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तनाव और दबाव के बीच काम कर रहे नवभारत एवं हमारा महानगर के पत्रकार

मुंबई : मुंबई से प्रकाशित दैनिक नवभारत और दैनिक हमारा महानगर के पत्रकारों को मजबूरन ओवरटाइम करना पड़ रहा है। बता दें कि मुंबई के हिंदी समाचार पत्रों की सूची में टॉप थ्री में नवभारत और हमारा महानगर का नाम आता है। इस के बावजूद आज के समय में पत्रकारों भर्ती नहीं किये जाने के कारण जो कर्मचारी बचे हैं, वे ही दूसरे बीटों पर काम करने को मजबूर है। नवभारत के मुंबई और नवी मुंबई में कर्मचारियों की भरी कमी है।

मुंबई : मुंबई से प्रकाशित दैनिक नवभारत और दैनिक हमारा महानगर के पत्रकारों को मजबूरन ओवरटाइम करना पड़ रहा है। बता दें कि मुंबई के हिंदी समाचार पत्रों की सूची में टॉप थ्री में नवभारत और हमारा महानगर का नाम आता है। इस के बावजूद आज के समय में पत्रकारों भर्ती नहीं किये जाने के कारण जो कर्मचारी बचे हैं, वे ही दूसरे बीटों पर काम करने को मजबूर है। नवभारत के मुंबई और नवी मुंबई में कर्मचारियों की भरी कमी है।

नवभारत मुंबई कार्यालय में कार्यरत रहे और मंत्रालय कवर करने वाले विजय सिंह के पिछले सप्ताह भास्कर ज्वाइन करने से अब मंत्रालय का पूरा काम एक ही पत्रकार पर ही आ गया है। वहीं नवभारत के नवी मुंबई स्थित कार्यालय में रजित यादव और ओमप्रकाश ढोर के साथ ही विमल मिश्र को नियुक्त किया गया है। विमल मिश्रा को एमआईडीसी देखना पड़ता है तो रजित यादव को नवी मुंबई मनपा, सिड्को और अपराध बीट के साथ ही पेज देखने के लिए लगाया गया है। जबकि कुछ वर्ष पहले नवभारत में नवी मुंबई मनपा और सिड्को का बीट और अपराध का बीट दो लोगों को दिया गया था। इस के साथ ही ओमप्रकाश ढोर को बाजार दिया गया है, उस के साथ ही आंचलिक पेज देखने का ज़िम्मा भी दिया गया है। नवभारत के कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य दिए जाने से मानसिक रूप से तनाव में आकर काम करना पड़ा रहा है।

इसी तरह मुंबई से ही प्रकाशित दैनिक हमारा महानगर के कर्मचारियों को भी मानसिक तनाव के बीच देर रात तक कम करना पड़ रहा है। दो वर्ष पहले बॉलीवुड देखने वाली उर्मिला कोरी और जितेंद्र तिवारी के यहां से जाने के बाद खाली हुए जगह अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं की गई है। इस के साथ ही रेलवे और बिजनेस देखने वाले धीरज सिंह और सुशील मिश्रा के यहां से जाने के बाद खाली हुए जगह को भी अभी तक नही भरा गया है। हमारा महानगर में सर्वाधिक मानसिक तनाव के शिकार यहां के सब एडिटर हो रहे हैं, इस के बावजूद हमारा महानगर के व्यवस्थापक विभाग आये दिन नए फरमान निकलकर उन्‍हें और परेशान कर रहा है।

मुंबई से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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