टेलीवीजन के दर्शकों का हिसाब किताब रखनेवाली टैम मीडिया रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड पर लंबे समय से गलत आंकड़े देने के आरोप लगते रहे हैं. ब्राडकास्टर्स ही नहीं बल्कि सरकार और प्रसार भारती भी टैम के टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट सिस्टम पर सवाल खड़ा करती रही है. दूसरी तरफ टैम ने अब ब्रॉडकास्टर्स के द्वारा आंकड़ों का अपने हित में उपयोग करने का मुद्दा उठाया है. संभावना है कि आने वाले दिनों में टैम को लेकर विवाद और गहराएंगे.
अब टैम ने अपने टीआरपी सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए छह सदस्यीय पैनल का गठन किया है जिसे ट्रांसपेरेंसी पैनल का नाम दिया है. इस ट्रांसपेरेंसी पैनल का हेड रिटायर्ड आईएस अधिकारी डॉ. एम दामोदरन को बनाया गया है जो कि पूर्व में सेबी, आईडीबीआई और यूटीआई के चेयरमैन रह चुके हैं. इसके अलावा इस ट्रांसपेरेसी पैनल में बीएआरसी के पूर्व चेयरमैन चिंतामन राव, मैकडोनाल्ड्स के पूर्व अंतरराष्ट्रीय मीडिया डायरेक्टर जियो फैब्रिस, ब्रिटेन में बीएआरबी के बोर्ड मेम्बर रहे आइवर मिलमैन, प्राक्टर एण्ड गैम्बल, चीन के पूर्व निदेशक प्रवीण त्रिपाठी और डब्लूपीपी की पूर्व निदेशक शीला बायफील्ड को सदस्य बनाया गया है.
टैम के सीईओ एलवी कृष्णन ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से मीडिया को सूचित किया है कि टैम में ट्रांसपेरेंसी को लेकर यह पहल इसलिए की गई है क्योंकि कई आरोप लगने के बावजूद टैम पर टीवी इंडस्ट्री का बहुत भरोसा है. छह सदस्यीय टीम को थर्ड पाटी बताते हुए कृष्णन कहा कि इसमें से कोई टैम का फुल टाइम वर्कर नहीं है. अब यह पैनल टैम को कितना ट्रांसपैरेंट बना पाएगा यह भी एक बहुत बड़ा सवाल है. क्योंकि जिस तरह से टैम के आंकड़े मापे जाते हैं उसको लेकर शुरू से विवाद रहा है. अब बिना परेशानी की जड़ में गए पत्तियों की दवा करने से पेड़ को कितना फायदा होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.






