Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal

प्रिंट-टीवी...

टीआरपी के लिए कम से कम बीस हजार घरों से डॉटा लें : ट्राई

नई दिल्ली : टेलीकाम रेगुलेटरी अथारिटी (ट्राई) ने टीवी पर प्रसारित कार्यक्रमों की लोकप्रियता को जांचने-परखने के लिए एक नई गाइडलाइंस जारी की है. इस गाइडलाइंस के अनुसार टीवी कार्यक्रमों और न्यूज चैनलों के शो की व्यूअरशिप जांचने के लिए फिलहाल कम से कम 20 हजार घरों से डॉटा लिए जाएंगे.

नई दिल्ली : टेलीकाम रेगुलेटरी अथारिटी (ट्राई) ने टीवी पर प्रसारित कार्यक्रमों की लोकप्रियता को जांचने-परखने के लिए एक नई गाइडलाइंस जारी की है. इस गाइडलाइंस के अनुसार टीवी कार्यक्रमों और न्यूज चैनलों के शो की व्यूअरशिप जांचने के लिए फिलहाल कम से कम 20 हजार घरों से डॉटा लिए जाएंगे.

घरों की संख्या में हर साल पांच हजार की बढ़ोतरी की जाएगी और यह तब जारी रहेगी जब तक यह 50 हजार तक नहीं पहुंच जाए. साथ ही इसमें शिकायतों के निपटारे के लिए एक रिड्रेसल सिस्टम भी बनाया जाएगा. उधर, मोटी कमाई और टीआरपी बढ़ाने के लिए फिल्मों, टीवी सीरियलों में अश्लीलता परोसने को लेकर मची होड़ पर कानूनी ब्रेक लगाने की तैयारी चल रही है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने इन्हें इनडीसेंट रिप्रेजेंटेशन ऑफ वुमन (प्रोअबिशन) अमेंडमेंट बिल 2012 के दायरे में इन्हें लाने की सिफारिश की है.

टीवी पर बढ़ती अश्लीलता पर काबू पाने के लिए समिति ने प्रस्तावित संशोधित कानून की नए सिरे से समीक्षा और नियमन की वकालत की गई है. फिल्मों पर पूरी तरह से इस कानून को लागू करने की सिफारिश भी की गई है. संसदीय समिति ने इस मुद्दे को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के समक्ष भी उठाया है.

दरअसल प्रस्तावित संशोधित विधेयक के दायरे में फिल्म निर्माताओं, निदेशक औरच ट्रेंड बॉडी को लाने पर कोई अस्पष्टता नहीं है. इसलिए समिति ने इस मुद्दे को सही तरीके से विधेयक में पेश करने की सिफारिश की है. दूसरी ओर समिति ने सरकार को महिलाओं की अश्लील प्रस्तुति संबंधी दिशा-निर्देश की समीक्षा करने की सलाह भी दी है. समिति ने सिनेमेटोग्राफ कानून और केबल टीवी कानून की अनदेखी पर कड़े कदम उठाने और कानून की अनदेखी पर भारी जुर्माना ठोकने की वकालत भी की है.

पिछले नौ महीनों में महिलाओं के अश्लील तरह से दिखाने और प्रस्तुत करने पर प्रतिबंध लगाने को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति के समक्ष तमाम पक्षकारों से विस्तार में चर्चा की गई. समिति इस कानून के दायरे में संचार के सभी माध्यमों को लाने के पक्ष में है. समिति का मानना है कि संशोधित कानून की ऐसी व्याख्या होनी चाहिए जिससे अश्लीलता परोसने की कोई गुंजाइश नहीं हो. इस बाबत समिति ने इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, भारतीय उद्योग परिसंघ, राष्ट्रीय महिला आयोग, वकीलों, भारतीय विज्ञापन संघ से भी सलाह मशविरा लिया है.

पिछले वर्ष 13 दिसंबर 2012 को महिलाओं के अश्लील प्रदर्शन पर रोक लगाने संबंधी बिल को राज्यसभा में पेश किया गया था, जबकि 21 दिसंबर 2012 को इसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति को समीक्षा के लिए भेज दिया गया था. इससे पहले संबंधित बिल को 1986 में पेश किया गया था। लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति आने से संचार के कई माध्यम हो गए हैं. इसलिए इस कानून का विस्तार केवल प्रिंट मीडिया को प्रतिबंधित करने की जगह संचार के सभी माध्यमों पर लागू करने की सिफारिश की जा रही है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadas … मोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia  …

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...