Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal

दिल्ली

दिल्ली में एक और बच्ची की निर्मम हत्या, पुलिस ने पांच दिन तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की

दिल्ली। दिसंबर गैंगरेप की बर्बर घटना, गांधीनगर में बच्ची के साथ जघन्य अपराध और ऐसे तमाम मामलों के बाद पुलिस की तरफ से दावा किया जा रहा है कि अब पुलिसकर्मियों को स्त्रियों और बच्चियों के प्रति होने वाले अपराधों के मामले में ‘संवेदनशील’ बनाया जा रहा है और अब हम जल्द से जल्द कार्रवाई करते हैं।

 

दिल्ली। दिसंबर गैंगरेप की बर्बर घटना, गांधीनगर में बच्ची के साथ जघन्य अपराध और ऐसे तमाम मामलों के बाद पुलिस की तरफ से दावा किया जा रहा है कि अब पुलिसकर्मियों को स्त्रियों और बच्चियों के प्रति होने वाले अपराधों के मामले में ‘संवेदनशील’ बनाया जा रहा है और अब हम जल्द से जल्द कार्रवाई करते हैं।

 

पिछले 13 जुलाई को बाहरी दिल्ली के शाहबाद डेयरी इलाके के सी ब्लाक में एक 6 वर्षीय बच्ची की छाती और सिर पर भारी चीज से लगातार वार करके निर्मम हत्या करने का पता चलने पर भी थाना शाहाबाद डेयरी के पुलिसकर्मी इस संबंध में 5 दिन तक एफ.आई.आर. दर्ज करने को टालते रहे। बाद में स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों द्वारा दबाव डालने और थाने पर हंगामा करने के बाद पांच दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। अब भी पुलिस का रवैया टालमटोल वाला ही है, थाने में इस बाबत पूछने पर यही जवाब मिलता है अभी जांच होगी तब कुछ बताया जाएगा।

13 जुलाई की शाम 5 से 6 के बीच मकान नं. सी/332 के निवासी मोहम्मद रहीस को किसी ने बताया कि उसकी बच्ची मुस्कान पास के एक खाली मकान के बाथरूम में खून से लथपथ पड़ी है। वह तुरंत वहां गया और बच्ची को उठाकर अस्पताल ले गया, जहां अगले दिन उसकी मौत हो गयी। पुलिस की असंवेदनशीलता देखिए कि बाद में रहीस द्वारा अनुरोध करने पर भी थाने में एफ.आई.आर. दर्ज नहीं की गई। 15 और 16 तारीख तक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार करने को कहा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अगले दिन रहीस अपने रिश्तेदारों के साथ थाने पहुंचे तो थाना प्रभारी से मुलाकात ही नहीं हुई और शाम को आने के लिए कहा गया। 17 तारीख की शाम को मुलाकात का समय देने के बाद भी थाना प्रभारी संजीव कुमार उपलब्ध नहीं हुए। बाद में रहीस का परिवार, उनके कुछ रिश्तेदार आसपड़ोस के लोगों, आर.डब्ल्यू.ए. के देवेंद्र कुमार, स्थानीय निवासी नसीमा, शहीद भगतसिंह पुस्तकालय के कुछ कार्यकर्ताओं के साथ दोबारा थाने पहुंचा तो थाना प्रभारी ने पहले टालू रवैया अपनाया। सामाजिक कार्यकर्ताओं से उनका कहना था कि आप बीच में बोलने वाले कौन होते हैं, या कि जांच होगी तब रिपोर्ट दर्ज होगी, फिर कहा कि आप लोग ज्यादा समझदार हैं तो बताइए कि किस धारा में प्राथमिकी दर्ज की जाए, आदि-आदि।

यह सब सुनकर गमजदा परिवार के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने वहां नारे लगाना शुरू कर दिया। इसके बाद थोड़ा दबाव महसूस करने पर संजीव कुमार ने आई.ओ. हरेंद्र से कहा कि वह परिवार वालों के बयान सादे कागज पर दर्ज कर ले। इस पर परिवार ने जोर देकर कहा कि आप लोग पांच दिन से टाल रहे हैं और फिर से सादे कागज पर बयान दर्ज करने की बात कह रहे हैं, हम बच्ची की मौत के सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं और आप प्राथमिकी तक दर्ज नहीं कर रहे हैं। हम प्राथमिकी दर्ज कराए बिना नहीं जाएंगे। बाद में जब थाने पर काफी हंगामा हुआ तो थाना प्रभारी ने अगले दिन आने को कहा। अगले दिन रहीस और उनके परिवार के कुछ लोग थाने गए तो दो बार चक्कर कटाने के बाद थानेदार ने कहा कि शाम को रिपोर्ट दर्ज कर ली जाएगी। तब कहीं जाकर देर रात को प्राथमिकी दर्ज की गई। अब आशंका है कि जांच के नाम पर कुछ खानापूर्ति करके मामले को दबा दिया जाएगा। इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। हमारा यह कहना है कि जब इतने संवेदनशील मुद्दे पर देश की जनता सड़कों पर है उसके बावजूद पुलिस का रवैया असंवेदनशील बना हुआ है। पुलिस का यही रवैया रहेगा तो ऐसी अमानवीय घटनाओं में कमी नहीं आएगी। हमारा अनुरोध है कि इस बर्बर हत्या की जांच जल्द से जल्द पूरी कराके अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

संदीप
कृते,
नौजवान भारत सभा
एवं
स्त्री मज़दूर संगठन
उत्तर पश्चिमी क्षेत्र

प्रेस विज्ञप्ति

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadas … मोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia  …

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...