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डीयू में पत्रकारिता कोर्स में प्रवेश परीक्षा की जरूरत नहीं

दिल्ली विश्वविद्यालय के अंग्रेजी पत्रकारिता कोर्स में दाखिले के लिए अब कोई प्रवेश परीक्षा नहीं होगी. दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के अंग्रेजी पत्रकारिता डिग्री कोर्स में दाखिले के लिए विद्यार्थियों को चार साल के नये स्नातक पाठ्यक्रम के तहत इस साल से प्रवेश परीक्षा नहीं देनी होगी, लेकिन हिंदी पत्रकारिता परीक्षा के लिए पिछले वर्षों की भांति प्रवेश परीक्षा जारी रहेगी. चार साल के नये पैटर्न के मुताबिक अंग्रेजी पत्रकारिता स्नातक (प्रतिष्ठा) पाठ्यक्रम का नाम पत्रकारिता एवं जनसंचार स्नातक पाठ्यक्रम कर दिया गया.

दिल्ली विश्वविद्यालय के अंग्रेजी पत्रकारिता कोर्स में दाखिले के लिए अब कोई प्रवेश परीक्षा नहीं होगी. दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के अंग्रेजी पत्रकारिता डिग्री कोर्स में दाखिले के लिए विद्यार्थियों को चार साल के नये स्नातक पाठ्यक्रम के तहत इस साल से प्रवेश परीक्षा नहीं देनी होगी, लेकिन हिंदी पत्रकारिता परीक्षा के लिए पिछले वर्षों की भांति प्रवेश परीक्षा जारी रहेगी. चार साल के नये पैटर्न के मुताबिक अंग्रेजी पत्रकारिता स्नातक (प्रतिष्ठा) पाठ्यक्रम का नाम पत्रकारिता एवं जनसंचार स्नातक पाठ्यक्रम कर दिया गया.

छात्र कल्याण डीन जे एम खुराना ने कहा कि इस बार पत्रकारिता (प्रतिष्ठा) पाठ्यक्रम का नाम पत्रकारिता एवं जनसंचार कर दिया गया है और उसके पाठ्यक्रम को भी नया रूप दे दिया गया है. पहले अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक (प्रतिष्ठा) प्रदान करने वाले पांच कॉलेज साझा प्रवेश परीक्षा आयोजित करते थे जबकि बैचलर ऑफ मास मीडिया एंड मास कम्युनिकेशंस का अनोखा कोर्स पढ़ाने वाला इंद्रपस्थ महिला कॉलेज अलग से परीक्षा आयोजित करता था. खुराना ने कहा कि अब आईपी कॉलेज, जो अकेले बीएमएमएमसी कोर्स उपलब्ध कराता था, अब अन्य कॉलेजों की भांति पत्रकारिता एवं जनसंचार का वही डिग्री कोर्स उपलब्ध कराएगा. पत्रकारिता में दाखिला विभिन्न कॉलेजों के कट ऑफ लिस्ट पर आधारित होगा.
     
आईपी कॉलेज की प्राचार्या बबली मोइत्रा ने कहा कि बीएमएमएमसी और पत्रकारिता को मिला दिया गया है लेकिन दोनों को पिछले पाठ्यक्रमों का घटक बनाए रखा गया है और नये पाठ्यक्रम में दोनों एक दूसरे के पूरक है. हालांकि उसका सिलेबस अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. शीघ्र ही उसे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर डाल दिया जाएगा. नया पाठ्यक्रम पेशेवर अंदाज का होगा और वह पत्रकारिता में उभरते क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगा. कुछ शिक्षकों ने प्रवेश परीक्षा खत्म करने पर चिंता जतायी है और कहा है कि छात्रों की गुणवत्ता प्रभावित होगी क्योंकि परीक्षा से पाठ्यक्रम के लिए छात्रों के चयन में मदद मिलती है. प्रोफेसरों ने कहा कि उन्हें प्रवेश परीक्षा खत्म करने के पीछे का तर्क गले के नीचे नहीं उतरा. उधर, इस फैसले से संतुष्ट शिक्षकों ने कहा है कि प्रवेश परीक्षा का मतलब है कि काफी सीटें खासकर आरक्षित श्रेणी की सीटें खाली रह जाना.

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