एक खबर कल की है लखनऊ से. जैसा आपको मालूम है कि राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है और इसी सिलसिले में कल केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ल उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से मिलने उनके आवास 13 ए माल एवेन्यू लखनऊ पहुंचे. जाहिर सी बात है दादा के समर्थन के लिए मायावती को प्रस्तावक बनाया गया है, उसी की कवरेज हेतु लखनऊ के सभी बडे़ पत्रकार भी पहुंचे, अपनी सबसे बड़ी दुश्मन के घर यानी मायावती के निजी आवास.
आपको याद होगा जब वह सीएम थीं तो उनके सरकारी आवास 5- कालीदास मार्ग पर पत्रकारों का आना जाना पूरी तरह से बंद था और मीडिया तो वहां का नक्शा भी भूल चुकी थी. तो अब पूर्व मुख्यमंत्री जब अपने निजी आवास पर हैं तो किसकी मजाल वहां भटक जाए. इसी सिलसिले में मीडिया को घर के अन्दर के शाट्स को कवरेज करने की अनुमति तो दी गयी, लेकिन सभी मीडियाकर्मियों से अपने अपने जूते उतार कर ही अन्दर आने को कहा गया. फिर क्या था? कवरेज तो करनी ही थी इसलिए सभी पत्रकार बंधु अपने-अपने जूते उतार कर ही अन्दर गए, जिसमें सभी बड़े-बड़े चैनलों के दिग्गज पत्रकार शामिल थे और ज्यादातर पंडित. छुआ-छूत जैसी प्रथा के कारण ही माया को यह दर्जा मिला है जिसके लिए उन्हें दलित की बेटी कहा जाता है, लेकिन चुनाव में हारने की दुश्मनी तो निकालनी ही थी लिहाज़ा इसी तरीके से पत्रकारों की बेइज्जती ही सही. अब इसे माया को जूते का डर कहा जाए या माया की यूपी के पत्रकारों से दुश्मनी, इसे आप लोग ही तय करें.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






