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‘दाल-रोटी’ योजना और बुकलेट से भास्कर मैनेजमेंट का पेट जरूर भर गया

: एमपी प्रिंटर्स नोएडा में छपी लाखों की बुकलेट : चंडीगढ़ । दाल-रोटी, यही नाम है हरियाणा सरकार की उस योजना का, जो केंद्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के अंतर्गत हरियाणा में लागू की गई है। यह चुनावी साल है, इसलिए योजना को शुरू करने के लिए सरकार ने राजीव गांधी के जन्मदिवस को चुना गया है। इस चुनावी दाल-रोटी के जरिए सरकार का इरादा प्रदेश के सवा करोड़ से ज्यादा लोगों के पेट भरने का है। हालांकि अभी इसमें समय लगेगा यानि लोगों को दाल-रोटी के लिए इंतजार करना पड़ेगा, पर इस योजना से दैनिक भास्कर का पेट जरूर भर गया है। यह बात शायद इतनी आसानी से हजम न हो, लेकिन यह सच्चाई है।

: एमपी प्रिंटर्स नोएडा में छपी लाखों की बुकलेट : चंडीगढ़ । दाल-रोटी, यही नाम है हरियाणा सरकार की उस योजना का, जो केंद्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के अंतर्गत हरियाणा में लागू की गई है। यह चुनावी साल है, इसलिए योजना को शुरू करने के लिए सरकार ने राजीव गांधी के जन्मदिवस को चुना गया है। इस चुनावी दाल-रोटी के जरिए सरकार का इरादा प्रदेश के सवा करोड़ से ज्यादा लोगों के पेट भरने का है। हालांकि अभी इसमें समय लगेगा यानि लोगों को दाल-रोटी के लिए इंतजार करना पड़ेगा, पर इस योजना से दैनिक भास्कर का पेट जरूर भर गया है। यह बात शायद इतनी आसानी से हजम न हो, लेकिन यह सच्चाई है।

दरअसल हरियाणा सरकार ने इस योजना के बारे में प्रदेश के लोगों को जानकारी देने के लिए जो बुकलैट छपवाई है, वह भास्कर ग्रुप की नोएडा स्थित प्रेस एमपी प्रिंटर्स में छपी है। अब इस बात की जानकारी तो सरकार ही दे सकती है कि कितनी बुकलैट छपी हैं और कितने का भुगतान हुआ है या फिर होना है। योजना प्रदेश स्तर की है और सवा करोड़ से ज्यादा लोगों को जानकारी देनी है तो बुकलैट भी 100 या 200 नहीं छपी होंगी। ऐसे में मामला लाखों का है या फिर संख्या करोड़ तक भी पहुंच सकती है। इसलिए भास्कर प्रबंधन भी सरकार की योजना का बढ़-चढ़ कर प्रयास कर रहा है। अभी योजना का प्रचार-प्रसार जितना ज्यादा होगा, उतनी ही भास्कर की सेहत भी ठीक रहेगी।

दरअसल भास्कर को फायदा पहुंचाने के पीछे सरकार की यह मंशा रही होगी कि इसके बहाने वह सरकार की नीतियों और मुख्यमंत्री हुड्डा का प्रचार-प्रसार करता रहेगा, विरोधियों के बारे में कम छापेगा। इसलिए सरकार का हाजमा भी ठीक रहेगा और भास्कर की सेहत पर भी असर नहीं पड़ेगा। अभी इस बारे में दूसरे अखबारों को शायद जानकारी न हो, जब होगी तो उनकी सेहत बिगड़ना लाजिमी है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में हरियाणा सरकार को दूसरे अखबार समूहों का पेट भरने के लिए दाल-रोटी का बजट बढ़ाना पड़ सकता है।

दीपक खोखर की रिपोर्ट.

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