वरिष्ठ पत्रकार और भूतपूर्व सांसद राजनाथ सिंह सूर्य का कहना है कि दयानंद पांडेय नामक लखनऊ के पत्रकार को एक जमाने में उन्होंने स्वतंत्र भारत अखबार से निकाल दिया था, इसलिए दयानंद को जब भी मौका मिलता है, अपनी भड़ास निकालने लगते हैं. राजनाथ सिंह सूर्य के मुताबिक- ''बात वर्ष 1990 की है. तब मैं स्वतंत्र भारत लखनऊ का संपादक हुआ करता था. दयानंद पाडंये सब एडिटर के रूप में काम करते थे. इन पर चरित्र से जुड़े कुछ आरोप लगाए गए. मैंने इसकी जांच स्वतंत्र भारत के कानपुर एडिशन के एडिटर त्रिपाठी जी को सौंप दी.
त्रिपाठी जी ने जांच कर जो रिपोर्ट दी उसमें दयानंद पांडेय पर लगे आरोपों को सच पाया गया. तब जांच रिपोर्ट के आधार पर दयानंद पांडेय की सेवाएं समाप्त करनी पड़ी. मैं यहां यह नहीं बताऊंगा कि दयानंद पांडेय पर किस किस्म के चारित्रिक आरोप थे, क्योंकि ऐसा करना गलत होगा और यह शुचिता के दायरे में नहीं आता. दयानंद भले जो भी कहें लिखें, सच तो यही है कि नौकरी से हटाए जाने के कारण उनके मन में मेरे प्रति कोई भाव पैदा हो गया होगा, कोई खुन्नस पाल लिया होगा जिसके कारण बदले की भावना से वह अनाप शनाप बक रहे हैं.''





