रायपुर। जगदलपुर के मरेंगा में दूरदर्शन केन्द्र के रिले सेंटर में हुए हमले के पीछे नक्सलियों का हाथ है अथवा नहीं, यह अभी जांच का विषय है। क्योंकि घटना को अंजाम देने के तरीके एवं उसके बाद निर्मित स्थिति को देखकर नहीं लगता है कि यह कारनामा नक्सलियों ने अंजाम दिया है। क्योंकि जवानों की मौत के बाद उन्होंने न ही हथियार लूटा है और न ही रिले सेंटर के उपकरणों को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाई है। उक्त बातें पत्रकारों से चर्चा करते हुए दूरदर्शन केन्द्र के महानिदेशक त्रिपुरारी शरण एवं यांत्रिकी विभाग के प्रमुख आरके सिन्हा ने कही।
उन्होंने बताया कि वे घटना में शहीद हुए जवानों के परिजनों से भी मिले हैं, ताकि किसी भी जवान अथवा दूरदर्शन कर्मी ऐसे कठिन मौके पर खुद को अकेला न समझें। उन्होंने डयूटी पर तैनात कर्मियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए भी यह दौरा करने का फैसला तत्काल किया। सभी शहीद हुए जवानों के परिजनों को दूरदर्शन की ओर से हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।
श्री शरण ने कहा कि घटना के बाद निर्मित हुई स्थिति से नहीं लगता है कि यह हमला दूरदर्शन के रिले सेंटर पर हुआ था, वहीं उन्होंने इसे नक्सली घटना होने से इंकार कर कहा कि यह अभी जांच का विषय है। पुलिस की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति और घटना के घटित होने के कारण सामने आएंगे। उन्होंने कहा- दूरदर्शन के रिले सेंटर पर 1-4 के हिसाब से जवान तैनात थे, जो सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त थे। परंतु अब 2-8 के हिसाब से जवानों की तैनाती की गई है।
श्री शरण ने कहा कि प्रत्येक राज्य में स्थापित दूरदर्शन केन्द्र के रिले सेंटर एवं कार्यालयों की सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां की स्थानीय पुलिस ही करती है और इसके लिए राज्य सरकार ही अधिकृत होती है। उन्होंने कहा कि उनके विभाग को इस हमले की पूर्व से जानकारी नहीं थी। केन्द्र अथवा राज्य सरकार के इंटेलिजेंस विभाग को इसकी पूर्व जानकारी थी अथवा नहीं, वे यह नहीं बता सकते। आने वाले समय में अपने सभी रिले सेंटर एवं दूरदर्शन केन्द्र की भवनों की सुरक्षा का दायित्व वे केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों को सौंपेंगे। इसके लिए अभी सीआईएसएफ से चर्चा चल रही है। वहीं एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शरण ने कहा कि दूरदर्शन की आवश्यकता के अनुसार आने वाले दिनों में नई नियुक्तियां की जाएगी, अभी इसके लिए विज्ञापन निकाला गया है। (देबं)






