हरीश खरे ने पंकज पचौरी के पीएमओ के मीडिया सलाहकार बनते ही इस्तीफा क्यों दिया? क्या पीएमओ से ही इसके निर्देश दे दिए गए थे या फिर इस्तीफे की कोई और वजह थी? ये सारे सवाल मीडिया एवं राजनीतिक गलियारे में तैर रहे हैं. उल्लेखनीय है कि एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर पंकज पचौरी के प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार टीम में शामिल होने के कुछ घंटे बाद ही हरीश खरे ने सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने इस्तीफा देने के पीछे कोई वजह भी नहीं बताया.
द हिंदू के वरिष्ठ पत्रकार हरीश खरे ने जून 2009 में संजय बारू की जगह प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार के रूप में ज्वाइन किया था. तब से वे इस पद पर बने हुए थे. हरीश खरे अचानक चर्चा में तब आए थे जब पीएम के साथ देश के पांच चुनिंदा संपादकों की मीटिंग हुई थी. बताया गया कि इन पांच संपादकों की लिस्ट हरीश खरे ने ही तैयार की थी. इसी तरह इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ मीटिंग के दौरान भी हरीश खरे ने ऐसा ही किया था. बताया गया कि वे पद और अनुभव की बजाय अपने पसंद के संपादकों की मीटिंग पीएम से कराई थी. इसके बाद से ही देश के बड़े पत्रकारों की कुछ लॉबी उनसे नाराज चल रही थी. हरीश पर अंदरखाने मीडिया को ठीक से मैनेजमेंट न कर पाने का भी आरोप लगता रहा.
मीडिया में पीएम तथा सरकार की छवि को भी वे ठीक से मैनेज नहीं कर पा रहे थे, जिसके चलते पीएमओ में हनक रखने वाला एक गुट भी इनसे खुश नहीं था. इसी का परिणाम रहा कि पंकज पचौरी की पीएमओ में सलाहकार के रूप में इंट्री कराई गई. पंकज की नियुक्ति एडिशनल सेक्रेटरी पद के समकक्ष की गई जबकि हरीश खरे स्पेशल सेक्रेटरी पद के समकक्ष नियुक्त किए गए थे. यानी हरीश खरे पंकज से ऊंचे ओहदे पर थे, इसके बावजूद पंकज पचौरी की रिपोर्टिंग हरीश को न होकर प्रिंसिपल सेक्रेटरी पुलक चटर्जी को होनी थी. यह अप्रत्यक्ष रूप से हरीश खरे के अधिकारों में कटौती थी. जिसको पचा पाना हरीश खरे के लिए मुश्किल हो रहा था.
पत्रकारिता में भी पंकज से वरिष्ठ हरीश खरे को उनको रिपोर्टिंग न होने की बात नागवार गुजरी. सूत्रों का कहना है कि इसी से नाराज होकर हरीश खरे ने कुछ घंटों के भीतर ही अपना इस्तीफा सौंप दिया, जबकि पंकज पचौरी और हरीश खरे के पदों में कोई साम्यता नहीं थी. हालांकि हरीश खरे ने बातचीत में कहा है कि वे अब पत्रकारिता का आनंद लेने के लिए फिर से मुख्य धारा में लौटना चाहते हैं इसलिए इस्तीफा दिया है, पर अंदर की बात यह है कि आनंददायक नौकरी कर रहे हरीश खरे को पीएमओ ने इस कदर मजबूर कर दिया कि उन्हें इस्तीफा देने वाला कदम उठाना पड़ा.






