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टाटा इस्पात कारखाने में गैस रिसने की खबर कॉरपोरेट मीडिया ने रोक दी?

Sanjaya Kumar Singh : जमशेदपुर स्थित टाटा के इस्पात कारखाने में गैस रिसने की खबर मुख्य मीडिया (मुख्य रूप से टेलीविजन। अखबार तो सुबह आएंगे) पर नहीं दिखने से सोशल मीडिया में यह आशंका जताई जा रही है कि कॉरपोरेट मीडिया ने खबर रोक दी। पता नहीं सच्चाई क्या है। पर मैं यह जानता हूं कि जमशेदपुर छोटा शहर है, रांची से कोई सवा सौ किलोमीटर और कोलकाता से 250 किलोमीटर दूर।

Sanjaya Kumar Singh : जमशेदपुर स्थित टाटा के इस्पात कारखाने में गैस रिसने की खबर मुख्य मीडिया (मुख्य रूप से टेलीविजन। अखबार तो सुबह आएंगे) पर नहीं दिखने से सोशल मीडिया में यह आशंका जताई जा रही है कि कॉरपोरेट मीडिया ने खबर रोक दी। पता नहीं सच्चाई क्या है। पर मैं यह जानता हूं कि जमशेदपुर छोटा शहर है, रांची से कोई सवा सौ किलोमीटर और कोलकाता से 250 किलोमीटर दूर।

रांची से सड़क मार्ग से चार घंटे में और कोलकाता से ट्रेन से इतने ही समय में पहुंचा जा सकता है। कोलकाता से ट्रेन गिनती की है और सड़क मार्ग से ज्यादा समय लगेगा। इस महत्त्वपूर्ण खबर को स्थानीय स्ट्रिंगर्स ने अगर चैनलों को मुफ्त में नहीं भेजा तो क्या इसे कॉरपोरेट घरानों का सेंसर कहना ज्यादती नहीं है? बगैर सुविधाओं के स्ट्रिंगर के भरोसे रहने वाले मेन मीडिया की पोल ऐसे ही मौकों पर खुलेगी उसे कॉरपोरेट सेंसर कहकर बेईमान मीडिया को नहीं बचाया जाना चाहिए। वेज बोर्ड नहीं लागू करने वाले मीडिया संस्थान स्ट्रिंगर को कब पूछेंगे।

Masaud Akhtar प्लांट से टाटा मेमोरियल अस्पताल की दूरी तीन किलोमीटर है और इस बीच में दो और अस्पताल भी हैं लेकिन सभी घायलों को टाटा के ही अस्पताल में ले जाया गया, जबकि उन्हें ले जाने में ४५ मिनट का समय भी लगा. फिर एक बार जिया टीवी पर इसका न्यूज़ आ चुका था और बाद में हटा लिया गया..

Harpal Singh Thapar Sanjay ji bahut had tak sambhaavna hai censorship hui ho. JSR me rahnewaale to sab dekh hi rahe hain par media we sab choot gaya

Roy Tapan Bharati कॉरपोरेट के घरानों मीडिया कैसे बिक चुका है संजयजी ने इसका ताजा उदाहरण दिया है। अधिकतर नामी-गिरामी टीवी चैनलों में बड़े उदयमियों का शेयर जो है।

Sanjaya Kumar Singh किसी लोकल अखबार की खबर पेस्ट कर सकें तो सबों को डीटेल मिल जाएगा। टीवी या किसी साइट पर खबर आने के बाद हटा लिए जाने का मतलब है खबर गलत थी, देने वाले के पास सबूत नहीं था आदि। ऊपर मसूद अख्तर कह रहे हैं तीन सरकारी अस्पताल और जमशेदपुर में सरकारी असप्ताल — मैं जानता हूं। इसलिए आप ही कुछ बता सकते हैं।

Roy Tapan Bharati Source – Prabhat Khabar, Jamshedpur……………………….टाटा स्टील में फटी गैस टंकी, कई घायल

सीएम ने मामले में मांगी रिपोर्ट
सायरस मिस्त्री ने ली घटना की जानकारी
एमडी नरेंद्रन मुंबई से लौटे घायलों से मिले

कंपनी ने जारी किया बयान, कहा

चार कर्मचारियों की स्थिति गंभीरत्नदर्जनों कर्मचारी आये गैस की चपेट मेंत्नजांच टीम गठित

गैस होल्डर (टंकी) फटने का जुगसलाई बर्मामाइंस, साकची व बिष्टुपुर में दिखा असर

मच गयी भगदड., कंपनी परिसर खाली कराया गया

अगर आग नहीं लगी होती, तो गैस से शहर के लोगों को भी हो सकता था नुकसान

टाटा स्टील के कई विभागों में उत्पादन ठप, करोड.ों का नुकसान

चीफ फैक्ट्री इंस्पेक्टर ने की जांच, घटना को माना गंभीर

टाटा स्टील में गाड.ियों की इंट्री शुक्रवार सुबह तक बंदसीएम ने मामले में मांगी रिपोर्ट

सायरस मिस्त्री ने ली घटना की जानकारी

एमडी नरेंद्रन मुंबई से लौटे घायलों से मिले11 घायल, एक गंभीर

टाटा स्टील कॉरपोरेट अफेयर्स एंड कम्युनिकेशन के हेड प्रप्रभात शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी है कि दोपहर साढे. तीन बजे टाटा स्टील के भीतर एक गैस होल्डर में हुए विस्फोट से कुल 11 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से एक की हालत गंभीर है. घायलों का इलाज टीएमएच में चल रहा है. टाटा स्टील ने बताया कि विस्फोट से आग लग गयी और गैस लीकेज हुआ, जिसके बाद सभी मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया. अब प्लांट से गैस लीकेज का कोई खतरा नहीं है.वरीय संवाददाता, जमशेदपुर

टाटा स्टील प्लांट में गुरुवार को एलडी गैस होल्डर (गैस से भरी टंकी) फट जाने से 20 से अधिक मजदूर घायल हो गये. घायलों में चार की हालत गंभीर है, जिनका इलाज टीएमएच में चल रहा है. 17 से ज्यादा लोगों का सामान्य इलाज चल रहा है. ब्लास्ट के बाद उडे. लोहे के टुकड.ों की चपेट में आये लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. गंभीर रूप से घायलों में इक्वीपमेंट मेंटेनेंस के कर्मचारी भोला सिकदर की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बतायी जा रही है. इनके अलावा फ्यूल मैनेजमेंट के कर्मचारी सीताराम, भावनाथ झा और प्रेमजीत कुमार को भी गंभीर चोट लगी है. घटना गुरुवार अपराह्न् 3.30 बजे हुई.

ये हैं घायल

राजेश नायक, नारायण पाटिल, दिनेश चौहान, परमजीत चौहान, भोला सिकदर, ज्वाला प्रसाद, प्रेमजीत, श्यामलाल मुर्मू, सीताराम, सरोज कुमार, भावनाथ झा

ये हैं गंभीर

फ्यूल मैनेजमेंट के कर्मी सीताराम, भावनाथ झा और प्रेमजीत कुमारक्या है गैस होल्डर

Sanjaya Kumar Singh ये हुई ना बात। घायलों से पूरी सहानुभूति के बाद भी ऐसी खबर तो नहीं ही है कि रांची या कोलकाता से ओबी वैन, रिपोर्टर भेजे जाते। मीडिया के बिके होने के बाद भी जो खबर थी जैसी थी वैसा ट्रीटमेंट मिला है। हमेशा मीडिया पर खबरें छिपाने दबाने का आरोप लगता है जो सही नहीं भी होता है। मैं डेस्क पर होता तो वहां के स्ट्रिंगर से विशेष खबर मंगाकर लगा देता वह वह वहीं के एडिशन में जाता। और अगर मैं दिल्ली के एडिशन में होता, मेरे पास खबर ही नहीं होती तो मैं कुछ नहीं कर सकता था। जो अखबारों की कार्य शैली जानते हैं – सहमत होंगे।

Sushila Ganesh ham yahan local me rahkar sirf relatives se sune hain.. local news me bhi halki fulki..

Harpal Singh Thapar Main aapse sahmat hun Sanjaya Ji. Company ne ghayalon k sath bur a nahi kiya. Lekin aesi laparwahi hui kyun WO b tab jab 2008 me aesi durghatna inke yahan ho chili hai. Haan media me baat aa kar hat gai ye ajeeb hai. Waise b national media (e channels) chote Shahron ki khabaron ko kahan tavajjo dete hain? Khabar to hoti hai dilli air Mumbai kind bas. Ham apne gharon me baithe Sara din dilli me kya kya hula yahi dekhte rahte hain. Shayad media kit nazron me chote shahron ka koi wajood hi nahi ya shayad apne a as paas k reportes rakhne she zyada inki haisiyat nahi.

Sanjaya Kumar Singh सही बात है। सभी शहरों में रिपोर्टर रखने और पूरी व्यवस्था करने में भारी खर्च है। 24 घंटे कुछ दिखाने के लिए चाहिए सो अलग। तो जो रिपोर्टर और सुविधाएं जहां हैं उनका पूरा उपयोग किया जाता है। दिल्ली में जरा सी बारिश हो जाए, हमलोगों को पता भी नहीं होता फोन आन…See More

Harpal Singh Thapar Wah kya udahran diya hai aapne. Bilkul durust farmaya.

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

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