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दूज का चांद से चौदहवीं का चांद बन गया हिंदी विवि : नामवर सिंह

: हिंदी विवि के 14वें स्‍थापना दिवस पर हुए विविध कार्यक्रम : वर्धा : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विवि के चौदहवें स्‍थापना दिवस के अवसर पर विवि परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रख्‍यात आलोचक व विवि के कुलाधिपति प्रो. नामवर सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में विश्‍वविद्यालय के तेजी से हुए विकास को देखकर मेरी छाती दुगुनी हो गई है। इस विकास का श्रेय जाता है कुलपति विभूति नारायण राय को। दूज के चांद को उन्‍होंने चौदहवीं का चांद बना दिया है। अपने कार्यकाल में इसे वे पूर्णिमा का चांद बनायेंगे, ऐसी आशा है। इनका कार्यकाल बढ़ेगा तो विश्‍वविद्यालय की प्रगति शिखर पर पहुंच जाएगी।

: हिंदी विवि के 14वें स्‍थापना दिवस पर हुए विविध कार्यक्रम : वर्धा : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विवि के चौदहवें स्‍थापना दिवस के अवसर पर विवि परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रख्‍यात आलोचक व विवि के कुलाधिपति प्रो. नामवर सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में विश्‍वविद्यालय के तेजी से हुए विकास को देखकर मेरी छाती दुगुनी हो गई है। इस विकास का श्रेय जाता है कुलपति विभूति नारायण राय को। दूज के चांद को उन्‍होंने चौदहवीं का चांद बना दिया है। अपने कार्यकाल में इसे वे पूर्णिमा का चांद बनायेंगे, ऐसी आशा है। इनका कार्यकाल बढ़ेगा तो विश्‍वविद्यालय की प्रगति शिखर पर पहुंच जाएगी।

उन्‍होंने कहा हिंदी को सर्वजन की भाषा बनाने के लिए यहां के शिक्षक और छात्रों को निरंतर प्रयत्‍न करना चाहिए। 14 वें स्‍थापना दिवस के मौके पर जाने माने पर्यावरणविद और समाजसेवी राजेन्‍द्र सिंह ने कहा कि महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी काफी जिम्‍मेदारियां पूरी की हैं और उसके सामने अब भी अनेक ऐसे लक्ष्‍य हैं जिसे पूरा करना है। आज सबसे ज्‍यादा जरूरत इस बात की है कि देश के जो पारंपरिक संसाधन हैं उसका शोषण रोका जाय और उनका उपयोग देश के लोगों के लिए किया जाय। इसके लिए आज संघर्ष चलाने की जरूरत है। वैसे तो हिंदी प्‍यार की भाषा है लेकिन उसे अपने हक के लिए संघर्ष की भाषा बनना पड़ेगा। इस विवि ने हिंदी को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर गौरव दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभायी है। हिंदी विवि के सामने मैं एक प्रस्‍ताव रखना चाहता हूं कि वह विभिन्‍न इलाकों में ग्राम स्‍वराज्‍य के लिए चल रहे आंदोलन को हिंदी में लिपिबद्ध कराए।

स्‍वागत वक्‍तव्‍य में कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में विवि ने अनेक शिखर स्‍तर की उपलब्धियां हासिल की हैं कोलकाता और इलाहाबाद केंद्र खोले गए और आने वाले दिनों में मॉरीशस में भी केंद्र खालने की योजना है। अगली योजना में विवि के अंतर्गत चार नए विद्यापीठ खोलने की स्‍वीकृति मिल चुकी है, यह हमारी उत्‍साह को बढ़ाने वाला है। अब हम विश्‍वास के साथ कह सकते हैं कि हमारा विश्‍वविद्यालय उड़ान पर है। इस विवि को अंतरराष्‍ट्रीय यूं ही नहीं कहा गया था इसके पीछे एक स्‍पष्‍ट अवधारणा है। दुनिया के 200 विश्‍वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है उनमें समन्‍वय का काम हमारा विश्‍वविद्यालय करने की कोशिश में है। श्री राय ने कहा कि दुनियाभर के देशों से लोग हमारे यहां हिंदी पढ़ने आ रहे हैं और यहां से ज्ञान समृद्ध होकर जा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि हमने वर्धाकोश की योजना पर काम शुरू कर दिया है। हिंदी में स्‍पेल चेक बनाने का काम चल रहा है और हम जल्‍दी ही समग्र हिंदी व्‍याकरण पर काम शुरू करने वाले हैं।

स्‍वागत वक्‍तव्‍य में प्रतिकुलपति प्रो. ए.अरविंदाक्षन ने कहा कि विवि की शोध परियोजनाएं काफी लोकप्रिय हो रही हैं। हमारी कोशिश है कि 12 वीं योजना में हिंदी सभी भारतीय भाषाओं का मंच बने, हमारा कोलकाता केंद्र पूर्वी भात के भाषा में समन्‍वय स्‍था‍पित करेगा, ऐसी आशा है। इस अवसर पर मंचस्‍थ अतिथियों के हाथों हिंदी विवि का कैलेण्‍डर का लोकार्पण किया गया। साहित्‍य विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. सूरज पालीवाल की वाणी प्रकाशन से प्रकाशित पुस्‍तक '21 वीं सदी का पहला दशक और हिंदी कहानी' का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में जहां विवि के डिबेटिंग सोसायटी की ओर से आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्‍कृत किया गया वहीं खेल विभाग की ओर से आयोजित बैडमिंटन, बॉलीवाल, क्रिकेट प्रतियोगिता के विजेता और उपविजेताओं को भी पुरस्‍कृत किया गया। मुख्‍य समारोह के पश्‍चात सांस्‍कृतिक कार्यक्रम में श्री श्री गोविंदजी नत संकीर्तन, मणिपुर की लोक नृत्‍य प्रस्‍तुति ने उपस्थितों को खूब रिझाया। संचालन साहित्‍य विद्यापीठ की रीडर डॉ. प्रीति सागर ने किया तथा कुलसचिव डॉ. के.जी.खामरे ने धन्‍यवाद ज्ञापन किया।

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