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लखनऊ

डीजीपी कार्यालय में फर्जी संस्था?

यूपी पुलिस की सरकारी टेलीफोन डायरी में पुलिस वेलफेयर संस्था (पता ई-3, विज्ञानपुरी, महानगर) का उल्लेख है जिसमे डीजीपी की पत्नी अध्यक्ष हैं और कई सरकारी कर्मी कार्यरत हैं. इस सम्बन्ध में आरटीआई कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा प्राप्त सूचनाओं से कई गंभीर बातें सामने आई हैं. डीजीपी कार्यालय का कहना है कि यह संस्था पुलिस कर्मचारियों के कल्याणार्थ विभिन्न जनपदों में संचालित कल्याण केन्द्रों के कार्यों के पर्यवेक्षण के लिए डीजीपी कार्यालय का अंग है पर इस संस्था की आधिकारिक और कानूनी स्थिति, मेमोरेंडम, नियमावली आदि उसके पास उपलब्ध नहीं हैं, जो पुलिस मुख्यालय, इलाहाबाद द्वारा बताया जा सकता है.

यूपी पुलिस की सरकारी टेलीफोन डायरी में पुलिस वेलफेयर संस्था (पता ई-3, विज्ञानपुरी, महानगर) का उल्लेख है जिसमे डीजीपी की पत्नी अध्यक्ष हैं और कई सरकारी कर्मी कार्यरत हैं. इस सम्बन्ध में आरटीआई कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा प्राप्त सूचनाओं से कई गंभीर बातें सामने आई हैं. डीजीपी कार्यालय का कहना है कि यह संस्था पुलिस कर्मचारियों के कल्याणार्थ विभिन्न जनपदों में संचालित कल्याण केन्द्रों के कार्यों के पर्यवेक्षण के लिए डीजीपी कार्यालय का अंग है पर इस संस्था की आधिकारिक और कानूनी स्थिति, मेमोरेंडम, नियमावली आदि उसके पास उपलब्ध नहीं हैं, जो पुलिस मुख्यालय, इलाहाबाद द्वारा बताया जा सकता है.

इसके विपरीत पुलिस मुख्यालय का उत्तर है कि अभिलेखों के अनुसार इस संस्था का पुलिस विभाग से सम्बन्ध नहीं पाया जाता है. अब डॉ. ठाकुर ने प्रमुख सचिव (गृह) को इस प्रकार बिना किसी आधिकारिक मान्यता और बिना शासकीय अभिलेखों के लंबे समय से डीजीपी कार्यालय में इस संस्था का सञ्चालन होने के सम्बन्ध में गहराई से जांच कराने को लिखा है. नीचे डा. ठाकुर द्वारा लिखा गया पत्र…



सेवा में,
प्रमुख सचिव (गृह),
उत्तर प्रदेश शासन,
लखनऊ
विषय- पुलिस वेलफेयर (पुलिस कल्याण) नामक संस्था के विषय में गहराई से जांच कराये जाने विषयक  

महोदय,

कृपया निवेदन है कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा प्रकाशित टेलीफोन डायरी के अनुसार उत्तर प्रदेश में एक पुलिस वेलफेयर (पुलिस कल्याण) संस्था है जिसका पता ई-3, विज्ञानपुरी, महानगर है. चूँकि इस संस्था का उल्लेख पुलिस विभाग की सरकारी डायरी में है, अतः यह स्वाभाविक तौर पर अपेक्षित है कि या तो यह एक सरकारी संस्था होगी या इस कार्यालय के पूरे संज्ञान में होगी. अतः मैंने अपने पत्र संख्या- NT/RTI-PW/DG/02 दिनांक-03/01/2012 के माध्यम से पुलिस महानिदेशक कार्यालय से उत्तर प्रदेश पुलिस वेलफेयर से सम्बंधित कतिपय सूचनाएँ दिये जाने का अनुरोध किया था,. इसके सम्बन्ध में मुझे उनके कार्यालय से सूचना प्राप्त हुई.  (छायाप्रति संलग्न).

मुझे अवगत कराया गया कि यह संस्था पुलिस कर्मचारियों के कल्याणार्थ विभिन्न जनपदों तथा ईकाईओं में संचालित कल्याण केन्द्रों के कार्यों के पर्यवेक्षण करती है जो पुलिस महानिदेशक मुख्यालय, उ०प्र० के अधीन एक अनुभाग/शाखा है. पूर्व में यह अनुभाग/शाखा पुलिस महानिदेशक मुख्यालय पर मौजूद था पर यहाँ जगह/कक्ष संकीर्ण होने के कारण अस्थायी रूप से विग्यांपुरी, महानगर व्यवस्थापित कर दिया गया, जिसका राज्कित कार्य संपादन मुख्यालय पर नियुक्त उच्चाधिकारियों के दिशा निर्देश पर ही होता है. साथ ही यह भी सूचना दी गयी कि इस संस्था की आधिकारिक और कानूनी स्थिति, मेमोरेंडम, नियमावली आदि उसके पास उपलब्ध नहीं हैं, जो उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय, इलाहाबाद द्वारा बताया जा सकता है.

मेरे द्वारा बार-बार सूचना मांगे जाने और अंत में मा० राज्य सूचना आयोग के समक्ष वाद सायर करने के बाद मुझे उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय से यह सूचना मिली है कि पुलिस वेलफेयर (पुलिस संस्थान) संस्था का पुलिस विभाग से सम्बन्ध नहीं पाया जाता है.

ऐसी स्थिति में यह प्रकरण स्वयं ही अत्यंत महत्वपूर्ण और गंभीर हो जाता है कि जव इस प्रकार का कोई संगठन पुलिस विभाग का अंग है ही नहीं और इसका पुलिस विभाग से कोई संबंध नहीं है तो फिर यह कथित संस्था किस आधार पर पुलिस महानिदेशक कार्यालय से संचालित किया जा रहा है जबकि यह बिना किसी आधिकारिक मान्यता और बिना शासकीय अभिलेखों के है. यह प्रकरण और भी गम्व्हिर इस लिए हो जाता है कि स्वयं पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश की पत्नी इसकी अध्यक्ष हैं. इसके अतिरिक्त  कई अन्य सरकारी कर्मी भी इसमें कार्यरत हैं. मेरी जानकारी के अनुसार यह बिना आधार और बिना आधिकरिक अस्तित्व वाली संस्था बिना किन्ही आवश्यक अभिलेखों के पूरे प्रदेश में पुलिस विभाग में हस्तक्षेप करती है और संभवतः अनवरत सरकारी धन और सरकारी सुख-सुविधाओं का भी उपयोग करती है जो पूरे प्रदेश के पुलिस कर्मियों से जबरदस्ती कटौती की जाती है. इस प्रकार पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों और उनकी पत्नियों द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी और गैर-सरकारी पैसे का विना किसी अधिकार और बिना किसी उत्तरदायित्व के पूर्णतया अपारदर्शी ढंग से प्रयोग किये जाने की यह स्थिति निश्चित रूप से अत्यंत आपत्तिजनक है और इसमें किसी घोटाले या अनियमितता से इनकार नहीं किया जा सकता है.

अतः मैं आपसे निवेदन करती हूँ कि इस कथित संस्था पुलिस वेलफेयर के पुलिस विभाग में अनधकृत रूप से अपारदर्शी ढंग से सञ्चालन के सम्बन्ध में गहराई से जांच कराये जाने की कृपा करें.

पत्र संख्या- NRF/Home/PW/01                                        भवदीय,
दिनांक-18/05/2013
                                                                           (डॉ नूतन ठाकुर )
                                                                         5/426, विराम खंड,
                                                                         गोमती नगर, लखनऊ
                                                                              # 94155-34525

प्रतिलिपि- पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को कृपया आवश्यक कार्यवाही किये जाने हेतु



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