उत्तर प्रदेश में एक जगह है इलाहबाद। वहीं से कुछ ही दूरी पर है प्रतापगढ़। वहीं पर है कुंडा विधान सभा, जिसका 403 विधान सभा सीटों वाली यूपी विधान सभा में 246 वां नंबर है और वहां पर होने वाले जुल्म का उत्तर प्रदेश में पहला नंबर है। वहां पर राजा भैया नाम का एक जनप्रतिनिधि हैं, जिसकी जुल्म की दास्तां हर खास ओ आम के मुंह से सुनी जा सकती है। वहां पर न कानून का राज चलता है, न नैतिकता का बल्कि शासन और प्रशासन के नुमाईंदे इसके सामने भीगी बिल्ली बन जाते हैं। वहां पर न कोई आस्था है, ना बड़े की इज्जत न छोटों से मोहब्बत है।
कुंडा के गली कूचे इनके जुल्म की दास्तां बयां करते हैं। राजा के तालाब अपने आप चीख चीख कर कहते हैं कि इसे सजा क्यों नहीं मिलती जो अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को बंद कर देता है, जो आवाज उठाने वालों को उस तालाब के हवाले कर देता है जिसमें घड़ियाल रहते हैं। तालाब में फेंके जाने वाला जरूरी नहीं कि कोई आम इंसान ही हो। कोई हम जैसा खाना बदोश पत्रकार भी हो सकता है, जो सर पर 24 घंटे कफन बांध कर निकलता है। राजा भैया का जुर्म की दुनिया से बहुत गहरा रिश्ता रहा है। जुर्म और राजा भैया एक दूसरे के हमराह हैं। सवाल केवल राजा का ही नहीं है बल्कि इनके गुर्गे भी इनके नाम पर लोगों को धमकाते रहे हैं, उनपर जुल्म करते रहे हैं। और ये वे ही उप्रदवी हैं जिन्होंने आज से एक साल पहले लखनऊ के शपथ ग्रहण समारोह में जमकर उत्पात मचाया था।
जुल्म की दुनिया के राजा रघुराज प्रताप सिंह 1993 से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं। वे इसी सीट यानी कुंडा से लगातार पांचवी बार जीते हैं। प्रदेश की मौजूदा सरकार सपा और पूर्व वाली भाजपा सरकार चाहे कल्याण सिंह की हुकूमत हो या राम प्रकाश गुप्ता सरकार या फिर राजनाथ सिंह की सरकार, हर मोर्चे पर इनका बचाव करती नजर आयी है। ये कोई पहला मामला नहीं जिसमें राजा पर किसी प्रशासनिक अफसर के कत्ल का आरोप लगा हो, बल्कि इससे पहले उनके घर पर छापा मारने वाले पुलिस उपाधीक्षक राम शिरोमणि पांडे की हत्या करवाने का आरोप है। पांडे की संदेहास्पद परिस्थिति में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) अभी भी इस मामले की जांच कर रही है।
2010 में पंचायत चुनाव के दौरान कुंडा में हुई हिंसा में एक उम्मीदवार को जान से मारने के प्रयास के आरोप में मुख्यमंत्री मायावती ने उन्हें जेल में डलवाया। करीब एक साल तक राजा भैया जेल में बंद रहे। अगर ये कह दिया जाये कि मायावती ही एक ऐसी मुख्यमंत्री हुईं हैं जिन्होंने राजा की जुर्म की दुनिया में एक हल्की सी सुनामी लाई है, कि तो कोई बेमानी न होगी। इसकी वजह से एकतरफा चुनाव जीतने वाला राजा भैया बसपा उम्मीदवार से मात्र 30 हजार के अंतर से चुनाव जीत पाता है। ये सब उनके जेल जाने की वजह से हुआ लोगों के जहनों में बैठा हुआ खौफ निकल रहा है। उनके सब्र का पैमाना भर चुका है जो अब सिर्फ छलकना बाकी है।
राजा के जुल्म का सूरज अब डूबने वाला है आज यूपी के हर नागरिक की अंतर आत्मा की सिर्फ यही आवाज है कि राजा को जेल भेजो, जब उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्जा हो चुकी है तो उन्हें जेल क्यों नहीं भेजा जा रहा? और याद रखना इस अहद के यजीदों आवाज ऐ खलक नक्कराऐ खुदा होती है। मैंने पिछले चार दिन से इसके चेहरे से नकाब हटाने की कोशिश की है, जो इनके गुर्गों को नागवार गुजरी है। वे कल से ही मेरे मोबाइल पर फोन करके एसएमएस करके जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। अंजाम भुगतने की, घर जला देने की धमकी दे रहे हैं। लगता है वे भी कलम की ताकत को महसूस करने लगे हैं। जिस तरह हाथी को चींटी से डर लगता है उसी तरह यजीद ऐ वक्त को भी कलम से डर लगने है। हो सकता है मैं भी मार दिया जाऊं, कत्ल कर दिया जाऊं या मेरा भी वही अंजाम हो जो मुझ से पहले लोगों का हुआ है। मगर आप लोगों से मिलने वाले समर्थन ने मुझे और ताकत दे दी है, सच लिखने की ताकत, जालिम को उसके मुंह पर जालिम कहने की ताकत। किसी शायर का शेर मेरे मुंह से बरबस ही निकल पड़ता है-
इतना मकतल में फिर सन्नाटा नहीं होगा
जो बात हकीकत हो हकीकत ही कही जाये।
मुझे मालूम है गरीबों का लहू सस्ता तो होता है, मगर वह पतला नहीं होता वह लहू जम जाता है। तारीख को उठाकर देखो हर दौर में राजा जैसे यजीद हुऐ हैं लेकिन उनका खात्मा तभी हुआ है जब हर खास ओ आम ने आवाज उठाई है। और धमकी देने वालों से बस यही कहना है कि –
हर सितम लिख जाऊंगा हर जुल्म लिख जाऊंगा
कातिलों के शहर में जो कुछ हुआ लिख जाऊंगा।
लेखक वसीम अकरम पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.




