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जेल को भी जानेमन बना लेने का यह हुनर कोई आपसे सीखे

प्रिय यशवंत भाई, पिछले दिनों जानेमन जेल मेरे पास पहुंची और इसे पढ़ रहा हूं. ''स्थितियां बुरी नहीं होती उसे हम अच्छा बुरा महसूस करते हैं''… पेज नंबर 23… और पेज नंबर 25 पर ये लाइन… "सोचता हूं जेल सरीखा जीवन फिर से बाहर की इस दुनिया में स्टार्ट कर दूं. क्या मुक्ति इसी में है"… वाकई दिल को छू गई. जेल की दुनिया की कहानी भी और दर्शन भी. वाकई शब्दों को पिरोना कोई आपसे सीखे. वैसे आपकी रचनात्मकता का मैं हमेशा से कायल रहा हूं.

प्रिय यशवंत भाई, पिछले दिनों जानेमन जेल मेरे पास पहुंची और इसे पढ़ रहा हूं. ''स्थितियां बुरी नहीं होती उसे हम अच्छा बुरा महसूस करते हैं''… पेज नंबर 23… और पेज नंबर 25 पर ये लाइन… "सोचता हूं जेल सरीखा जीवन फिर से बाहर की इस दुनिया में स्टार्ट कर दूं. क्या मुक्ति इसी में है"… वाकई दिल को छू गई. जेल की दुनिया की कहानी भी और दर्शन भी. वाकई शब्दों को पिरोना कोई आपसे सीखे. वैसे आपकी रचनात्मकता का मैं हमेशा से कायल रहा हूं.

आपमें नकारात्मक उर्जा को भी सकारात्मक करने की जो सोच है वो अनोखी है. मुझे पूरी तरह मालूम नहीं फिर भी अंदाजा तो लगा ही सकता हूं कि नौकरी छोड़, नौकरी की जगह भड़ास की जिद और उस जिद को पूरा कर दिखाने की जिद के पीछे कितनी मुश्किलें आई होंगी. जेल यात्रा से पहले भी और बाद भी भड़ास के खबरों की पंचलाइन इतनी जबदस्त होती है कि पूछिए मत. आपने जेल को भी जानेमन बना इतने सकारात्मक ढंग से एक किताब ही लिख डाली. यह हुनर कोई आपसे सीखे.

किताब पढ़ने के बाद सोचा आपको फोन करूं, फिर सेाचा पत्र ही लिख डालता हूं. भड़ास के संचालन में खर्च की चिंता मुझे भी सालती है और ईश्वर की कृपा से जल्द ही भड़ास की मदद करने की स्थिति में आ जाउंगा. वैसे भी लाखों लोगों की दुआयें इसके साथ हैं और इसके रहते आपको भड़ास आश्रम खोलने की जरूरत नहीं पडेगी. भड़ास बंद नहीं होगा चलता रहेगा. अनवरत….

मेरे कई मित्र कहते है कि यशवंत बुरा आदमी है. लोगों को पैसे के लिए ब्लैकमेल करता है. मैं कहता हूं वो ब्लैकमेल करके भी अपना फर्ज तो निभा रहा है. कम से कम पत्रकारिता तो कर रहा है और तुम पूजीपतियों के पास अपनी कलम गिरवी रख क्या कर रहे हो. जब भी कुछ करो कहने वाले हजारों मिल जाते हैं, साथ देने वाले बस एक दो.

जानेमन जेल के लिए शुक्रिया, और साथ ही आप सब को दीपावली की मीठी कामनाएं. हां एक बात कि हमारी कंपनी जो लाइफस्टाइल टीवी का संचालन करती है उसका नाम वाह जिंदगी मीडिया नेटवर्क प्रा. लिमिटेड है. कुछ लोगों ने इसी के मिलते जुलते नाम से एक संस्था बना ली है और भ्रम पैदा कर रहे हैं. मेरा उस संस्था और उन लोगों से कोई लेना देना नहीं है. मेरे द्वारा भेजी गई रिलीज हमेशा मेरी ही ईमेल आईडी से जाती रही है. अतः वाह जिंदगी मीडिया नेटवर्क से मिलते जुलते नाम से भेजी गई किसी भी खबर को एक बार जरूर जांच लें.

सधन्यवाद
विवेक चन्द्र
लाइफस्टाइल टीवी पटना


संबंधित अन्य आलेख, विश्लेषण, समीक्षा, संस्मरण, रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: जानेमन जेल


'जानेमन जेल' किताब घर बैठे मंगाने के लिए आप किताब का नाम, अपना नाम, पूरा पता पिन कोड सहित और अपना मोबाइल नंबर लिखकर 09873734046 पर SMS कर दें. किताब कुछ ही दिनों में आपके हाथ में होगी. मूल्य सौ रुपये से कम है और छूट के साथ उपलब्ध है.


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Yashwant Singh Jail

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