Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

तो इस कारण खुश रुक्मिनी खफा हुईं और एफबी पर सुप्रिय के खिलाफ सक्रिय हो गईं!

सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का माध्यम तो है, लेकिन इसको हथियार बनाकर कुंठा निकालना और दूसरों पर कीचड़ उछालना कहां तक सही है। ताजा मामला है आजतक की पूर्व इंटरटेनमेंट एडिटर रुक्मिनी सेन का। उन्होंने पहले इस्तीफा दिया। दो दिन बाद उनकी चैनल के मैनेजिंग एडिटर सुप्रिय प्रसाद से बातचीत हुई और फिर फेसबुक पर उन्होंने सुप्रिय प्रसाद पर बेहद आपत्तिजनक आरोप लगाने शुरू कर दिए। मैं ये साफ कर देना चाहता हूं कि सुप्रिय प्रसाद से मेरा कोई निजी सरोकार नहीं है।

सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का माध्यम तो है, लेकिन इसको हथियार बनाकर कुंठा निकालना और दूसरों पर कीचड़ उछालना कहां तक सही है। ताजा मामला है आजतक की पूर्व इंटरटेनमेंट एडिटर रुक्मिनी सेन का। उन्होंने पहले इस्तीफा दिया। दो दिन बाद उनकी चैनल के मैनेजिंग एडिटर सुप्रिय प्रसाद से बातचीत हुई और फिर फेसबुक पर उन्होंने सुप्रिय प्रसाद पर बेहद आपत्तिजनक आरोप लगाने शुरू कर दिए। मैं ये साफ कर देना चाहता हूं कि सुप्रिय प्रसाद से मेरा कोई निजी सरोकार नहीं है।

और न ही मैं यहां उनके समर्थन में कोई जुलूस निकालने की तैयारी में हूं, लेकिन अगर एक औरत अपने औरत होने का फायदा उठाते हुए किसी का मान मर्दन करे तो फिर सच की आवाज उठनी जरूरी है। जो लोग फेसबुक पर बिना मामला जाने समझे कमेंट कर रहे हैं, वो भी जान लें सच्चाई और फिर सोचें कि क्या करना हैं। कीचड़ किस पर उछाला जा रहा है और उसके पीछे मंशा क्या है।

सबसे पहले उस दिन की बात कर लेते हैं कि मुंबई के दफ्तर में हुआ क्या था। मुंबई के मीडिया के तमाम साथियों से बातचीत के बाद मुझे पता चला कि रविवार यानी 4 नवंबर को सुप्रिय प्रसाद मुंबई पहुंचे थे। मौका था इंडियन टेलीविजन अवार्ड का और इसमें लगातार 12वें साल आजतक को बेस्ट हिंदी न्यूज चैनल का अवार्ड मिलना था। सुप्रिय प्रसाद ने रात में अवार्ड लिया। अगले दिन मुंबई दफ्तर में दोपहर बाद मीटिंग करने आए। कान्फ्रेंस रूम में ब्यूरो चीफ साहिल जोशी और इंटरटेनमेंट के सिद्धार्थ हुसैन से बातचीत के बाद उन्होंने रुक्मिनी सेन से बातचीत की। करीब पांच मिनट के बाद वो कमरे से बाहर आईं। फिर पूरे इंटरटेनमेंट टीम के साथ सुप्रिय की मीटिंग हुई। इसके बाद चैनल को आईटीए का बेस्ट चैनल अवार्ड मिलने पर दफ्तर में ही केक मंगवाया गया। केक काटा साहिल जोशी और रुक्मिनी सेन ने। हंसी खुशी के माहौल में ये सब हुआ। जलेबी और फाफड़ा भी मंगवाया गया।

उस वक्त तक चेहरे पर फुल स्माइल लिए रुक्मिनी सेन को देखकर कोई सोच भी नहीं सकता था कि इनके दिमाग में क्या चल रहा है। शाम को उन्होंने फेस बुक पर इस मीटिंग के बारे में लिखा। जिसमें उन्होंने लिखा था कि ये 'कॉर्डियल एंड फ्रेंडली' बातचीत थी, 'नो ऑफेंस'। अगले दिन जब आजतक एचआर से उन्हें कॉल आई कि आपको नोटिस पीरियड सर्व करने की जरूरत नहीं है उसके बाद रुक्मिनी के तेवर बदल गए। कुछ ही घंटों में कार्डियल एंड फ्रेंडली और नो ऑफेंस की बात बदलकर उनकी नजरों में सेक्सुअल हरासमेंट की हो गई। रुक्मिनी ने फेसबुक पर सुप्रिय के खिलाफ भड़ास निकालनी शुरू कर दी। उन्होंने अरुण पुरी को भी मेल किया और उसमें लिखा है कि सुप्रिय ने उनसे क्या-क्या पूछा। अगर रुक्मिनी सेन के उस मेल को सही मान लिया जाए तो भी ये पूरी बातचीत बेहद सामान्य लगती है। और अब जरा उस बातचीत को भी देख लिया जाए, जो रुक्मिनी के मुताबिक हुई थी।

-अच्छा तो आप उस आदमी के नाते नौकरी छोड़ रही हैं.?
-वो रहता कहां है…?
-ओह मैंने उसके बारे में तब जाना जब तुमने अपना फेसबुक स्टेटस बदला था?
-इतने दिनों से तुम इस रिश्ते में हो..?
-क्या तुम उससे शादी करने वाली हो..?

अब आप बताइए कि इसमें कौन सा सेक्सुअल हरासमेंट है। कौन से सवाल से लगता है कि रुक्मिनी जी का हरासमेंट किया गया है। ये तो बहुत ही सामान्य बातचीत है। यहां ध्यान रहे कि ये बात एक मैनेजिंग एडिटर और एडिटर के बीच हो रही थी। वैसे भी न्यूज चैनल में बेहद दोस्ताना माहौल में बातचीत होती है। सुप्रिय तो वैसे भी बेहद सहज संपादक माने जाते हैं। जो दिल में आया, जैसे आया कह देते हैं, पूछ लेते हैं। वैसे भी रुक्मिनी से उनकी पहले भी बातचीत हो चुकी होगी। फेसबुक पर भी रुक्मिनी ने उन्हें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी और सुप्रिय की फेसबुक फ्रेंड बनी थीं, जबकि अपने मेल में वो झूठ बोल रही हैं कि सुप्रिय से उनका कोई एसोसिएशन नहीं था। दस साल से दोनों लोग एक दुसरे को जानते हैं। फिर इस बातचीत को लेकर उन्होंने आसमान सर पर क्यों उठा लिया।

मुंबई में आजतक में काम करने वाले बताते हैं कि सुप्रिय ने रुक्मिनी से यही पूछा था कि कहीं और नौकरी मिल गयी है क्या या फिर शादी करने के लिए नौकरी छोड़ रही हो। ये महज वैसी ही बात थी जो किसी भी कर्मचारी के संस्थान छोड़कर जाते वक्त शिष्टाचार वश उसका बॉस करता है। इस बातचीत और इसके बाद रुक्मिनी के आरोप से ये साफ है कि या तो वो किसी साजिश का हिस्सा बनी हैं या फिर कोई खुंदक निकाल रही हैं। वो इतनी एडवांस हैं कि ब्वायफ्रेंड होने की बात फेसबुक पर अपडेट करती हैं कि आई एम इन रिलेशनशिप। तो फिर उनसे ये पूछ लेना कि शादी करने जा रही हो ब्वायफ्रेंड के साथ… ये कहां से गलत हो गया। एक बात और कि अगर सुप्रिय का ये पूछना उन्हें इतना नागवार गुजरा तो वो वहीं मना कर देतीं कि मैं ऐसे सवाल नहीं सुनना चाहती। आप ऐसे बात मत कीजिए। इस्तीफा दे चुकी थीं फिर कैसा डर, कैसी झिझक..। नहीं रुक्मिनी ने ऐसा नहीं किया, क्योंकि उन्हें फेसबुक के मंच पर इसे प्रोपेगंडा बनाना था।   

रुक्मिनी ये सब पोस्ट करते वक्त ये भूल गईं कि वो ये आरोप सुप्रिय पर तब लगा रही हैं जब वो इस्तीफा दे चुकी हैं, शनिवार को ही उनका इस्तीफा मंजूर हो गया था और मंजूर भी हो गया था। दो दिन बाद सोमवार को उनकी सुप्रिय से बात हुई थी। अब कौन इतना बेवकूफ है जो ये मानेगा कि इस्तीफा देकर चली जाने वाली कुलीग का उसका बॉस इस्तीफे के बाद हरासमेंट कर रहा था। अपनी भड़ास निकालने में रुक्मिनी ने हर मर्यादा ताक पर रख दी। चैनल के मालिक अरुण पुरी के खिलाफ भी उन्होंने असम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। सुप्रिय पर कई साल पहले लगे आरोपों की दुहाई देने लगीं। ये भी नहीं सोचा कि आजतक प्रबंधन ने जब सुप्रिय प्रसाद को दोबारा चैनल में लिया तो ये इस बात का प्रमाण था कि उन पर जो आरोप लगाए गए थे वो किसी साजिश के हिस्सा थे और निराधार भी।

ये टेलीविजन की मायावी दुनिया है। जहां तरह तरह की साजिशें हैं, कहानियां हैं, अंतरकथाएं हैं। झारखंड के छोटे से शहर दुमका से दिल्ली पहुंचे एक शख्स का आजतक जैसे देश के नंबर वन चैनल का हेड बनना कई लोगों की आंख की किरकिरी है। वो शायद ये नहीं जानते हैं कि ये मुकाम सुप्रिय ने अपनी मेहनत, लगन और विजन से बनाया है। जोड़ तोड़ और दुरभिसंधि करके नहीं। दिन रात वो खबरों से उलझे रहते हैं। पर्सनल लाइफ में भी चैनल घुसा रहता है। ऑफिस में रहते हैं तो नजर चैनल पर और यात्रा में हैं तो मोबाइल पर ही टीवी देख लेते हैं। बातचीत में बेहद सहज हैं, हर किसी से बात कर लेते हैं। अब ऐसी शख्सियत के दामन पर किसी औरत का इस तरह कीचड़ उछालना कहां तक जायज है।

औरतों के पक्ष में बहुत सारे कानून हैं, लोग उनकी बातों को बड़ी सहजता से तवज्जो देते हैं। पढ़ा लिखा महिलाओं को लेकर थोड़ा संवेदनशील रहता है।

शील कुमार शुक्ला

शील कुमार शुक्ला

तो क्या किसी को इसका नाजायज फायदा उठाने की छूट मिल जाती है। और सबसे बड़ा सवाल ये कि सुप्रिय पर बेवजह कीचड़ उछालने के पीछे रुक्मिनी का मकसद क्या है, क्या करीब तीन लाख की नौकरी छूट जाने की कुंठा या फिर कोई साजिश। बात सुप्रिय प्रसाद के साथ खड़े होने की ही नहीं, बल्कि चरित्र हनन की ऐसी साजिशों को बेनकाब करने की है।

लेखक शील कुमार शुक्ला वॉयस एंड विजुअल मीडिया एंड एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वे अभियान क्रांति नाम से एक राष्ट्रीय पत्रिका भी निकाल चुके हैं। इन दिनों वे डेली कैंपस न्यूज डाट काम http://dailycampusnews.com के प्रधान संपादक भी हैं। उनसे आप [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं। इस लेख में उनके निजी विचार हैं।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...