रविवार को पटना में मीडिया कर्मियों का जमावड़ा लगा. होटल चाणक्य में बिहार टाइम्स की ओर से इसका आयोजन किया गया. प्राणंजय गुहा ठाकुरता, एनआर मोहंती, मुकेश कुमार, मणिकांत ठाकुर, नीलाभ मिश्र मुख्य वक्ता के रूप में थे. चर्चा का विषय रखा गया था- मीडिया में करप्शन : मीडिया और करप्शन. आत्म अवलोकन हो रहा था. कोई स्थानीय संपादक इसमें नहीं आये. हिन्दुस्तान के संपादक का नाम पैनल में था. मुकेश कुमार ने परिचर्चा की शुरुआत की.
मुकेश ने मीडिया की विवशता को बड़ा बेबाकी के साथ रखा. मुकेश ने कहा कि आप अन्ना हजारे के आन्दोलन को दिखाना मीडिया के लिए मजबूरी हो गई है. ऐसा नहीं है कि मीडिया करप्शन के साथ है. मीडिया ऐसा टीआरपी के लिए ऐसा कर रहा है. मुकेश कुमार ने मीडिया के अपराधीकरण पर भी प्रकाश डाला. कहा- आज मीडिया में भ्रष्टाचारियों का पैसा इन्वेस्ट हो रहा है. ऐसे में वे अपने मुनाफे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं.
आउटलुक हिंदी के सम्पादक नीलाभ मिश्र ने कहा कि मीडिया में दो तरह के करप्शन हैं. एक तो नीरा राडिया वाला ग्रुप है और दूसरा पेड़ न्यूज़ को प्रोमोट करने वाला. वहीं जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ़ मॉस कम्युनिकेशन के डाइरेक्टर एनआर मोहंती ने मीडिया हाउस और कॉरपोरेट हाउस को भी आरटीआई के दायरे में लाने की सिफारिश की. साथ ही मीडिया के करप्शन को दूर करने के लिए मीडिया को ही आगे आने पर जोर डाला. बीबीसी हिंदी के मणिकांत ठाकुर ने लोगों के बीच मीडिया की बनती छवि पर प्रकाश डाला. श्री ठाकुर ने कहा कि आज मॉस मीडिया के बदले वह माल मीडिया बनता जा रहा है.

कोहरे के कारण श्री ठाकुरता थोड़ी देर से पंहुचे थे. ठाकुरता ने ने कहा कि आज विपक्ष के कमजोर होने के कारण मीडिया का रोल बढ़ गया है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने मीडिया में करप्शन को जहां इंस्टीट्यूनलाइज कर दिया, वहीँ दैनिक जागरण ने पेड़ न्यूज़ की शुरुआत की. ठाकुरता ने छोटे-छोटे मीडिया हाउस को प्रमोट करने की अपील की. आज इंडियन प्रेस कौंसिल केवल भौंक सकता है. क्योंकि उसके पास कोई ताकत ही नहीं है.
सेमिनार की झलकियाँ :
डर गए स्थानीय संपादक : सेमीनार का टॉपिक को देख कर ही कई संपादक डर गए. हिंदुस्तान के संपादक अकू श्रीवास्तव को आना था. लेकिन वे नहीं आये. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व चेयरमैन डॉ. अजय कुमार ने चुटकी ली. कहा…मैंने इतनी सारी बातें कही…लेकिन किसी अखबारों में एक लाइन चर्चा नहीं हुई. इस पर खूब ठहाका लगा. पता चला कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक लाइन भी कवरेज नहीं हुआ. क्या बिहार टाइम्स कानक्लेव इसके लायक नहीं था.

शिव कुमार राय ने तो माहौल ही बदल दिया : बक्सर के शिव कुमार राय (आरटीआई कार्यकर्ता) ने जब डीएम से सूचना मांगी तब उसे रंगदारी मांगने के मामले में अरेस्ट करके जेल भेज दिया गया. मीडिया में खबर भी छप गई कि डीएम से रंगदारी मांगने के आरोप में जेल. जबकि वास्तविकता यह थी कि आज तक ५५ साल के शिव कुमार राय के उपर किसी तरह का कोई मुकदमा नहीं हुआ है. बाद में २९ दिनों के अन्दर शिव कुमार राय को जमानत मिल गई. एसएसपी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि रंगदारी मांगने का मामला झूठा है. आखिर लोकल मीडिया में इस तरह की खबरें कैसे छप जाती हैं. एनआरआई ने खूब चुटकी ली. कहा मीडिया को अपने भ्रष्टाचार से पिंड छुडाना होगा. तमाम लोगों ने शिव कुमार राय के साहस का लोहा माना. श्री राय ने अपने बक्सर जेल में बिताये हुए पल की भी चर्चा की. प्रवीण बागी ने स्ट्रिंगर के शोषण को लेकर अपनी बात रखी. वहीं गंगा प्रसाद ने आज मीडिया की बदहाली पर प्रकाश डाला.






