन में आने के लिए आधे दिन की छुट्टी मिले न मिले, घर-परिवार के बीच रविवार को समय निकले, न निकले. ये आग मत बुझने देना, शब्दों के सहारे, सॉशल मीडिया के सहारे लगातार फैलती रहनी चाहिए. भड़ास, मयंक सक्सेना जैसे सचेत मंचों के माध्यम के साथ लगकर किसी न किसी रूप में अपना योगदान जारी रखें. जिसके पास यथा शक्ति, साधन हो संघर्ष करें-अदालत में पी.आई.एल.करें, प्रेस परिषद में मजबूती से पक्ष रखें, नहीं तो लिख कर लगातार प्रयास जारी रखें.

धीरज टागरा

दिल्‍ली 

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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