फेसबुक पर Swarnim Prabhat ने एक तस्वीर चस्पा की है. वो तस्वीर यहां नीचे भी है. इसमें जोहरा सहगल अपने सौवें जन्मदिन पर केक काटते दिखाई दे रही हैं. पर उनकी मुख मुद्रा व हाथ मुद्रा कुछ ऐसी है कि बरबस आप मुस्कराये बिना नहीं रह सकते, जैसे वे केक नहीं, आदमी काटने वाली हों… हिंदी फिल्मों की इस महान अदाकारा की इस जिंदादिली को सलाम.
आज के दौर में जब तीस चालीस की उम्र तक जाते जाते हमारे नौजवान थकने से लगते हैं, मुस्कान गायब हो जाती है, हार्ट अटैक से लेकर तमाम तरह की बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं, और कई तो शहीद होकर उपर तक चले जाते हैं, वैसे में जोहरा सहगल का सौ की उम्र में भी ये तेवर बहुत कुछ सिखाता है. जिंदगी जिंदादिली का दूसरा नाम है. थक गए, उदास हो गए तो समझे मर गए. उदासी, तनाव, अवसाद… ये सब ढेर सारी बीमारियों को न्योता देता है. शायद यही वजह है कि जोहरा सहगल ने खुद को अभी तक तरोताजा बनाए रखने के लिए जिंदादिली का रास्ता अपनाया और वे इस रास्ते पर चलते हुए अमर हैं…






