: पत्रकारों के पैसे खा कर फिर लांच का ढकोसला : मुम्बई में हिन्दी अखबार 'दबंग दुनिया' लांच करने का एक छलावा करने और नियुक्त किये गए पत्रकारों की पेमेंट हजम करने के बाद जब पत्रकार इस अखबार को छोड़ कर चले गए तो दूसरी बार फिर इसे लांच करने का ढकोसला किया जा रहा है और इस बार नए पत्रकारों को लेकर उन्हें फिर से चूना लगाने की तैयारी है…
पिछले मई महीने में दबंग दुनिया के मालिक किशोर वाधवानी ने अपने सेवादार योगेश नारायण मिश्रा और नीलकंठ पारटकर को मुम्बई में तैनात किया था ताकि अखबार बाज़ार में हलचल पैदा की जाए.. नीलकंठ पारटकर को संपादक बनाया था जिन्होंने एक टीम बनाई थी… इस टीम से तीन महीने बेमतलब का काम कराया गया… पत्रकार अपने पैसों से तीन महीने दफ्तर आते रहे और मूर्ख बनते रहे…
सेवादार योगेश नारायण और नीलकंठ सबको आश्वासन देते रहे कि अखबार शुरू होगा तब पैसे मिलेंगे… मगर न अखबार शुरू हुआ न पैसा मिला.. अंतत: सबने अखबार छोड़ना ही ठीक समझा… जब सब छोड़ गए तो मालिक तथा संपादक को चैन मिला कि अब उन्हें पैसा नहीं देना पड़ेगा, लिहाजा नए सिरे से अब फिर टीम बनाई जा रही है… पुराने पत्रकारों का पैसा डकार लेने के बाद नए पत्रकारों के पैसे डकारने की तैयारी है… अब यह खेल कितना कारगर साबित होता है ये आने वाला समय बताएगा किन्तु पुराने कुछ पत्रकारों ने दबंग दुनिया के इस ठगी कार्यक्रम को उजागर करने की ठान ली है… वे समय का इन्तजार कर रहे हैं.. उन्होंने अपील की है कि पाठक तथा पत्रकार ऐसे अखबारों से सावधान रहें..
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





