तिब्बती धर्मगुरु 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे को विदेशी करेंसी प्रकरण में राहत मिल गई है। राज्य सरकार ने अदालत में विचाराधीन मामले में करमापा का नाम हटाने की सिफारिश की है। अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं, लेकिन अब चार्जशीट से करमापा का नाम हट जाएगा। इस प्रकरण में करमापा समेत कुल दस लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिनमें एक के.पी. भारद्वाज भी शामिल हैं।
के.पी. भारद्वाज ‘हिमाचल दस्तक’ के चेयरमैन हैं। ‘हिमाचल दस्तक’ दैनिक अखबार है, जो 5 मई से प्रारम्भ होने जा रहा है। विदेशी करेंसी प्रकरण के कारण ‘हिमाचल दस्तक’ का प्रकाशन लम्बित हो गया था। के.पी. भारद्वाज इस प्रकरण में काफी समय तक जेल में बंद रहे थे। आजकल जमानत पर बाहर हैं और अखबार लाँचिग में व्यस्त हैं। के.पी. भारद्वाज के खिलाफ 26 जनवरी 2011 को मामला दर्ज हुआ था। उन्होंने करमापा को जमीन बेची। एक करोड़ रुपए बोरी में भरकर दिल्ली से धर्मशाला ले जा रहे थे। ऊना जिला के मेहतपुर बार्डर पर यह धनराशि पकड़ी गई तथा बाद में के.पी. भारद्वाज के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
के.पी. भारद्वाज लम्बे समय तक ‘दिव्य हिमाचल’ अखबार के एमडी रह चुके हैं। करीब तीन-चार साल पहले ‘दिव्य हिमाचल’ के चेयरमैन भानु धमीजा के साथ मतभेद हो गए तो ‘दिव्य हिमाचल’ छोड़कर अपना अखबार निकालने की योजना पर काम शुरू कर दिया। लेकिन इसी बीच करमापा विदेशी करेंसी प्रकरण में उलझ गए। जेल से छूटने के बाद भारद्वाज ने अखबार निकालने की मंशा को दोबारा अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है।
प्रदेश के अखबारी जगत में आम चर्चा है कि के.पी. भारद्वाज की अखबार ‘हिमाचल दस्तक’ का मुख्य उद्देश्य भानु धमीजा की अखबार ‘दिव्य हिमाचल’ को नुकसान पहुंचाना ही है। दिव्य हिमाचल ने प्रदेश में पांव जमा लिए हैं। नए अखबार ‘हिमाचल दस्तक’ में ‘दिव्य हिमाचल’ के कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जा रही है और दोगुना वेतन देकर ‘दिव्य हिमाचल’ में तोड़फोड़ चल रही है। बहरहाल, अब कहा जा रहा है कि 5 मई को ‘हिमाचल दस्तक’ आखिरकार लाँच हो जाएगा।





