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जोहांसबर्ग में हिंदी के उन्नीस भारतीय विद्वान सम्मानित

: इनमें प्रभात खबर के संपादक हरिवंश और वरिष्ठ पत्रकार मधुकर उपाध्याय भी : दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में हुए विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी भाषा को देश दुनिया में प्रोत्साहित और संवर्धित करने के लिए भारत के 19 विद्वानों को सम्मानित किया गया. इनमें प्रभात खबर के संपादक हरिवंश और वरिष्ठ पत्रकार मधुकर उपाध्याय के नाम भी शामिल हैं.

: इनमें प्रभात खबर के संपादक हरिवंश और वरिष्ठ पत्रकार मधुकर उपाध्याय भी : दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में हुए विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी भाषा को देश दुनिया में प्रोत्साहित और संवर्धित करने के लिए भारत के 19 विद्वानों को सम्मानित किया गया. इनमें प्रभात खबर के संपादक हरिवंश और वरिष्ठ पत्रकार मधुकर उपाध्याय के नाम भी शामिल हैं.

सम्मान पाने वाले अन्य भारतीय विद्वानों में हिमांशु जोशी, राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, कैलाश चंद्र पंत, एम पियोंग तेजमन जमीर, प्रोफेसर सी ई जीनी, डा रामगोपाल शर्मा दिनेश, प्रोफेसर जाबिर हुसैन, प्रोफेसर मधुसूदन त्रिपाठी, ज्ञान चतुर्वेदी, प्रोफेसर बीवाई ललिताम्बा, उषा गांगुली, डा के वंजा, डा गिरिजा शंकर त्रिवेदी, जियालाल आर्य और प्रोफेसर वाई लक्ष्मीप्रसाद शामिल हैं.

दुनिया के विभिन्न देशों में हिंदी भाषा की अलख जगाने वाले 22 विदेशी हिंदी विद्वानों को भी उनके योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया. इनमें आस्ट्रेलिया के डॉ पीटर गेराल्ड फ्रेडलान्डर, रुस के प्रोफेसर सेर्गेई सेरेबिरयानी, चेक गणराज्य के डॉ डगमार मार्कोवा, इटली के मार्को जोली, चीन के प्रोफेसर ल्यू अन्वूक, मारीशस की डा बूधू, थाइलैंड के बमरुंग खाम एक, श्रीलंका के प्रोफेसर उपुल रंजीत हेवाताना गामेज , बुल्गारिया की वान्या जार्जिवा गंचेवा, अफगानिस्तान के जबुल्लाह ‘फीकरी’, उक्रेन की कैटरीना बालेरीवा दोवबन्या, ब्रिटेन के डॉ कृष्ण कुमार, जर्मनी के इंदुप्रकाश पांडेय, जर्मनी की ही डॉ बारबरा लार्डत्स , मारीशस के सत्यदेव टेंगर, जापान के प्रोफेसर टिकेदी इशिदा और डॉ तोरमाचो किकुची , ब्रिटेन के विजय राणा, सूरीनाम के भोलानाथ नारायण, दक्षिण अफ्रीका के रामभजन सीताराम तथा अमेरिका के वेदप्रकाश बदुक शामिल हैं.

विश्व हिंदी सम्मेलन में लोकतंत्र और मीडिया की भाषा के रुप में हिंदी विषय पर आयोजित सत्र में विभिन्न विद्वानों ने कहा कि अन्य भाषाओं के प्रति शत्रुता के भाव को त्यागने से ही हिंदी का भला होगा. इस विषय पर बोलते हुए नया ज्ञानोदय के संपादक रविन्द्र कालिया ने कहा कि हिंदी के नाम पर टसुए बहाने और गौरवान्वित होने का आज माहौल बना हुआ है. उन्होंने कहा कि भारत में आजादी के बाद हिंदी के जो शब्द बने, वे हमारी भाषा के लिए और भी खतरनाक साबित हुए. पहले पारिभाषिक शब्द और बाद में आकाशवाणी की हिंदी ने हिंदी की दुर्दशा में खतरनाक भूमिका निभायी. उन्होंने कहा कि हिंदी को पानी की तरह बहने देना चाहिए और इसके साथ ही जरुरी है कि अन्य भाषाओं के प्रति शत्रुता का भाव नहीं रखा जाए. हम बोलियों को मजबूत करेंगे तो हिंदी और मजबूत होगी.

हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर ने अपनी अध्यक्षीय टिप्पणी की शुरुआत मशहूर शायर कैफी आजमी की नज्म की इन पंक्तियों से की 'आज की रात गर्म हवा चलती है, आज की रात फुटपाथ पर नींद नहीं आएगी, तुम उठो, तुम सब उठो, कोई खिडकी इस दीवार में उठ जाएगी.' उन्होंने आशाभरे शब्दों में कहा कि वह गिलास को आधा भरा देखते हैं, खाली नहीं. उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें भविष्यवाणी की गयी है कि 2043 में संसार का आखिरी अखबार छपेगा.
 

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