: कई न्यूज वेबसाइटों ने निर्दोष युवक रविकांत सिंह पर गैंगस्टर लगाए जाने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया : आपराधिक गतिविधियों से दूर-दूर का नाता न रखने वाले अपने चचेरे भाई पर गैंगस्टर लगाए जाने की कल सुबह सूचना मिलने के बाद मैं काफी परेशान हो गया. परेशान इसलिए भी हुआ कि हर उचित जगह अपील, अनुरोध, निवेदन करने के बावजूद निर्दोष पर गैंगस्टर लगाए जाने की प्रक्रिया रुकी नहीं. सोचता रहा कि आखिर किस तरह का सिस्टम है यूपी में.
प्रमुख सचिव लेवल का अफसर भी असहाय है, अन्यथा अगर ऐसा न होता तो प्रशांत त्रिवेदी लखनऊ के पत्रकारों को यह आश्वासन नहीं देते कि डीएम से बात हो गई है, गैंगस्टर नहीं लगेगा, आप लोग निश्चिंत रहें. मतलब, प्रमुख सचिव लेवल के अफसर की बात का कोई वजन नहीं. एडीजी लॉ एंड आर्डर सुबेश कुमार सिंह से मैंने फोन पर बात की थी. उन्होंने प्रकरण को संक्षेप में लिखकर एसएमएस करने को कहा. उन्हें अलग-अलग दिनों में दो बार एसएमएस किया. लेकिन कहीं कुछ नहीं हुआ. कल जब उनसे बात हुई तो वे बोले कि ऐसा थोड़े ही होता है, आप यहां आकर प्रतिवेदन दें.
सोचिए, आप कटोरी लेकर भिक्षाटन की मुद्रा में जब इन अफसरों के दरवाजे पहुंचेंगे तब ये आपकी कटोरी में दया भाव से कुछ न्याय टाइप की चीज डाल देंगे और अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो ये लोग आपकी कोई बात नहीं सुनेंगे. धन्य हैं ये पुलिस अधिकारी और इनकी सोच. सुबेश कुमार सिंह की तारीफ मैंने कुछ लोगों से सुनी थी, इसलिए उन्हें फोन कर लिया और अनुरोध कर लिया था. लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह अधिकारी इतनी घटिया बात बोलेगा. सुबेश जी, आप निश्चिंत रहें, किसी दिन जरूर लोटते डगरते छाती पीटते गुहार लगाते विलापते आपके दरवाजे न्याय की भीख मांगने पहुंचूंगा, तब आप मुझे उपकृत कर जन्म-जन्मांतर के लिए अपना गुलाम बना लीजिएगा.
खैर, मैं बात कर रहा था कि कल सुबह का दुख दोपहर में कलम के जरिए शब्दों के रूप में फूटा और मैंने एक खबर बनाकर ढेर सारे लोगों की मेल आईडी पर भेज दिया, जिस जिस की मेल आईडी आंख के सामने दिखी, उन्हें एक संदेश के साथ मेल कर दिया. संदेश ये था-
''आदरणीय, आप सभी लोगों से निवेदन है कि यूपी पुलिस की इस अन्यायपूर्ण कार्यवाही का विरोध अपने अपने लोकतांत्रिक तरीकों-माध्यमों के जरिए करें. आपका सपोर्ट हमारे लिए कीमती है. हो सके तो इस मेल के रिप्लाई में प्रकरण पर अपना विचार या निंदा वक्तव्य भेजें ताकि उसे अगले समाचार का पार्ट बनाया जा सके. मैं यहां बताना चाहूंगा कि अगर मेरा चचेरा भाई किसी भी किस्म के अपराध में कभी लिप्त रहा होता तो मैं उसका पक्ष कतई नहीं लेता. लेकिन पुलिस जिस तरीके से निजी खुन्नस में मेरे परिजनों को प्रताड़ित कर रही है उससे मैं बेहद आहत हूं. इस मुश्किल घड़ी में आपके समर्थन और सक्रियता की उम्मीद करता हूं. आभार यशवंत''
और इसका आश्चर्यजनक रिस्पांस मिला. ढेर सारी वेबसाइटों ने न्यूज को प्रमुखता से प्रकाशित किया है. मैं न्यू मीडिया के इन सभी साथियों को सलाम करता हूं और भरोसा देता हूं कि उनकी किसी जंग में जब भी मेरी जरूरत पड़े, बेहिचक मुझे बताएं. मैं उनके साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ा मिलूंगा. मैं यहां उन कुछ वेबसाइटों के लिंक दे रहा हूं जिन्होंने खबर प्रकाशित की है, लिंक पर क्लिक करके सीधे उस वेबसाइट पर प्रकाशित खबर तक पहुंच सकते हैं. और अगर किसी वेबसाइट का लिंक मुझसे छूट गया हो तो मुझे [email protected] पर जरूर मेल कर दें. उसे इसी में जोड़ दूंगा. फेसबुक के ढेर सारे साथियों का भी आभार करना चाहूंगा जिन्होंने इस प्रकरण पर अपने विचार प्रकट किए. मैं अपने कई दोस्तों का भी शुक्रगुजार हूं जिन्होंने इस मुश्किल वक्त में फोन कर एसएमएस कर मुझे संबल और लड़ने का हौसला दिया. -यशवंत
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http://visfot.com/home/index.php/permalink/5291.html
http://www.janjwar.com/society/crime/2057-up-police-aterocities-bhadas4media
http://www.bhadas4police.com/uttar-pradesh-gazipur-police-doing-bad-job-3.html
http://janjagranmediamanch.org/gajeepur-police-ka-sharmnaak-kaarnamaa





