शंभूनाथ शुक्ल : कितना अजीब लगता है कि दीवाली सिर पर हो और एक चैनल महुआ अपने कर्मचारियों की तीन महीने की तनखा रोके हो। ऐसे में अगर वहां के कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से हड़ताल का फैसला लिया तो गलत क्या है। एक चैनल जिसके कार्यक्रम सफल रहे हों अपने कर्मचारियों की वजह से इस ऊँचाई पर पहुंचा और फिर उन्हीं की तनखा डकार गया। जितनी भी निंदा की जाए कम है।
साथी Yashwant Singh बधाई के पात्र हैं कि उनकी लड़ाई को सामने ही नहीं लाए वरन् उसका नेतृत्व भी संभाले हैं। उनके यहां प्रकाशित खबर देखें… "बड़ी खबर है कि महुआ न्यूज में सभी कर्मचारी तनख्वाह ना मिलने के कारण हड़ताल पर चले गये हैं, जिसकी वजह से महुआ में काम ठप्प पड़ गया है.
महुआ में काम कर रहे सभी कर्मचारियों को पिछले तीन महीने से वेतन नहीं दिया जा रहा था. ये कर्मचारी पिछले कई दिनों से महुआ प्रबन्धन से वेतन दिये जाने की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रबन्धन के द्वारा वेतन नहीं दिये जाने के कारण आज मजबूर होकर महुआ के सभी कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला कर लिया".
वरिष्ठ पत्रकार और कई अखबारों के संपादक रहे शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.
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