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ट्रेन में जबरन वसूली का शिकार हुआ नोएडा का एक पत्रकार

मैं करनाल से दिल्ली वापस आ रहा था. करनाल स्टेशन पर दौड़कर जैसे तैसे हम लोगों ने पश्चिम एक्सप्रेस पकड़ ली. हमारे पास जनरल का टिकट था. गाड़ी खुल रही थी, सो हमलोग रिजर्वेशन वाली बोगी में घुस गए. वहां का नजारा देखकर हैरान रह गया. एक लेडी टीटी जो बिल्कुल साधारण लिबास में थी, टीटी के ड्रेस में नहीं,  उसके साथ हरियाणा पुलिस का एक जवान और तीन लोग साधारण कपड़े में थे, जो रेलवे के स्टाफ नहीं थे, उनके हाथ में भी रेलवे की फाइन काटने वाली रसीद बुक थी, सब मिलकर अवैध वसूली कर रहे थे. 

मैं करनाल से दिल्ली वापस आ रहा था. करनाल स्टेशन पर दौड़कर जैसे तैसे हम लोगों ने पश्चिम एक्सप्रेस पकड़ ली. हमारे पास जनरल का टिकट था. गाड़ी खुल रही थी, सो हमलोग रिजर्वेशन वाली बोगी में घुस गए. वहां का नजारा देखकर हैरान रह गया. एक लेडी टीटी जो बिल्कुल साधारण लिबास में थी, टीटी के ड्रेस में नहीं,  उसके साथ हरियाणा पुलिस का एक जवान और तीन लोग साधारण कपड़े में थे, जो रेलवे के स्टाफ नहीं थे, उनके हाथ में भी रेलवे की फाइन काटने वाली रसीद बुक थी, सब मिलकर अवैध वसूली कर रहे थे. 

आपको बता दूं कि एसबीआई क्लर्क की परीक्षा होने के कारण,  जिसका सेंटर करनाल में था, ट्रेन के हर डिब्बे में परीक्षार्थी सवार थे और उन सबसे जबरन वसूली हो रही थी. टीटी ने जब हमसे टिकट के बदले फाइन मांगी तो हमने भी उससे उसका आई-कार्ड दिखाने को कहा. इतने में हरियाणा पुलिस का वो हवलदार जिसकी उम्र लगभग 50 साल थी, वो हमसे बदतमीजी करने लगा. उसके साथ जो लड़के थे वो भी गाली गलौज पर उतारु हो गए. उनकी बातों से लगा कि यह सब रेलवे की मिलीभगत से हो रहा है क्योकि वो वहां के लोकल गुंडे थे जो टीटी के साथ रोज सफर करके लोगों को डराकर पैसा वसूलते हैं.  ये बातें ट्रेन मे सफर कर रहा एक नौजवान जो सोनीपत का था, उसने बताया.

हम लोगों ने कहा कि आप लिखित में फाइन लगाओ रसीद दो, तब पैसे देंगे. फिर वो सबके सब हम पर टूट पड़े. धक्का-मुक्की करने लगे, हमने उनको बताया कि हम प्रेस से हैं. फिर उन लड़को ने हमारा प्रेस आई-कार्ड हमसे जबरन छीन लिया और ट्रेन से नीचे फेंक दिया. हमारे उपर वाले पॉकेट से 1200 रु निकाल लिया और हमारा जनरल टीकट हमे वापस करके वहां से चलते बने.

हंगामे के दौरान हमने दिल्ली में अपने कुछ मीडिया के साथियों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन किसी से बात नहीं बन पाइ. किसी ने फोन पिक-अप नहीं किया तो किसी ने दिल्ली से बाहर होने की बात करके बात को टाल दिया. उनके पास फोन अपने बचाव के लिए नहीं बल्कि इसलिए किया ताकि पानीपत या सोनीपत में उतर के उन लोगो के खिलाफ मामला दर्ज करवा सकूं क्योंकि हरियाणा पुलिस का जवान जिस लहजे में बात कर रहा था मुझे यकिन था कि यहां बिना किसी दबाव के हमारी बात नहीं सुनी जाएगी और ना ही उनके उपर कोई कार्यवाई होगी.  
हम दिल्ली उतरते ही सबसे पहले आरपीएफ वालों के पास गए लेकिन मामला दर्ज कराने के चक्कर में एक घंटे तक स्टेशन सुपरिटेंडेंट से लेकर दिल्ली रेलवे पुलिस के दफ्तरों तक चक्कर काटते रहे. करीब एक घंटे बाद हमारी शिकायत दर्ज की गई. लेकिन स्टेशन सुपरिटेंडेंट की बातों से हमे लगा कि इस तरह के मामलों में कुछ होता नहीं, स्टेशन अधीक्षक साहब उल्टे हमे सिखाने लगे कि आपलोग हर जगह प्रेस की धमकी देते रहते हैं इसलिए आपके साथ ऐसा हुआ होगा.

यह घटना पत्रकार एसके चौधरी उर्फ सोनू के साथ घटित हुई है. उनसे संपर्क 09999579176 के जरिए किया जा सकता है.

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