झारखंड के अखबार सूचना नहीं संपर्क की परिभाषा गढ़ने लगे हैं। अगर किसी संपर्क से बेहतर परिणाम निकल सकते हैं तो उससे संबंधित सूचनाएं छुपाने में भी उन्हें कोई गुरेज नहीं। शायद सच को पाठक व जनता से छुपाना पत्रकारिता का वसूल नहीं हो लेकिन इसी व्यवस्था का हिस्सा कम से कम झारखंड के अखबार तो बनते नजर आ रहे हैं। इसका ज्वलंत उदाहरण एक फरवरी को जमशेदपुर छात्र संघ द्वारा रांची में राजभवन पर वीमेंस कॉलेज की प्राचार्या शुक्ला मोहंती के खिलाफ दिये गये एक दिवसीय धरने में दिखायी पड़ा।
किसी भी बड़े अखबार ने प्राचार्या के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की खबर नहीं छापी। जिन अखबारों ने छोटी ही सही खबर का प्रकाशन किया भी वह भी सही तथ्य व सही सूचना को जनता के सामने नहीं रखा। बल्कि सूचना में यह प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया कि धरना प्राचार्या के खिलाफ न होकर कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ दिया गया है। जमशेदपुर महिला कॉलेज की प्राचार्या शुक्ला मोहंती पर उसी कॉलेज की छात्रा व छात्र संघ अध्यक्ष अर्चना सिंह ने कई गंभीर आरोप लगाये हैं। राजभवन पर धरना के दौरान उन्होंने डॉ. शुक्ला मोहंती पर आरोप लगाया कि बतौर अध्यक्ष जब भी उन्होंने छात्राओं के पक्ष में कोई बात रखनी चाही तो उन्हें परेशान किया गया। प्राचार्या ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर अंतिम समय में एक साल के प्रशिक्षण के बाद उन्हें कालेज एनसीसी से निकलवा दिया। प्राचार्या की प्रताड़ित से तंग आकर उन्होंने कानून का सहारा लिया। तब प्राचार्या ने उन्हें बीए पार्ट-2 की परीक्षा में बैठने से वंचित कर दिया। बाद में उच्च न्यायालय के निर्देश पर उन्हें परीक्षा देने दिया गया। लेकिन इस बीच प्राचार्या के जिद के कारण उनके दो साल बर्बाद हो गये।

उन्होंने पूरे मामलों की शिकायत राजभवन, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री समेत अन्य अधिकारियों के समझ की। हर बार जांच का आश्वासन मिला लेकिन कोई भी जांच पूरी नहीं की गयी न ही उन्हें कुछ बताया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राचार्या शुक्ला मोहंती ने अपनी पहुंच का फायदा उठाकर जांच को होने ही नहीं दिया। इसके बाद मजबूर होकर उन्हें न्याय के लिए राजभवन के दरवाजे पर धरना देना पड़ा। लेकिन दिलचस्प रूप से राजभवन पर धरने की खबर न ही रांची न ही जमशेदपुर के अखबारों ने छापी। जिन अखबारों ने खबर का प्रकाशन किया भी वह भी सही तथ्य छुपा लिया। इस संदर्भ में अर्चना ने राज्यपाल को शिकायती पत्र भी लिखा है, जिसे नीचे दिया जा रहा है।
सेवा में
महामहिम राज्यपाल,
रांची, झारखंड
विषय – कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रो वीसी के लिए श्रीमती शुक्ला मोहंती का नाम नामांकित लिस्ट में लाये जाने पर सख्त आपत्ति के संबंध में
संदर्भ – 1 – जमशेदपुर महिला महाविद्यालय की प्राचार्या श्रीमती शुक्ला मोहंती द्वारा छात्राओ को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के संबंध में,
2 – मुझे जबरन कालेज एनसीसी से निकालने, परीक्षा में नहीं बैठने देने, शारीरिक व मानसिक रूप से लगातार प्रताड़ित करने के संबंध में
महामहिम,
उपरोक्त विषय संदर्भ के आलोक को सामने रखकर में वर्तमान में कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रो वीसी के लिए श्रीमती शुक्ला मोहंती का नाम नामांकित लिस्ट में लाये जाने के संबंध में अपनी सख्त आपत्ति दर्ज कराना चाहती हूं। श्रीमती शुक्ला मोहंती का कार्यकाल जमशेदपुर महिला महाविद्यालय सहित पदस्थापना के अन्य स्थानों पर विकास और सकारात्मक कार्यों में कम और छात्राओं को मानसिक व शारीरिक रुप से प्रताड़ित किये जाने के रूप में अधिक रहा है। जिससे इनकी छवि एक कुशल प्राचार्य प्रशासक के रूप में कम वरन मनमानी, जिददी, निरंकुश प्राचार्य के रुप में अधिक चर्चित रही है। इसके लिए मैं अपने साथ घटित कुछ बिंदुओं को प्रकाश में लाना चाहूंगी। जो मामला महामहिम के न्याय के लिए विचारणीय है।
इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जाये
1 – मैंने जमशेदपुर महिला महाविद्यालय में पढाई के दौरान ही छात्र संघ के अध्यक्ष का दायत्वि संभाला था।
2 – बतौर अध्यक्ष छात्राओं की समस्याओं को मैंने प्राचार्या के संमक्ष उठाया, जिसे उन्होंने कभी साकारात्मक रूप से नहीं लिया।
3 – अचानक अंतिम समय में एक साल के प्रशिक्षण के बाद मुझे कालेज एनसीसी से निकाले जाने की सूचना दी गयी जो नियमों के विपरीत था।
4 – प्राचार्या ने कई बार सार्वजनिक रुप से मुझे प्रताड़ित किया, इसके लिए मुझे मजबूरन कानून का सहारा लेना पडा। स्थानीय न्यायालय में यह मामला विचाराधीन है जिसमें पुलिस ने भी अपने अनुसंधान में प्राचार्या को कुछ बिंदुओं पर दोषी पाया है।
5 – प्राचार्या द्वारा मुझे 2010 में बीए पार्ट-2 की परीक्षा में बैठने से अकारण ही रोक दिया गया। इसके लिए मुझे उच्च न्यायालय का सहारा लेना पडा।
6 – न्यायालय के निर्देश पर मुझे परीक्षा देने का मौका मिला, इसमें मेरे दो साल बर्बाद हो गये।
7 – प्राचार्या द्वारा अन्य छात्राओं का भी परीक्षा में बैठने नहीं देने की चेतावनी देकर मेरा साथ नहीं देने को मजबूर किया गया।
8 – मेरे द्वारा उपकुलपति, कुलपति, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री, महामहिम को इस बावत जानकारी दी गयी, जिसकी जांच चल रही है।
9 – जांच के क्रम में प्राचार्या द्वारा बचाव में उपलब्ध कराये गये सिंडिकेट की बैठक के कागजात के तथ्यों के साथ छेडछाड कर प्रस्तुत किये गये।
10 – इस दस्तावेज की एक्सपर्ट द्वारा जांच करायी जाये तो प्राचार्या के कुत्सीत मानसिकता व क्रियाकलापों को खुलासा हो जायेगा।
11 – प्राचार्या शुक्ला मोहंती विधि के सिस्टम में विश्वास नहीं रखती बल्कि अपने हिसाब से सिस्टम चलाती है, मेरे तमाम आरोप इस तथ्य की पुष्टि करते है। जो निष्पक्ष जांच में साबित हो जायेंगे।
12 – प्राचार्या शुक्ला मोहंती के खिलाफ जमशेदपुर कोर्ट और माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, उन पर लगाये गये सभी आरोप छात्र-छात्राओं और शिक्षण गतिविधियों के लिहाज से काफी गंभीर है।
13 – प्राचार्या शुक्ला मोहंती अपने विभिन्न प्रभावों का इस्तेमाल कर हमेशा सही जांच रिपोर्ट को प्रभावित करने का प्रयास करती रही है इसलिए आग्रह है कि तमाम आरोपों की जांच उन्हें पद से हटाकर की जाये।
उपरोक्त घटनाओं व तथ्यों को ध्यान में रखकर आपसे निवेदन है कि मामलों की गहराई व निष्पक्षता से जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये। ताकि निजी हित व खुन्नस में किसी छात्र-छात्रा का भविष्य नहीं बर्बाद किया जा सके। श्रीमती शुक्ला मोहंती का नाम प्रो वीसी की नामांकित सूची से हटाकर उनके खिलाफ आरोपों की जांच पूरी की जाये। ताकि कोल्हान विश्वविद्यालय में बेहतर शैक्षणिक माहौल बरकरार रहे।
आपकी विश्वासी
अर्चना सिंह
अध्यक्ष
छात्र संघ
जमशेदपुर





