सर्वोच्च न्यायालय ने 100 करोड़ रूपए की मानहानि के एक मामले में बम्बई उच्च न्यायालय के उस फैसले में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया,जिसमें 'टाइम्स नाऊ ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग कम्पनी' को 20 करोड़ रूपए उच्च न्यायालय में रजिस्ट्रार के पास और 80 करोड़ रूपए बैंक गारंटी के तौर पर जमा कराने के निर्देश दिए गए थे। उच्च न्यायालय ने यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति पी. बी. सावंत की मानहानि से सम्बंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया था।
इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिस पर सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी.एस.सिंघवी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा, "हम उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने के लिए तैयार नहीं है।" 'टाइम्स ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग' को क्षतिपूर्ति की यह राशि 'टाइम्स नाऊ' चैनल पर गाजियाबाद जिला अदालत भविष्य निधि घोटाले में न्यायमूर्ति सावंत का नाम गलत तरीके से लिए जाने के कारण उन्हें अदा करने के लिए कहा गया है।
ज्ञात हो कि सितंबर 2008 में प्रॉविडेंट फंड घोटाले की खबर का प्रसारण करते हुए टाइम्स नाउ चैनल ने 15 सेकंड तक गलती से प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष रहे जस्टिस पीबी सावंत का फोटो दिखाया। रिपोर्ट में यह बताया गया कि घोटाले में कई जज भी शामिल हैं। जस्टिस सावंत ने इस पर चैनल को लीगल नोटिस भेजा। चैनल ने पांच दिन तक माफीनामा दिखाया। लेकिन सावंत इससे संतुष्ट नहीं हुए। वे मामले को कोर्ट ले गए।
पुणे डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने चैनल को दोषी मानते हुए उसे मानहानि पर सौ करोड़ रु.अदा करने को कहा। चैनल ने इस आदेश के खिलाफ बांबे हाईकोर्ट में अपील की,लेकिन वहां भी उसे 20 करोड़ रु.अदा करने और बाकी रकम की बैंक गारंटी देने को कहा गया। अब एनबीए और बीईए मिलकर इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दे रहे हैं कि इससे चैनल की समाचार देने की प्रक्रिया ही पंगु हो जाएगी। साभार : दैनिक भास्कर






