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थप्‍पड़ की कीमत पचास हजार

: इंदौरी वकील ने सिखाया पार्षद पति को सबक : इंदौर। इंदौर के एक वकील महाशय पूर्व पार्षद पति को सबक सिखाते हुए राजीनामा करने को तैयार तो हुए किंतु इस शर्त पर कि 50 हजार की राशि हर्जाने के तौर पर दी जाएं यही नहीं उन्होंने यह राशि हाईकोर्ट व जिला बार एसोसिएशन को आधी-आधी दान करवा दी। माजरा इस प्रकार है कि 25 जुलाई 2008 को एडवोकेट रोमेश दवे अपने चार पहिया वाहन से आरएनटी मार्ग पर ट्राफिक प्‍वाइंट पर खड़े थे चूंकि उस समय रेड बत्ती थी इसलिए वे रूके थे। तभी उनके पीछे एक टाटा गाड़ी में सवार पूर्व पार्षद संध्या अजमेरा के पति सुनील अजमेरा पहुंचे और आगे निकलने की बात पर तू-तू, मैं-मैं करने लगे।

: इंदौरी वकील ने सिखाया पार्षद पति को सबक : इंदौर। इंदौर के एक वकील महाशय पूर्व पार्षद पति को सबक सिखाते हुए राजीनामा करने को तैयार तो हुए किंतु इस शर्त पर कि 50 हजार की राशि हर्जाने के तौर पर दी जाएं यही नहीं उन्होंने यह राशि हाईकोर्ट व जिला बार एसोसिएशन को आधी-आधी दान करवा दी। माजरा इस प्रकार है कि 25 जुलाई 2008 को एडवोकेट रोमेश दवे अपने चार पहिया वाहन से आरएनटी मार्ग पर ट्राफिक प्‍वाइंट पर खड़े थे चूंकि उस समय रेड बत्ती थी इसलिए वे रूके थे। तभी उनके पीछे एक टाटा गाड़ी में सवार पूर्व पार्षद संध्या अजमेरा के पति सुनील अजमेरा पहुंचे और आगे निकलने की बात पर तू-तू, मैं-मैं करने लगे।

मामला तब बिगड़ गया जब अजमेरा ने श्री दवे को थप्पड़ रसीद कर दिए और मामला तुकोगंज थाने जा पहुंचा जहां पुलिस ने अजमेरा के खिलाफ आईपीसी की धारा 294, 506 (बी), 341 व 323 में केस दर्ज कर लिया किंतु आरोपी के प्रभावशाली व्यक्ति होने से उसकी गिरफ्तारी नहीं की। लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होन पर बार एसोसिएशन ने एक जनहित याचिका दायर की थी जिस पर जबलपुर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद पुलिस को उचित कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने अजमेरा को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ निचली अदालत में चालान पेश किया। मामले में दिसंबर 2010 से गवाही भी शुरू हो गई थी। इसी बीच आरोपी पक्ष ने राजीनामे की कोशिशें की तो श्री दवे ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव अमित उपाध्याय व सीनियर एडवोकेट शेखर भार्गव से मशविरा किया। इसके बाद इंदौर बार एसोसिएशन के सचिव गोपाल कचोलिया से भी दवे ने चर्चा की और सशर्त केस वापस लेने की मंशा जताई। इसके बाद अजमेरा को ऑफर दिया गया कि यदि वे 25-25 हजार की राशि वकीलों के कल्याणार्थ इंदौर व हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में अलग-अलग जमा कराएं और उसकी पावती पेश करे तो मामले में समझौता किया जा सकता है। अजमेरा ने ऐसा ही किया और 24 नवंबर को स्पेशल मजिस्ट्रेट डा. शुभ्रासिंह की अदालत में राजीनामे की अर्जी पेश कर दी, अब 28 नवंबर को इस राजीनामे पर आदेश होगा। बहरहाल एक वकील द्वारा पार्षद पति को सबक सिखाने और हर्जाने के तौर पर मिली राशि वकीलों के हित में दान किए जाने के निर्णय की विधिजगत में भूरि-भूरि सराहना हो रही है। साभार : पीपुल्‍स समाचार

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