दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलतराम कालेज छात्रावास में मोरल पुलिसिंग के तहत छात्रों के मोबाइल व लैपटाप के प्रयोग पर प्रतिबंध मामले पर मचा बवाल अभी शांत भी नहीं हुआ था कि इसका डंडा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) तक पहुंच गया। छात्र-छात्राओं की स्वतंत्रता के लिए विख्यात इस विश्वविद्यालय के एक महिला छात्रावास में छात्राओं के मनचाहे कपड़े पहनने, इंटरनेट कनेक्शन लगवाने, देर रात तक किसी से मिलने-जुलने आदि पर पाबंदी लगा दी गई है।
छात्राओं ने छात्रावास प्रशासन के इस तालिबानी रवैये के खिलाफ नाराजगी जताते हुए विवि प्रशासन से इसकी शिकायत की है। छात्राओं ने उनके साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी है। जेएनयू के नवनिर्मित क्षिप्रा छात्रावास में रहने वाली छात्राओं ने अपने वार्डन पर तालिबानी फरमान जारी करने और अपनी निजता में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। छात्राओं के मुताबिक वार्डन द्वारा उनपर तमाम ऐसी बंदिशें लगाई गई हैं जो उनकी स्वतंत्रता के खिलाफ हैं। छात्राओं के मुताबिक छात्रावास में उन्हें मनचाहे कपड़े पहनने की छूट नहीं है।
इसके अतिरिक्त उन्हें इंटरनेट कनेक्शन लेने की भी इजाजत नहीं है। एमफिल की छात्रा अंजनी (परिवर्तित) के मुताबिक जांच के नाम पर कभी भी कमरे की तलाशी शुरू कर दी जाती है और अलमारियों तक को खुलवाकर देखा जाता है। हमें कमरे के बाहर जूते रखने और बालकनी में कपड़े तक फैलाने की अनुमति नहीं है। ऐसा करने पर हम से जुर्माना वसूला जाता है। इससे नाराज छात्र-छात्राओं ने पिछले दिनों एक सभा का आयोजन कर इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित किया और छात्र कल्याण विभाग से इसकी शिकायत की। छात्र कल्याण विभाग के डीन प्रो. सच्चिदानंद सिन्हा का कहना है कि क्षिप्रा छात्रावास की छात्राओं से उन्हें ऐसी शिकायत मिली है।
दैनिक जागरण में प्रकाशित अविनाश चंद्र की रिपोर्ट





