Arvind Kumar Singh : आडवाणी के इस्तीफे का निहितार्थ.. तो मोदीजी की ताजपोशी की रंगत लाल कृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज के इस्तीफे ने फीकी कर दी है…बीते तीन दिनों से जहां मोदी राग चल रहा था..लग रहा है टीवी चैनलों को अब नया काम मिल गया है.
अब राग आडवाणी चलेगा..आखिर आडवाणी एनड़ीए का नेतृत्व भी कर रहे थे और बीजेपी संसदीय दल के अध्यक्ष भी थे…उनका इस्तीफा बीजेपी में अटल-आडवाणी राज का अंत तो है ही तमाम ऐसे संकेत दे रहा है जो बीजेपी के लिए भी ठीक संकेत नहीं है…शरद यादव ने कह ही दिया है कि एनडीए में रहने पर फिर से सोचना होगा…तो क्या राष्ट्रीय राजनीति में बीजेपी की वही दशा होने जा रही है जो आजकल आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नाय़डू की है.
वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह के एफबी वॉल से साभार.






