Amitabh Thakur : कल मुझे एक बहुत मजेदार आरटीआई सूचना देखने को मिली. इसमें एक बहुत बड़े सरकारी अधिकारी द्वारा लिखा गया था- "साथ ही इस सम्बन्ध में डॉ नूतन ठाकुर को पुलिस महानिदेशक के माध्यम से परामर्श दे दिया जाए कि इस प्रकार शासन से भविष्य में अन्यथा पत्राचार न करें."
सोच रहा हूँ कि कोई भी सरकारी सेवक (चाहे वह प्रदेश का मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव ही क्यों ना हो) एक प्राइवेट आदमी को किस अधिकार और किस नियम से इस प्रकार के निर्देश दे सकता है?
यह भी सोच रहा हूँ कि यदि सचमुच ऐसा कोई नियम बन जाए तो हम सरकारी लोगों को कितना मजा आये. जब चाहें, जिसके खिलाफ चाहें इस तरह के आदेश जारी कर दें कि "आज से तुम्हारा हमने पत्राचार करने का अधिकार खत्म किया." बस हो गयी एक पल में फुर्सत. ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी, अर्थात ना आएगा किसी झंझटी आदमी का पत्र और ना होगी उस सम्बन्ध में कार्यवाही करने की कोई दिक्कत या मजबूरी. मामला फिट !
आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के फेसबुक वॉल से.





