विनोद कापड़ी ट्विटर पर खूब सक्रिय रहते हैं. इस टीआरपी मास्टर यानि विनोद कापड़ी के मुंह से देश, सरोकार, जनता नैतिकता आदि की बात सुनना दुनिया के आठवें आश्चर्य जैसा लगता है, लेकिन बाजारू आश्चर्यों, तलछट चमत्कारों के इस दौर में आश्चर्य-चमत्कार होते रहते हैं. कापड़ी को बड़ी चिंता है कि देश की जनता कैसी है जो अन्ना का जन्मदिन भूल जाती है, आईपीएल का सट्टा भूल जाती है, 2जी स्कैम भूल जाती है, वाड्रा भूल जाती है…
पर खुद अपनी अंतरआत्मा में झांककर कापड़ी बता सकते हैं कि आखिर जनता को इन सब चीजों को भुला देने की भांग किसने पिलाई है? उसी मीडिया ने जिसके बड़े दिग्गज बनते फिरते हैं विनोद कापड़ी. न्यूज चैनलों को न्यूज से नान-न्यूज की तरफ ढकेलने का श्रेय जिन कुछ लोगों को जाता है उसमें शीर्षस्थ एक विनोद कापड़ी है. जमकर टीआरपी आ जाए, बस यही मंशा जिस शख्स की होती हो वह खबर चलाने से पहले यह कैसे चिंता कर सकता है कि इसका असर देश, जनता, समाज पर क्या होगा?
पर यही लोग, यही भरे पेट वाले लोग, खाली टाइम में ट्विटिया करते हैं कि देश की जनता अजीब है जो सब भूल जाती है… अरे महराज, काहें आप देश की जनता को कोस रहे हैं, आप अपने टीआरपी और टीवी चैनल को देखिए, देश की जनता सब याद रखती है. भूलते तो आप लोग हो देश की जनता को…
खैर, आज बहुत दिनों बाद मेरा ट्विटर पर जाना हुआ. विनोद दुआ से संबंधित समाचारों, जानकारियों के चक्कर में ट्विटर पर पहुंचो तो वहां विनोद कापड़ी मिल गए. महान विनोद कापड़ी जो फर्जीवाड़े का मास्टर है, जिसने ऐसा फर्जीवाड़ा पुलिस स्टेशन में लिखवाया कि भड़ास वालों को जेल में दो ढाई महीने रहना पड़ा. यानि मुझे. तो, जो खुद फर्जी कहानियां गढ़ने का उस्ताद हो, झूठी तहरीर देने का मास्टर हो, सेटिंग-लायजनिंग से पत्रकारों को पुलिस-जेल दिखवाने का अपराधी हो, वह जब नैतिकता देश सरोकार की बात करता है तो अजीब लगता है.
पर यह बाजार का ऐसा दौर है कि जो जितना बड़ा पतित है, वह उतनी बड़ी हस्ती है. और ऐसे पतितों को सत्ता-सिस्टम गले लगाकर रखता है, हमारे आप जैसों को सड़क छाप मानकर दुरदुराया करता है. पर कभी ऐसे ही सड़क छाप वाले कमजोर दिखने वाले आम जन बहुत मजबूत पड़ जाते हैं कापड़ी साहब… पर यह बात आपको नहीं समझ में आएगी क्योंकि आप शीशे के घर में बैठकर दुनिया देखते हैं, वह भी आधी-अधूरी दुनिया. आपको मोटी सेलरी, सत्ताधारी नेता और बड़े पुलिस अफसर, बड़े मीडिया मालिक… बस यही सब अच्छे लगेंगे, आम पत्रकार और आम जन कतई नहीं.. ट्विटर पर कापड़ी साहब को कुछ जवाब दिया… उसी का स्क्रीनशाट नीचे है.

कापड़ी साब जैसे लोग कभी कभी अपनी भड़ास निकालने के लिए आम आदमी और देश का नाम लेकर चिंतित हुआ करेंगे, जैसे कि इस देश के नेता आम जन व देश का नाम लेकर चिंतित होते रहते हैं और घोटाले पर घोटाले करते जाते हैं… उसी तरह हे कापड़ी जी, आप आम जन और देश का नाम लेकर चिंतित होते रहिए और आम जन व देश के मन-मिजाज को नाश मारने वाले प्रोग्राम दिखाते रहिए… या बड़ी खबरों को छिपाकर छोटी मोटी ह्यूमन एंगल की कहानियां रोने धोने गाने के किस्से दिखाते रहिए…
हिम्मत है तो काहे नहीं आप वाड्रा साहब के धोखाधड़ी की पूरी कहानी दिखाते हैं… अभी हाल में ही पीएमओ ने वाड्रा के बारे में मांगी गई जानकारियों को परम गोपनीय श्रेणी का बताया है… इस खबर पर पैकेज-प्रोग्राम बनाकर प्राइम टाइम में क्यों नहीं दिखाते… ऐसा इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि रजत शर्मा तुमको ऐसा नहीं करने देगा और रजत शर्मा के तार सीधे हर बड़े नेता से जुड़े हैं… तो, कापड़ी साहब, बकचोदी बंद करिए और अपनी नौकरी करिए… टीआरपी की चिंता करिए…देश और जनता आप जैसों के बगैर भी जिंदा थे, हैं, रहेंगे.
-यशवंत
एडिटर, भड़ास4मीडिया
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