मीडिया की दुनिया अजीब है. जो बेकार हो जाता है, वो बेचारों के हाथ चला जाता है. यही हाल विनोद कापड़ी और सतीश के. सिंह का है. दस साल पहले ये लोग कभी एक साथ जी न्यूज में हुआ करते थे. आज मजबूरी इन्हें फिर एक नए चैनल में एक साथ एक मंच पर ले आई है. मजबूरी कामन है. पेट की मजबूरी. लाखों की सेलरी की मजबूरी. घर चलाने की मजबूरी.
जाहिर है कि ये कितना व किस तरह की पत्रकारिता करेंगे, लेकिन शब्द हैं, शब्दों का क्या. लोग कुछ भी बोले दिखाए बताए सुनाए जा रहे हैं और बेरोजगारों की भीड़ ऐसी, बेचारों की भीड़ ऐसी की वाह वाह किए जा रही है. विनोद कापड़ी ने अपने फेसबुक वॉल पर पुराने दिनों के किसी जादू का हवाला देते हुए फिर से एक नया ड्रामा शुरू होने का डमरू बजाया है. विनोद कापड़ी के दंश से अभी फिलहाल रजत शर्मा निपट रहे हैं और इंडिया टीवी को पटरी पर लाने में लगे हुए हैं.
देखना है कि न्यूज एक्सप्रेस का क्या होता है. ताजी सूचना के मुताबिक विनोद कापड़ी के खिलाफ न्यूज एक्सप्रेस के कुछ वरिष्ठों ने विद्रोह का बिगुल बजा दिया है. ये विनोद कापड़ी के एफबी वॉल पर प्रकाशित उनका स्टेटस है, पढ़ें और आनंद लें..
Vinod Kapri : 10 साल । पूरे 10 साल बाद मैं और Satish K Singh एक साथ, एक मकसद के लिए काम करेंगे । यूँ तो हम दोनो ने साल 1995 में साथ ही टीवी में क़दम रखा। चैनल था ज़ी टीवी। लेकिन असली परीक्षा की घड़ी आई 2002 में जब ज़ी न्यूज़ में सतीश जी को Input और मुझे Output एडिटर बना दिया गया। जानने वाले जानते हैं कि उस दौरान क्या क्या नहीं हुआ था । मेरे हिसाब से लक्ष्मी जी के समय में वो ज़ी न्यूज़ का सबसे शानदार दौर था। सतीश जी जैसी न्यूज़ सेंस वाले संपादक टीवी में बहुत कम हैं। आज उन ऐतिहासिक पलो को याद करते हुए हम दोनो फिर 10 साल बाद वर्तमान में खड़े हैं। क्या पता भविष्य फिर से कुछ इतिहास बनाने का अवसर दे रहा है !! Fingers Crossed !! अभी ज्यादा नहीं कह पाऊंगा लेकिन संभव है कि इस बार सतीश जी आपको नए अंदाज़ में नज़र आएं।
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