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जो सिंहासन पर बैठेगा वो काली लंगोटी जरूर पहनेगा

काले धन के बारे में जो ताज़ा आंकड़े ‘ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी’ नामक संस्था ने जाहिर किए हैं, यदि वे प्रामाणिक हैं तो हमारी सरकार के लिए इससे बढ़कर शर्म की बात क्या हो सकती है। उसके अनुसार 2011 में लगभग 5 लाख करोड़ रुपए का काला धन स्विस बैंकों में भारतीय लोगों ने जमा किया है। 2010 के मुकाबले यह राशि सवाई हो गई है जबकि भारत का सालाना बजट सिर्फ 13 लाख करोड़ का होता है। 
काले धन के बारे में जो ताज़ा आंकड़े ‘ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी’ नामक संस्था ने जाहिर किए हैं, यदि वे प्रामाणिक हैं तो हमारी सरकार के लिए इससे बढ़कर शर्म की बात क्या हो सकती है। उसके अनुसार 2011 में लगभग 5 लाख करोड़ रुपए का काला धन स्विस बैंकों में भारतीय लोगों ने जमा किया है। 2010 के मुकाबले यह राशि सवाई हो गई है जबकि भारत का सालाना बजट सिर्फ 13 लाख करोड़ का होता है। 
 
काले धन की खोज करनेवाली कुछ संस्थाओं का मानना है कि स्विस बैंकों में यदि किसी देश का काला धन सबसे ज्यादा जमा है तो वह भारत का है। दुनिया के सबसे मालदार देशों को भी भारत ने मात कर दिया है। अमेरिका, चीन और रुस का कुल मिलाकर जितना काला धन जमा है, उससे ज्यादा काला धन अकेले भारत का जमा है। यह सब अनर्थ हो रहा है, एक अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री की देख-रेख में। इसे मैं उनकी देख-रेख क्यों कहता हूं? क्योंकि वे बस देखते रहते हैं। करते-धरते कुछ नहीं। कोई चौकीदार अपनी आंख के सामने चोरी होने दे, उसके साथ आप क्या सलूक करेंगे? या तो आप उसे निकम्मा समझकर निकाल बाहर करेंगे या उसे चोरों का सरदार मानकर जेल भिजवाएंगे।
 
देश का दुर्भाग्य है कि न तो कोई नेता हमारे पास ऐसा है और न ही कोई राजनीतिक दल, जो इस ‘चैकीदारी’ को तत्काल खत्म करे। शायद इसका कारण ये है कि वे लोग भी सीधे हाथ साफ कर रहे हों।
 
यदि 2014 के बाद ये लोग भी सत्ता में आ गए तो क्या ये लोग आजकल के चौकीदार की ही तरह ‘चौकीदारी’ नहीं करेंगे? वर्तमान चैकीदार कम से कम खुद तो साफ-सुथरा है लेकिन भावी चौकीदार तो हाथ की सफाई के ऊंचे कलाकार हैं। भारत की गरीब जनता की जेब से उड़ाए गए ये अरबों-खरबों रूपये यदि वापस आ जाएं तो हिंदुस्तान की जनता को वर्षों तक कर चुकाने की जरुरत ही नहीं होगी। आयकर और बिक्री-कर भी खत्म किया जा सकता है।
 
बाबा रामदेव ने काले धन की वापसी के बारे में जबर्दस्त अभियान चलाया था लेकिन सरकार ने उनके खिलाफ काली कार्रवाई करके अपना मुंह काला कर लिया था। बाबा रामदेव के पास भक्तों की जबर्दस्त फौज है। वे हवाई आंदोलनकारी नहीं हैं। वे चाहें तो अगले छह माह में ऐसा दबाव बना सकते हैं कि यह भागता भूत अपनी काली लंगोटी देश के हवाले करता चला जाए। कोई राजनीतिक दल या नेता स्वेच्छा से काला धन वापस नहीं लाएगा, क्योंकि वह उसका सबसे अंतरंग वस्त्र है। लंगोटी है। दुर्योधन की लंगोटी! इस लंगोटी पर भीम गदा-प्रहार करे, यह दुर्योधन को कैसे बर्दाश्त होगा?
 
जो भी इंद्रप्रस्थ के सिंहासन पर बैठेगा, वह काले धन की यह काली लंगोटी जरुर धारण करेगा। रामदेव जैसे धनुर्धर को इसी लंगोटी को मछली की आंख मानकर अपना निशाना बनाना होगा। यदि तीर ठीक निशाने पर बैठ गया तो भारत की गरीबी एक झटके में दूर हो जाएगी।
 
लेखक डॉ. वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार हैं.
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