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दिल्ली में एचटी बिल्डिंग के सामने एचटी के खिलाफ नौ साल से धरने पर बैठा शख्स कौन है?

Yashwant Singh : किसी साथी ने मुझे ये संदेश भेजा है… 'यशवंत भाई, कनाट प्लेस में कस्तूरबा गाँधी मार्ग पर हिन्दुस्तान टाइम्स ऑफिस बिल्डिंग के ठीक सामने एक बुजुर्ग इन्सान एक टेंट लगा के बैठे रहते हैं. पिछले छह साल से मैं देख रहा हूं. उनके टेंट पर लगे बैनर से पता चलता है कि सन 2004 से हिंदुस्तान टाइम्स के खिलाफ धरने पर बैठे हैं. 2004 से 2013 तक का समय बीते लगभग 9 साल का हो गया.. लेकिन कभी किसी पोर्टल या सोशल मीडिया या कहीं भी उनके इस अनशन का जिक्र नहीं मिला.. माजरा क्या है? शायद आप को पता हो!'

Yashwant Singh : किसी साथी ने मुझे ये संदेश भेजा है… 'यशवंत भाई, कनाट प्लेस में कस्तूरबा गाँधी मार्ग पर हिन्दुस्तान टाइम्स ऑफिस बिल्डिंग के ठीक सामने एक बुजुर्ग इन्सान एक टेंट लगा के बैठे रहते हैं. पिछले छह साल से मैं देख रहा हूं. उनके टेंट पर लगे बैनर से पता चलता है कि सन 2004 से हिंदुस्तान टाइम्स के खिलाफ धरने पर बैठे हैं. 2004 से 2013 तक का समय बीते लगभग 9 साल का हो गया.. लेकिन कभी किसी पोर्टल या सोशल मीडिया या कहीं भी उनके इस अनशन का जिक्र नहीं मिला.. माजरा क्या है? शायद आप को पता हो!'

उपरोक्त संदेश को पढ़कर मुझे वाकई लग रहा है कि हम सब सोशल मीडिया वाले, वेब-ब्लाग वाले इतना सीना ताने घूमते हैं कि जो कोई नहीं लिखता-छापता, वो हम लोग लिखते-छापते हैं पर उपरोक्त मामले में तो हम लोगों की रिपोर्टिंग शून्य है. Vivek Singh जी, कल जाइए और जिनका जिक्र उपरोक्त संदेश में है, उनसे मिलिए. उनसे विस्तार से बात करिए. एक रिपोर्ट बनाइए और भड़ास को भेजिए… भड़ास के साथ जुड़कर आप पत्रकारिता की ट्रेनिंग ले रहे हैं तो इस काम को आप अपनी ट्रेनिंग का पार्ट समझिए…

साथ ही, कोई अन्य सोशल मीडिया का साथी वहां जाना चाहे तो जरूर जाए.. क्योंकि पत्रकारिता करने या सरोकारी होने के लिए किसी खास ट्रेनिंग की नहीं, बल्कि आपकी संवेदना, सोच, जुनून और साहस के सम्मिलित पहल की जरूरत होती है. वरना लोग डिग्री डिप्लोमा लेने के बावजूद न शुद्ध लिख पाते हैं और न अपनी पहल पर एक अच्छी रिपोर्ट तैयार कर पाते हैं… और, ढेर सारे लोग डिग्री डिप्लोमा लेकर टीआरपी की अंधी दौड़ में या मालिक के हिसाब से खबर लिखने में जिंदगी गुजार देते हैं और आखिर में उन्हें पता चलता है कि उन्होंने पत्रकारिता नहीं बल्कि परिवार व खुद को पालने के लिए पेटकारिता की है…

इसलिए ऐसे मसले, मुद्दे जहां दिखें, वहीं बैठ जाओ, जूझ जाओ, पूछो, जानो और लिखो… शेयर करो, भेजो, मेल करो, फारवर्ड करो… यही फंडा है पत्रकारिता का….

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


भड़ास तक अपने विचार, रिपोर्ट, सूचनाएं, जानकारी, खबर [email protected] पर मेल करके पहुंचा सकते हैं.

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