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तेजपाल दोतरफा मारे गए… बेचारे तेजपाल

Sanjay Tiwari : तहलका वाले तेजपाल दोतरफा मारे गये बेचारे। अगर पीड़िता ने सीधे पुलिस में शिकायत की होती तो तरुण तेजपाल कानूनी दांव पेंच से अपने आपको बचाने की कोशिश करते। कम से कम कन्फेशन वाला ईमेल तो न लिखते। लेकिन यहां तो नैतिकता के नाम पर वे पहले ही गुनाह कबूल कर चुके हैं। अब जिस तरह से पीड़ित लड़की ने तेजपाल के परिवार द्वारा उसकी मां को प्रभावित करने की बात कही है उससे संकेत मिलता है कि वह 'जांच' में गोवा पुलिस को सोमा चौधरी से ज्यादा सहयोग करेगी। बेचारे तेजपाल।

Sanjay Tiwari : तहलका वाले तेजपाल दोतरफा मारे गये बेचारे। अगर पीड़िता ने सीधे पुलिस में शिकायत की होती तो तरुण तेजपाल कानूनी दांव पेंच से अपने आपको बचाने की कोशिश करते। कम से कम कन्फेशन वाला ईमेल तो न लिखते। लेकिन यहां तो नैतिकता के नाम पर वे पहले ही गुनाह कबूल कर चुके हैं। अब जिस तरह से पीड़ित लड़की ने तेजपाल के परिवार द्वारा उसकी मां को प्रभावित करने की बात कही है उससे संकेत मिलता है कि वह 'जांच' में गोवा पुलिस को सोमा चौधरी से ज्यादा सहयोग करेगी। बेचारे तेजपाल।

Nadim S. Akhter : तरुण तेजपाल के -घायल- होने पर भाई लोग उस पर ऐसे हमला कर रहे हैं जैसे किसी घायल शेर पर लोमड़ी और सियार टूट पड़ते हैं. डिस्कवरी चैनल और एनिमल प्लैनेट पर देखा होगा आप लोगों ने. कभी-कभी वो मिलकर शेर को मार भी देते हैं लेकिन 98 फीसदी घटनाओं में घायल शेर ही भारी पड़ता है. सो कानून को अपना काम करने दीजिए. दोष साबित होने पर तेजपाल को भी सजा भोगनी होगी. इस देश में कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है. बिल्ली के भाग्य से छीका फूट गया है, दूध पी तो लोगे, पचा भी पाओगे क्या…?!

Madan Tiwary : तरुण तेजपाल को दोषी मानना जल्दबाजी होगी । तरुण ने बहुत साफ़गोई से अपनी गलती को स्विकार किया है। बलात्कार का मामला तो नही लगता । पुलिस भी रहस्मय तरीके से कार्य कर रही है । होटल के लिफ़्ट मे बलात्कार का प्रयास कुछ जमता नही खासकर जब तरुण तेजपाल इसे अस्विकार कर रहे हो। मीडिया जगत मे बहुत कम अच्छे लोग है। तरुण जैसे लोगो की छवि को खराब करने के लिये हर दल प्रयास करेगा। सच को सामने आने देना चाहिये।

Shahnawaz Malik : विक्टिम में शिकायत करने का कॉनफिडेंस कहां से आया? इसका क्रेडिट आपको तहलका और वहां के डेमोक्रेटिक सेटअप को देना पड़ेगा क्योंकि आपके दफ्तर में फीमेल कलीग शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। अगर आपके दफ्तर की कोई लड़की बॉस के खिलाफ मोर्चा खोलती है तो उसकी नौकरी जाती है या फिर उसे नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। इसके बाद आरोपी शान से अगले शिकार की तलाश में जुट जाता है। पत्रकारिता के आसाराम तरुण तेजपाल नहीं आपके बॉस हैं जो यौन हिंसा भी करते हैं और अपनी गलती भी नहीं मानते। तरुण तेजपाल ने जितनी जल्दी गलती मान ली, इसके लिए शाबाशी देनी चाहिए क्योंकि किसी दूसरे संपादक या मीडियाकर्मी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को कभी नहीं माना, उलटा शिकायतकर्ता का जीना मुहाल कर दिया। तेजपाल के इस कदम से मीडिया की बदनाम गलियों में फीमेल मीडियाकर्मियों को इंसाफ दिलाने के लिए एक माहौल बनने की आहट सुनाई दे रही है। तरुण तेजपाल और तहलका को बधाई।

पत्रकार संजय तिवारी, नदीम एस. अख्तर, शाहनवाज मलिक और बिहार के गया जिले के जाने-माने वकील मदन तिवारी के फेसबुक वॉल से.

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