: प्रभात खबर ने रांची में आयोजित किया था कार्यक्रम : हजारों की भीड़ बेकरार लोग, उस पर मौसम की बेरूखी, आशा ताई ने चंद गाने गाये ही थे कि बारिश शुरू हो गयी। लोग मायूस ऐसा लग रहा था कि आशाजी की सुरीली आवाज को सुनने से महरूम रह जायेंगे लेकिन, शहरवासी भी कहां हार माननेवाले थे। हजारों की भीड़ ने धरती आबा के घर पहुंचीं आशाजी के गाने सुनने के लिए दुआ मांगी। एक साथ हजारों हाथ उठे बारिश थम गयी। फिर शुरू हुआ आशाजी के जादुई गानों का सिलसिला मंच पर उनके आते ही हजारों लोग फिर से नाचने-गाने के लिए उठ खड़े हुए उनकी एक झलक पाने के लिए हर शख्स बेचैन था बस, हर तरह एक ही आवाज थी आशा जी और आशा जी।
गौरतलब है कि काफी इंतजार के बाद दर्शकों को आशा भोंसले का लाइव शो देखने को मिला था। मौसम के साथ नहीं देने के कारण आशा जी का कार्यक्रम सात की जगह आठ जनवरी को हुआ। सात जनवरी को काफी प्रयास के बाद भी रांची में निजी विमान नहीं उतर सका। सात को वह कोलकाता में फंसी रहीं, आठ जनवरी को काफी प्रयास के बाद दिन के दो बजे रांची पहुंचीं। उस समय लगा मौसम साफ हो जायेगा और कार्यक्रम बिना अड़चन के होगा,लेकिन मौसम को यह मंजूर नहीं था। शाम के छह बजे आधे घंटे के लिए जबरदस्त बारिश हुई।

सारी तैयारियों के बाद भी लगा कि अब कार्यक्रम नहीं हो पायेगा लेकिन, सात बजे पूरी तैयारी के साथ आशा जी स्टेज पर आयीं। सरारा, सरारा गीत से कायक्रम को आगाज किया आधे घंटे में उन्होंने चार गाने पेश किये, इस बीच फिर से बारिश शुरू हो गयी दर्शकों को लगा कि कार्यक्रम अब नहीं हो पायेगा, तभी स्टेज से आशा जी ने घोषणा करवायी : वह छाता लेकर भी झारखंड के लोगों के लिए गाना गायेंगी, इसके बाद हजारों दर्शक वापस लौट गये। साढ़े सात से सवा आठ बजे तक लगातार बारिश हुई। बारिश रुकने बाद 8:20 बजे फिर बाबुल सुप्रियो मंच पर आये उन्होंने रंग जमा दी। आधे दर्जन एकल गाने पेश करने के बाद उन्होंने लता जी के साथ ड्यूट पेश किया। 8:20 से लगातार पौने दस तक दोनों कलाकारों ने दर्शकों का बांधे रखा आखिरकार बारिश और आशा की इस लड़ाई में जीत दर्शकों की हुई, जिन्होंने दो दिनों की संयम के बाद आशा जी को संयमित होकर सुना।
रांची के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में आशा भोंसले ने 40 हजार से अधिक श्रोताओं को अपने संगीत से झुमाया, जिसमें चार हजार सेना के जवान भी शामिल थे. आशा भोंसले ने झारखंड का अभिवादन ठेठ झारखंडी अंदाज में जोहार कह कर किया. कार्यक्रम में चीफ जस्टिस, राज्य के डिप्टी सीएम, सांसद, विधायक, सेना के बड़े अधिकारी, झारखंड सरकार के कई मंत्री एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे. प्रभात खबर इससे पहले भी ऐसे कई कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन करता रहा है, जिसमें प्रसिद्ध गजल गायक गुलाम अली, युवा गजल गायक रंजित सिंह रजवाड़ा के कार्यक्रम भी शामिल हैं.
कार्यक्रम के दौरान मौसम ने रांची का साथ नहीं दिया. कड़ाके की ठंड और कई बार बारिश की फुहारें लोगों को भीगा गयीं, लेकिन बावजूद इसके दर्शकों का जोश कम नहीं हुआ. सबने शांतिपूर्वक कार्यक्रम का आनंद उठाया. आशा भोंसले के बाद बारी थी युवा दिलों की धड़कन बाबुल सुप्रियो की. सुप्रियो ने पहले ही गीत से सबको झूमने पर मजबूर कर दिया. आशा और बाबुल के अंतिम डुएट ने भी कार्यक्रम में रंग जमा दिया. इसके साथ ही प्रभात खबर द्वारा आयोजित ऐतिहासिक शाम का समापन हुआ. इससे पहले प्रभात खबर के प्रबंध निदेशक केके गोयनका ने आशा भोंसले को शॉल ओढ़ाकर मोमेंटो भेंट किया, जबकि प्रभात खबर के कार्यकारी निदेशक आरके दत्ता ले बाबुल सुप्रीयो को शॉल ओढ़ाकर मोमेंटो भेंट किया.






