: संपादकीय कार्यालय का उद्घाटन हुआ : उत्तराखण्ड के सवालों पर केंद्रित मासिक पत्रिका ‘कर्मभूमि संवाद’ शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रही है। कल १३ फरवरी २०१३ को पत्रिका के संपादकीय कार्यालय का उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के सरोकारों से संबंध रखने वाले कई प्रतिष्ठित लोगों ने शिरकत की।
समारोह में उत्तराखण्ड की पूर्व सरकार में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त पूरन चंद्र नैलवाल, हिंदी अकादमी दिल्ली के सचिव हरिसुमन बिष्ट, एनडीटीवी से संबद्ध वरिष्ठ पत्रकार सुशील बहुगुणा, पहली कुमाउंनी फिल्म ‘मेघा आ’ के निर्देशक जीवन सिंह बिष्ट, नेशनल दुनिया से संबद्ध वरिष्ठ पत्रकार केवल तिवारी, महेंद्र सिंह बनेशी, सतेंद्र त्रिपाठी, त्रिलोक रावत, पहाड़ के सवालों पर मुखर रहने वाले दिनेश जोशी, शिवचरण मुण्डेपी, दयाल पांडे, प्रेम सुंदरियाल, प्रदीप बेदवाल, कुमाउंनी कवि पूरन कांडपाल, दैनिक भास्कर से संबद्ध अलछेंद्र नेगी, श्यामलाल शर्मा, एडवोकेट अजय जोशी, न्यूज एक्सप्रेस से जुड़े अजय ढौंढियाल, गढ़वाल हितैषिणी सभा के राणाजी, पैसेफिक मॉल के जनरल मैनेजर बीएस रावत समेत अनेक लोग उपस्थित थे।
उत्तराखण्ड के प्रतिष्ठित पत्रकार चारु तिवारी के संपादन में यह पत्रिका निकलेगी। चारु तिवारी इससे पहले उत्तराखण्ड की प्रमुख पत्रिका ‘जनपक्ष आजकल’ के कार्यकारी संपादक रहे हैं। उससे पहले वे कई महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं से संबद्ध रहे हैं। अपनी धारदार लेखनी से वे उत्तराखण्ड के सवालों को उठाते रहे हैं। जनांदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। पत्रिका के प्रकाशक-मालिक राजेंद्र रौतेला हैं। उत्तराखण्ड के जाने-माने साहित्यकार क्षितिज शर्मा पत्रिका के एसोसिएट एडिटर हैं। हिंदी साहित्य जगत में उनकी कहानियां चर्चित रही हैं। उनके अलावा ‘कर्मभूमि संवाद’ में महेश पपनै, प्रेमा नेगी और दिलीप जीना भी जुड़ गये हैं।
उद्घाटन समारोह का शुभारंभ करते हुए पत्रिका के संपादक चारु तिवारी ने बताया कि पत्रिका का नाम कर्मभूमि संवाद रखने की प्रेरणा आजादी के समय में उत्तराखण्ड के प्रमुख और जुझारू पत्र रहे कर्मभूमि से मिली। कर्मभूमि उत्तराखण्ड के सवालों को प्रमुखता से उठाता था और लोगों की चेतना जगाने का काम करता था। पत्रिका के बारे में उन्होंने बताया कि यह उत्तराखण्ड के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, साहित्यिक विषयों पर केंद्रित होगी। इसके अलावा देश-विदेश की खबरों और साहित्य को विशेष स्थान दिया जायेगा। पत्रिका के सभी ७२ पृष्ठ रंगीन होंगे।
‘कर्मभूमि संवाद’ की भूमिका को आज की युवा पीढ़ी भी मानती है। इसी की मिसाल हैं युवा इंजीनियर राजेंद्र रौतेला। प्रकाशक-मालिक राजेंद्र रौतेला ने इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पत्रिका को प्रकाशित करने का दायित्व उठाया है। उद्घाटन समारोह में आये लोगों ने कर्मभूमि नाम की सार्थकता सिद्ध करने और चुनौतियों को स्वीकारने के लिए शुभकामनायें दीं और कहा कि यह पत्रिका उत्तराखण्ड के सवालों-सरोकारों को उठाने वाली प्रमुख पत्रिका बनकर उभरे।






