फेसबुक पर कुछ जोरदार पढ़ने को मिल जाता है. अजित राय और दृश्यांतर मैग्जीन को लेकर शुरू हुई एक बहस में दिलीप मंडल (इंडिया टुडे वाले) ने ओम थानवी (जनसत्ता वाले) को समझाया कि संपादन के लिए किसी विशेष प्रतिभा की जरूरत नहीं होती. इस पर ओम थानवी ने चुटकी ली कि पत्रकारिता में आपका यह कथन किसी सूत्र-वाक्य की मानिंद मशहूर हो सकता है. लीजिए, उन कमेंट्स को आप भी पढ़िए.
-एडिटर, भड़ास4मीडिया
Dilip C Mandal संपादन के लिए किसी विशेष प्रतिभा की जरूरत नहीं होती. स्कूल में नौकरी करने और बहुत ज्यादा सिनमा देखना कोई ऐसा डिसएडवांटेज नहीं है, जिसकी वजह से कोई अच्छा संपादक न बन पाए. मैं तो व्यक्ति की जगह उस प्रोडक्ट को देखूंगा, जिसे वह संपादक के नाते प्रोड्यूश कर रहा है. मेरी समीक्षा के दायरे में वह प्रोडक्ट ही है.
Om Thanvi पत्रकारिता में आपका यह कथन किसी सूत्र-वाक्य की मानिंद मशहूर हो सकता है कि "संपादन के लिए किसी विशेष प्रतिभा की जरूरत नहीं होती"! मेरा मानना है कि किसी पत्रिका के संपादक के पास दो चीजों की प्रतिभा अनिवार्य है: भाषा की और रचना-चयन के विवेक की। अगर पत्रिका साहित्य और कलाओं की है तो इन विषयों का सम्यक अध्ययन और इन क्षेत्रों में पैठ या स्वीकार्यता की भी जरूरत होगी। खयाल करें, पत्रिका में करदाता का धन फूँका जा रहा है। …अजित राय की बाकी प्रतिभाओं की चर्चा छोड़कर इतना अपने अनुभव से बता दूँ कि उनकी भाषा बेहद खराब है, उसे मैंने खुद बीसियों बार सुधारा है। वे दूसरों का संपादन क्या करेंगे?
Dilip C Mandal उनकी संपादन क्षमता हम उनकी पत्रिका के पन्नों पर देखेंगे.
Om Thanvi इंशाअल्लाह।






